भारत के राष्ट्रपति | President of India - BHARAT GK - GK in Hindi

4 January 2019

भारत के राष्ट्रपति | President of India

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भारत के राष्ट्रपति | President of India

भारतीय संविधान के भाग - 4 और अनुच्छेद 52 से अनुच्छेद 62 तक राष्ट्रपति का वर्णन है। राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रधान होता है। भारत का राष्ट्रपति  संविधान का संरक्षण तथा भारतीय जनता का प्रतीक होता है। अनुच्छेद 52 के तहत भारत में एक राष्ट्रपति होंगे। अनुच्छेद 53 में वर्णन है कि संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। जिसका प्रयोग राष्ट्रपति स्वयं या अधीनस्थ अधिकारी के माध्यम से करेंगे।

राष्ट्रपति का निर्वाचन

अनुच्छेद 54 में राष्ट्रपति के निर्वाचन का वर्णन है। निर्वाचन में दोनों सदनों के निर्वाचित प्रतिनिधि और विधानसभा की प्रतिनिधि भाग लेंगे। 70 वां संविधान संशोधन (1952) के तहत दिल्ली और पांडिचेरी में विधान सभा की स्थापना की गई है। इस हेतु ये दोनों केंद्र शासित प्रदेश राष्ट्रपति निर्वाचन में भाग लेते हैं। राष्ट्रपति का निर्वाचन, निर्वाचक मंडल, गुप्त मतदान, अनुपातिक प्रतिनिधि और एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है। राष्ट्रपति का कोई भी उम्मीदवार यदि 50% से अधिक मत प्राप्त करते हैं तो वे निर्वाचित घोषित किए जाते हैं। परंतु 50% से कम मत प्राप्त करने पर दोहरी मतगणना का उपयोग करना पड़ता है। दोहरी मतगणना से निर्वाचित होने वाला एकमात्र राष्ट्रपति वीवी गिरी (1969) है।अनुच्छेद 55 में राष्ट्रपति के निर्वाचन में समरूपता एवं समतुल्यता का वर्णन है।
★ संसद सदस्य या विधान सभा का सदस्य अपने राज्य से भी मतदान कर सकते हैं परंतु उन्हें 10 दिन पहले सूचना देना होता है।
★ 1974 में जब गुजरात विधानसभा भंग था इसके बावजूद राष्ट्रपति चुनाव हुआ था।
★ भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए जन्म सिद्धांत आवश्यक नहीं है। जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के लिए जन्म सिद्धांत आवश्यक है।
★ राष्ट्रपति निर्वाचन के खिलाफ उम्मीदवार सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं।

राष्ट्रपति का कार्यकाल

अनुच्छेद 56 में राष्ट्रपति के कार्यकाल का वर्णन है। राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्षों तक पद पर रहेंगे तक पद पर रहेंगे। इससे पहले भी उपराष्ट्रपति को सूचना देकर त्यागपत्र दे सकते हैं। इसकी जानकारी लोकसभा के अध्यक्ष को देना होगा। राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर 6 महीना के अंदर अंदर चुनाव आवश्यक है। लेकिन उपराष्ट्रपति के लिए यह व्यवस्था नहीं है। अमेरिका में राष्ट्रपति के अनुपस्थिति में शेष समय  के लिए उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। जबकि भारत में राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 वर्षों का होता है और शपथ ग्रहण की तारीख 20 जनवरी है। यदि राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों का पद रिक्त हो तो ऐसी स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद को संभालेंगे। 1969 में जब जाकिर हुसैन का देहांत हो गया तो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एम हिदायतुल्ला कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।
अनुच्छेद 57 - इस अनुच्छेद में वर्णन है कि राष्ट्रपति दोबारा चुने जा सकते हैं। डॉ राजेंद्र राजेंद्र प्रसाद के अलावा दोबारा चुने जाने वाले राष्ट्रपति अभी तक नहीं बने हैं।

राष्ट्रपति का योग्यता

अनुच्छेद 58 में  राष्ट्रपति बनने की योग्यताओं का वर्णन है।
  • भारत का नागरिक हो।
  • 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  • संसद सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
  • भारत या राज्य सरकार के अधीन लाभ के पद पर ना हो।
  • पागल यदि वालिया ना हो।
★ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति अथवा संघीय राज्य के मंत्री परिषद के सदस्य को लाभ का पद के अंतर्गत नहीं माना गया है। अतः ये सभी राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं।
★ पद पर रहते हुए राष्ट्रपति, चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन विवि गिरी ने चुनाव लड़ने के लिए त्याग पत्र दे दिया। इस हेतु सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हिदायतुल्ला कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे।
★ प्रोफेसर पद पर रहते हुए भी चुनाव लड़ सकते हैं परंतु गैर राजनीतिक पदाधिकारी पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

राष्ट्रपति का वेतन

अनुच्छेद 59 में राष्ट्रपति का वेतन भत्ता का उल्लेख है। पहले राष्ट्रपति का वेतन ₹1.5 लाख प्रति महीना मिलता था जिसे वर्तमान समय में बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। दोबारा चुने जाने पर पेंशन की व्यवस्था नहीं है। डॉ राजेंद्र प्रसाद दोबारा चुने गए थे। राष्ट्रपति का वेतन आयकर से मुक्त है।
अनुच्छेद 60 - इसमें राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण का वर्णन है। शपथ ग्रहण सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश कराते हैं।

राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया

अनुच्छेद 61 के तहत राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने की व्यवस्था है। महाभियोग कोई भी सदन लगा सकती है। महाभियोग लगाने के लिए किसी भी  सदन के 1/4 सदस्यों का हस्ताक्षर आवश्यक है। जो सदन महाभियोग लगाती है उसे संकल्प पारित करने से पहले 14 दिन पूर्व राष्ट्रपति को सूचना देना आवश्यक है। इसके बाद कुल सदस्य, उपस्थित सदस्य या मतदान में भाग लेने वाले दो तिहाई बहुमत से पारित करना होगा। इसके बाद दूसरा सदन भेजा जाएगा। दूसरा सदन समीक्षा का सदन होगा। राष्ट्रपति स्वंग या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी अस्पष्टीकरण देंगे। यदि दूसरा सदन भी दो तिहाई बहुमत से पारित कर देती है तो राष्ट्रपति पद से मुक्त समझे जाएंगे। अभी तक (2018) किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं लगाया गया है। परतंत्र भारत में 1788 में वारेन हेस्टिंग्स पर महाभियोग लगाया गया था। परंतु पारित नहीं हो सका। तत्पश्चात 1993 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी रामास्वामी पर महाभियोग लगाया गया पर यह भी पारित नहीं हो सका। इसके पश्चात 2012 में पश्चिम बंगाल के न्यायाधीश सौमित्र सेन और कर्नाटक के न्यायाधीश पी दिनाकरण दिनाकरण पर महाभियोग लगाया गया परंतु उन्होंने त्याग पत्र दे दिया।
अनुच्छेद 62 - इसके तहत राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर 6 महीना के अंदर चुनाव कराना आवश्यक है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। 1960 में डॉ राजेंद्र प्रसाद रूस की यात्रा पर गए थे तो कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में डॉ राधाकृष्णन ने पदभार संभाला था। पुनः 1961 में जब राष्ट्रपति बीमार पड़ गए गए तो 15 दिनों के लिए राधाकृष्णन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। 1969 में डॉक्टर जाकिर हुसैन का देहांत हुआ तो वी वी गिरी 6 महीना तक पूर्ण कार्यवाहक राष्ट्रपति बने रहें। अभी तक चार लोगों ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया है –
  1. राधाकृष्णन
  2. वी वी गिरी
  3. बी डी जत्ती
  4. मोहम्मद हिदायतुल्ला
कार्यवाहक राष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी सुविधा दी जाती है। वर्तमान में 14वें (15वां चुनाव) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद है।
अभी तक 8 लोग निर्विरोध राष्ट्रपति बने है –
  1. डॉ राजेंद्र प्रसाद
  2. फखरुद्दीन अली अहमद
  3. नीलम संजीवा रेड्डी
  4. ज्ञानी जैल सिंह
  5. एपीजे अब्दुल कलाम
  6. श्रीमती प्रतिभा पाटिल
  7. प्रणब मुखर्जी
  8. रामनाथ कोविंद
★ अनुच्छेद 74 के तहत रास्ट्रपति को सहायता एवं सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगा जिसका प्रधान, प्रधानमंत्री होगा।
★ 42वां संविधान संशोधन के तहत अनुच्छेद 74 में (1) कर यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की बात मानने के लिए बाध्य हैं।
★ अनुच्छेद 75 (1) के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं। अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री के सिफारिश पर राष्ट्रपति करते हैं। प्रधानमंत्री के अलावा कार्यपालिका संबंधित सारी नियुक्तियां राष्ट्रपति करते हैं।
★ अनुच्छेद 11 के तहत राष्ट्रपति द्वारा धन विधेयक को छोड़कर साधारण विधेयक को एक बार पुनर्विचार हेतु भेजा जा सकता है।
★ अनुच्छेद 78 में यह प्रावधान है कि प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की सारी जानकारी राष्ट्रपति को को देंगे।
★ अनुच्छेद 79 में कहा गया है कि भारत में एक संसद होगा जिनके अंग राष्ट्रपति होंगे।

राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां

अनुच्छेद 80 (3) के तहत राष्ट्रपति राज्यसभा में साहित्य विज्ञान और कला के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं।
अनुच्छेद 331 के तहत लोकसभा में राष्ट्रपति दो एंग्लो इंडियन को मनोनीत करते हैं। जबकि राज्यपाल अनुच्छेद 333 के तहत एक एंग्लो इंडियन को मनोनीत करते हैं। यह प्रावधान 23 वां संविधान संशोधन द्वारा किया गया।
अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति महोदय संसद का अधिवेशन बुलाते हैं, सत्रावसान करते हैं और लोकसभा को भंग भी करते हैं।
अनुच्छेद 86 के तहत राष्ट्रपति दोनों सदनों में अभिभाषण देते हैं और अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति विशेष अभिभाषण देते अभिभाषण देते हैं।
अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुलाते हैं जिन की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करते हैं अभी तक 3 बार संयुक्त अधिवेशन हुआ है –
  1. 1961 – दहेज प्रथा
  2. 1978 – बैंकिंग
  3. 2002 – POTA
राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना कोई भी विधेयक कानून का रूप नहीं ले सकती है। यदि राष्ट्रपति को कोई विधेयक अस्वीकार हो तो वह 6 महीना तक अपने पास लंबित रख सकता है। वह किसी विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस संसद में भेज सकता है। 1986 में ज्ञानी जैल सिंह और प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच गतिरोध के कारण भारतीय डाक संशोधन विधेयक पर वीटो का प्रयोग किया गया। यह विधेयक 'जेबी विटो शक्ति' के नाम से जाना जाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति वीटो का प्रयोग केवल 10 दिनों के लिए करते हैं।
संसद में कुछ विधायकों को प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की सहमति लेना आवश्यक है। जैसे –
  • धन विधेयक - अनुच्छेद 110
  • राज्य हित को प्रभावित करने वाले कराधान संबंधी विधेयक - अनुच्छेद 304
  • राज्यों की सीमाओं एवं नामों में परिवर्तन करने वाले विधेयक
  • राज्यों के बीच व्यापार वाणिज्य व समागम पर निबर्धन लगाने वाले विधेयक
अनुच्छेद 129 के तहत राष्ट्रपति अधिवेशन ना चलने पर अध्यादेश जारी करते हैं। सत्र प्रारंभ की 6 सप्ताह के अंदर दोनों सदनों की स्वीकृति आवश्यक है अन्यथा निरस्त समझा जाएगा। 44 वें संविधान संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया कि अध्यादेश विधि संवत ना हो तो न्यायालय में चुनौती दिया जा सकता है।
पद पर रहते हुए राष्ट्रपति पर फौजदारी मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। दीवानी मुकदमा चलाया जा सकता है परंतु 2 महीने पूर्व इसकी सूचना देना आवश्यक है।
राष्ट्रपति की सैन्य शक्ति - देश का सर्वोच्च नागरिक होने के नाते राष्ट्रपति तीनों सेनाओं (जल, थल और वायु) का प्रमुख होते हैं।
राष्ट्रपति की राजनीतिक शक्ति - विदेशों में भारतीय राजपूतों की नियुक्ति करना  भारत में विदेशी राजपूतों की नियुक्ति के को स्वीकृति देना तथा सरकार के सभी कार्यपालिका संबंधी कार्य राष्ट्रपति के नाम से होता है।
राष्ट्रपति के न्यायिक अधिकार - राष्ट्रपति न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं उनको पदच्युत करते हैं। अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श ले सकते हैं परंतु परामर्श मानने के लिए बाध्य नहीं है।
क्षमादान की शक्ति - अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमादान, प्रतिलंबन, विराम निलंबन लघु करण की शक्ति प्राप्त है।
राष्ट्रपति की आपात शक्तियां - विशेष परिस्थिति में राष्ट्रपति अनुच्छेद 352, अनुच्छेद 356 और अनुच्छेद 360 का प्रयोग करते हैं।
  • अनुच्छेद 352 - राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आपात 
  • अनुच्छेद 356 - राष्ट्रपति शासन 
  • अनुच्छेद 360 - आर्थिक या वित्तीय आपात
 ★ 1969 के चुनाव में नीलम संजीवा रेड्डी हार गए थे फिर 1977 में यह निर्विरोध निर्वाचित हुऐ।
★ डॉ जाकिर हुसैन राष्ट्रपति बनने से पहले बिहार के राज्यपाल थे।
★ जाकिर हुसैन तथा फखरुद्दीन अली अहमद का पद पर रहते हुए देहांत हो गया।
★ डॉक्टर दयाल शर्मा राष्ट्रपति से पहले मुख्यमंत्री और राज्यपाल थे।
★ आंध्र प्रदेश आर वेंकटरमन राष्ट्रपति बनने से पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे।
★ के आर नारायण पहला अनुसूचित जाति के राष्ट्रपति थे। ये विधान सभा को संबोधित करने वाला पहला राष्ट्रपति थे। इन्होंने पंक्तिबद्ध होकर मतदान मतदान किया था। यह हिंदी नहीं जानते थे। इन्होंने 1988 में यूपी के राष्ट्रपति शासन को वापस लिया था और 1999 में बिहार विधानसभा को भंग न करके स्थगित किया और राज्यसभा में बहुमत साबित करने को कहा।
★ मिसाइल मैन के नाम से डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जाने जाते हैं। कलाम ने भी बिहार विधान सभा को संबोधित किया था तथा इन्होंने बिहार का 3 बार यात्रा किया।
★ दूसरे जनजाति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद है।
★ नीलम संजीवा रेड्डी और ज्ञानी जेल सिंह NAM के महासचिव पद पर रहे हैं।
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