BHARAT GK

13 June 2019

संगम काल | Sangam Period

संगम काल

संगम (संस्कृत) का शब्द है जिसका अर्थ संग, परिसर या सभा होता है। दक्षिण भारत के इस प्रदेश में तमिल कवियों द्वारा सभाओं तथा गोष्ठियों का आयोजन किया जाता था। इन गोष्ठियों में विद्वानों के मध्य विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता था, इसे ही 'संगम' के नाम से जाना जाता है। इस शब्द का प्रयोग तिरुवरूर वकार नयनार ने किया था। पाण्ड्य नेतृत्व में तीन संगम संगम का आयोजन किया गया। इसमें दक्षिण के 3 राज्य (चेर, चोर तथा पाण्ड्य) सम्मिलित थे।
पहला संगम - पहला संगम पाण्ड्य की राजधानी मथुरा में हुआ जिसकी अध्यक्षता अगस्त ऋषि ने किया।

दूसरा संगम - दूसरा संगम का आयोजन मधुरा के समुंद्र में विलय हो जाने के कारण कपाट पुरम में हुआ। इसके अध्यक्ष तोलकपियर थे। इन्होंने व्याकरण ग्रंथ तोल्कापपियम् की रचना किया। यह एक व्याकरण ग्रंथ है।

तीसरा संगम - तीसरा संगम का आयोजन परवर्ती मदूरा नगर में हुआ जिसकी अध्यक्षता नक्कीकर ने किया किया। इस संगम में बहुत सारे ग्रंथों की रचना हुई जिसमें प्रमुख है –

शिलप्पादिकारम् - इसके रचयिता इलांगो अडिगल है। इसे संगम काल का महाकाव्य कहा जाता है। इसे राष्ट्रीय तमिल काव्य भी माना जाता है। शिलप्पादिकारम् का अर्थ पायल की कथा होता है। यह ग्रंथ प्रेम कथा पर आधारित है इसका नायक कोबलन और नायिका कण्णगी है। इस ग्रंथ में कण्णगी पूजा (पत्नी पूजा) का उल्लेख मिलता है।

मणिमेकलई - इसके रचनाकार चितलाई चतनार है। यह भी प्रेम कथा पर आधारित है। इसकी नायिका माधवी है यह प्रेमी की मृत्यु के पश्चात बौद्ध भिक्षु बनी थी।

तिरुक्कुरल - इसकी रचना तिरुवल्लुवर ने किया। इसे संगम काल का बाइबिल कहा जाता है। इसे दक्षिण का पांचवा वेद माना जाता है। इसमें धर्म शास्त्र, अर्थशास्त्र और कामसूत्र का वर्णन है।

जीवक चिंतामणि - इसके रचनाकार तिरुतक्कदेवर है। इसमें जन्म से लेकर मोक्ष तक का वर्णन है। इसमें कवि ने 'जीवक' नामक राजकुमार का जीवनवृत्त प्रस्तुत किया है।

संगम काल के प्रमुख वंश :

चेर वंश

संगम काल में पाड्य, चोल और चेर में सबसे प्राचीन चेर राज्य था। सत्ता का केंद्र केरल था। प्रथम शासक उदयन को माना जाता है। इन्होंने केरल में पाकशाला की स्थापना किया, यहां जनता को भोजन कराया जाता था। इस वंश का महान शासक शेनगुट्टुवन या लाल चेर था। इन्होंने अपनी पत्नी कन्नागी की की पूजा देवी के रूप में मूर्ति बनाकर प्रारंभ करवाया। लाल चेर के पश्चात इसका भाई पेरुनजेरल इरंपोरई शासक बना। इसका युद्ध चोल शासक करिकाल से हुआ। घायल हो जाने के कारण इसे हार का सामना करना पड़ा। प्रायश्चित हेतु रणभूमि रणभूमि में ही शरीर का त्याग कर दिया।

चोल वंश

चोल वंश का सबसे प्रतापी शासक करिकाल था। करिकाल अर्थ जला हुआ पैर वाला व्यक्ति होता है। इसने कावेरी नदी के तट पर पूम्पुहर को राजधानी बनाया। इसने चेर शासक पेरुजेरल को परास्त किया था। करिकाल ने संपूर्ण तमिल क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया। इसकी नाभिक शक्ति सुदृढ़ सुदृढ़ होने के कारण इसने श्रीलंका पर श्रीलंका पर भी अधिकार किया।

पांड्य वंश

पांड्य वंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक Nedunjeliyan II नेदुनजेलियण था। सत्ता का केंद्र मदुरै था। इन्होंने शिलप्पादिकारम् के नायक कोबलन को मृत्युदंड दिया क्योंकि इस पर इसके पत्नी के पायल चुराने का आरोप था। पांडे शासकों का रोम के साथ व्यापारिक संबंध था।
चेर का प्रतीक चिन्ह - धनुष
चोल का प्रतीक चिन्ह - बाघ या चीता
पांडे का प्रतीक चिन्ह -  मछली
संगम काल में कर 1/6 था।
इस समय के महत्वपूर्ण देवता मुरुगन थे।
चोल राज्य को चोर मंडलम या कोरोमंडल कहा जाता था।
पांडे की सत्ता का केंद्र मदुरई और महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र प्रतिष्ठान आंध्र प्रदेश थी।
संगम काल में न्यायालय को मनरम कहा जाता था और गुप्तचर को ओरर कहा जाता था।
संगम युग को तमिल साहित्य का स्वर्ण युग काल कहा जाता है। इसका समय 300 ईसा पूर्व से 300 ईसवी तक माना जाता है। संगम साहित्यों के अनुसार इस समय समाज में वर्ण व्यवस्था का स्पष्ट विभाजन नहीं था, फिर भी समाज में ब्राह्मणों को सम्मानजनक स्थान प्राप्त था।

8 June 2019

महान्यायवादी | Attorney General

महान्यायवादी (Attorney General)

अनुच्छेद 76 में वर्णन है कि भारत में एक महान्यायवादी होगा इस की नियुक्ति राष्ट्रपति करेंगे। महान्यायवादी भारत का प्रथम विधि अधिकारी होता है। यह विधि संबंधी सलाह सरकार को देती है। यह मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता है जबकि ब्रिटेन में महान्यायवादी भी मंत्रिमंडल का सदस्य होता है। अभी तक 15 महान्यायवादी चुने जा चुके हैं वर्तमान (2019) में भारत के 15वें महान्यायवादी के. के. वेणुगोपाल है जिन्होंने जून 2017 से मुकुल रोहतगी का स्थान लिया है।

महान्यायवादी बनने की योग्यता

  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • दस साल के लिए उच्च न्यायलय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए।
  • सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनने के बराबर योग्यता रखता हो।

महान्यायवादी की पदावधि

इसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता है इसलिए वह राष्ट्रपति की मर्ज़ी के अनुसार ही कार्यरत रहता है। परन्तु परम्परानुसार इसकी नियुक्ति 3 साल के लिए की जाती है। उसे किसी भी समय राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। उसे हटाने के लिए संविधान में कोई भी प्रक्रिया या आधार उल्लेखित नहीं है।
★ सबसे लंबे समय तक एम सी सीतलवाड़ जबकि सबसे कम समय तक सोली सोराबजी महान्यायवादी रहे।

महान्यायवादी का वेतन

महान्यायवादी का वेतन राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है। संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है।

यह किसी सदन का सदस्य नहीं होता है लेकिन यह किसी भी सदन में जा सकता है, बोल सकता है परंतु अनुच्छेद 88 के तहत यह मत का प्रयोग नहीं कर सकता है। यह भारत सरकार के विरुद्ध किसी को सलाह नहीं दे सकता है और ना ही मुकदमों की पैरवी कर सकता है। महान्यायवादी भारत सरकार का पूर्णकालिक सदस्य नहीं हो सकता है और ना ही सरकारी सेवक होता है। इसको सहायता के लिए एक सॉलिसिटर जनरल तथा दो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल होते हैं। महान्यायवादी को भारत के राज्य क्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। महान्यायवादी को भारत की संचित निधि से वेतन व भत्ते दिए जाते हैं। अनुच्छेद 105 (4) के तहत इसे संसद सदस्यों के समान ही विशेषाधिकार प्राप्त है।

4 June 2019

भारत का प्रधानमंत्री तथा मंत्री परिषद | Prime Minister of India

मंत्रिपरिषद एवं प्रधानमंत्री

संघीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति संविधान प्रधान होता है जबकि व्यवहारिक रूप से प्रधानमंत्री ही कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख होता है। अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति को सहायता एवं सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगा जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होता है। प्रधानमंत्री किसी मंत्री को हटा सकता है, त्याग पत्र मांग सकता है और इनकार करने पर राष्ट्रपति को उसे हटाने की सलाह दे सकता है।
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प्रधानमंत्री बनने की योग्यता

  • भारत का नागरिक हो।
  • 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  • प्रधानमंत्री बनते समय वह किसी भी लाभ के पद पर नियुक्त ना हो।

प्रधानमंत्री का वेतन

प्रधानमंत्री का वेतन संसद द्वारा तय किया जाता है और समय-समय पर संशोधित किया जाता है। वर्तमान में प्रधानमंत्री का वार्षिक वेतन ₹20 लाख रुपए है।

2003 से पहले मंत्रियों की संख्या निश्चित नहीं थी लेकिन 91वां संविधान संशोधन द्वारा कुल सदस्यों का अधिकतम 15% होनी चाहिए। संविधान में मंत्रियों की संख्या का उल्लेख नहीं है। व्यवहार में चार प्रकार के मंत्री होते हैं –
  1. कैबिनेट मंत्री
  2. राज्य मंत्री
  3. स्वतंत्र प्रभार मंत्री
  4. उप मंत्री
कैबिनेट मंत्री - यह सिर्फ अपने विभाग का अध्यक्ष होते हैं मंत्रिमंडल की बैठक में भाग लेते हैं।

राज्य मंत्री - यदि विभाग से संबंधित मामला हो तो बैठक में बैठ सकते हैं। राज्यमंत्री का दर्जा केंद्रीय मंत्री से निम्न होता है परंतु दोनों का वेतन समान होता है।

स्वतंत्र प्रभार मंत्री - राज्य मंत्री ही स्वतंत्र प्रभार मंत्री होते हैं लेकिन कैबिनेट के अधीन कार्य नहीं करते हैं।

उपमंत्री - उप मंत्री कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री दोनों को सहायता देते हैं। संसदीय सचिव उप मंत्री से भी नीचे होता हैं।

संविधान में मंत्रिपरिषद शब्द का प्रयोग किया गया है, मंत्रिमंडल शब्द का नहीं। मंत्री परिषद ब्रिटेन से लिया गया है।
मंत्रिमंडल सिर्फ कैबिनेट स्तर के मंत्री से बने होते हैं। मंत्रिमंडल की अध्यक्षता प्रधान मंत्री करते हैं। सामान्यत: सप्ताह में एक बार बैठक होती है। इसका निर्णय मंत्री मंडल के सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होता है। त्यागपत्र देकर ही विरोध कर सकते हैं। मंत्रिमंडल के निर्णय को गुप्त रखा जाता है। 1971 में श्रीमती गांधी संसद की जानकारी के बिना ही रूस के के साथ समझौता कर लिया था।  जब मंत्रिमंडल लोकसभा में बहुमत खो देता है तो संपूर्ण मंत्रिमंडल को त्यागपत्र देना पड़ता है। यदि निर्णय से कोई मंत्री असहमत हो तोे उन्हें त्यागपत्र देना पड़ता है। 1962 में देश के रक्षा की घोर उपेक्षा के कारण रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन को त्यागपत्र देना पड़ा। मंत्रिमंडल की कार्यकाल निश्चित नहीं है।
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद को जोड़ने का कार्य करते हैं। मंत्रियों के बीच में अगर किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न हो जाए तो उसका निपटारा प्रधानमंत्री करते हैं। विधेयकों को पारित करवाने का जिम्मा प्रधानमंत्री के ऊपर होता है। प्रधानमंत्री सदन, देश तथा दल के नेता होते हैं।
1960 में राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि संविधान में कोई उल्लेख नहीं है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की बात मानने के लिए बाध्य है। इस हेतु जवाहरलाल नेहरू ने महान्यायवादी M C सीतलवाड़ से परामर्श किया। सीतलवाड़ ने कहा कि राष्ट्रपति सिर्फ नाम मात्र का अध्यक्ष है इसीलिए मंत्री परिषद की बात मानने के लिए बाध्य है। जिसका समर्थन सर्वोच्च न्यायालय ने भी किया। तत्पश्चात श्री मती इंदिरा गांधी ने 1976 में 42वां संविधान संशोधन करके अनुच्छेद 74 में (I) जोड़कर जोड़कर राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की बात मानने के लिए बाध्य कर दिया।

भारत के सभी प्रधानमंत्री

नाम कार्यकाल
01 जवाहरलाल नेहरू 15-08-1947 से 27-05-1964
02 लाल बहादुर शास्त्री 09-06-1964 से 11-01-1966
03 इंदिरा गांधी 24-01-1966 से 24-03-1977
04 मोरारजी देसाई 24-03-1977 से 28-07-1979
05 चौधरी चरण सिंह 28-07-1979 से 14-01-1980
06 इंदिरा गांधी 14-01-1980 से 31-10-1984
07 राजीव गांधी 31-10-1984 से 01-12-1989
08 विश्वनाथ प्रताप सिंह 02-12-1989 से 10-11-1990
09 चंद्रशेखर सिंह 10-11-1990 से 21-06-1991
10 पीवी नरसिम्हा राव 21-06-1991 से 16-05-1996
11 अटल बिहारी बाजपेई 16-05-1996 से 01-06-1996
12 एच डी देवगौड़ा 01-06-1996 से 21-04-1997
13 आई के गुजराल 21-04-1997 से 18-03-1998
14 अटल बिहारी बाजपेई 19-03-1998 से 13-10-1999
15 अटल बिहारी बाजपेई 13-10-1999 से 21-05-2004
16 डॉ मनमोहन सिंह 22-05-2004 से 21-05-2009
17 डॉ मनमोहन सिंह 22-05-2009 से 17-05-2014
18 नरेंद्र मोदी 26-05-2014 से 30-05-2019
19 नरेंद्र मोदी 30-05-2019 से ...... ..

मंत्री परिषद तथा प्रधानमंत्री से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य –

★ मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उप मंत्रियों को निशुल्क आवास एवं अन्य सुविधाएं दी जाती है।
★ भारत की पहली महिला केंद्रीय मंत्री राजकुमारी अमृता कौर थी।
★ भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी बनी।
★ नेहरू मंत्रिमंडल में गैर कांग्रेसी मंत्री को सम्मिलित किया था जैसे – भीमराव अंबेडकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा जॉन मथाई।
★ संघीय मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देने वाला पहला मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं।
★ संसद सदस्य बने बिना गोविंद बल्लभ पंत मंत्री बने थे। यह पहला मंत्री है जिन्हें मंत्री पद पर रहते हुए भारत रत्न मिला।
★ सबसे अधिक दिनों तक प्रधानमंत्री नेहरू रहे और सबसे कम अटल बिहारी बाजपेई।
★ पी. वी. नरसिंहा राव और एच. डी. देवगोड़ा संसद सदस्य बने बिना प्रधानमंत्री बने जबकि इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनने से पहले राज्यसभा के सदस्य थे।
★ 1994 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के पश्चात गुलजारीलाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे। पद पर रहते हुए 3 प्रधानमंत्रियों मृत्यु को प्राप्त हुए –
  1. जवाहरलाल नेहरू
  2. इंदिरा गांधी
  3. लाल बहादुर शास्त्री
★ लाल बहादुर शास्त्री का निधन 11 जनवरी 1966 को देश से बाहर ताशकंद में हुआ था।
★ सबसे बुजुर्ग प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (80 वर्ष 23 दिन) और सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी (40 वर्ष 42 दिन) थे।
★ लोकसभा चुनाव में पराजित होने वाला पहली प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थी।
★ चौधरी चरण सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जो कभी लोक सभा में उपस्थित नहीं हो पाए।
★ सबसे पहला घोटाला (जीप घोटाला) जवाहरलाल नेहरू के समय में 1963 में हुआ था।
★ सबसे पहले अविश्वास प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू पर 1963 में लाया गया। सबसे अधिक अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी के समय लाया गया था।
★ अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाए जाने वाले प्रथम प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रसाद सिंह है।
★ लोकसभा में विश्वास मत प्राप्त करने से पहले त्यागपत्र देने वाला प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई है।
★ कैबिनेट मंत्रियों में सर्वाधिक बड़ा कार्यकाल (32 वर्ष) जगजीवन राम का था।

5 April 2019

चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य | Important facts about elections

चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य :

अक्टूबर 2013 से मतदाताओं को NOTA (None of the above) विकल्प दिया गया। यह अधिकार मध्य प्रदेश राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली एवं मिजोरम के विधानसभा चुनाव में पहली बार दिया गया।
2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव के में NOTA (None of the above) का प्रयोग लगभग 5.42 लाख मतदाताओं ने किया।
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1991 के जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव में जमानत राशि ₹10000 और ₹5000 था। 2009 के अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभा की जमानत राशि ₹10000 और ₹25000 कर दिया गया। जबकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए लोकसभा ₹12500 और राज्यसभा और राज्यसभा ₹5000 कर दिया गया।
वैध मतों का 1/6% से कम आने पर जमानत राशि जप्त हो जाती पर जमानत राशि जप्त हो जाती है।
2014 में लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव में उम्मीदवार के खर्च की अधिकतम सीमा लोकसभा का ₹70 लाख और राज्यसभा का ₹28 लाख है।
दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव में खर्च की राशि MP के लिए ₹55 लाख और MLA के लिए ₹20 लाख निर्धारित किया गया है।
1967 के चुनाव में पहली बार क्षेत्रीय विसंगति आई यानि केंद्र और राज्य में अलग-अलग पार्टी की सरकार बनी और 1967 से ही चुनाव में स्याही का प्रयोग होने लगा। इसी चुनाव से ही राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा किया जाने लगा तथा केंद्र और राज्य के बीच विवाद प्रारंभ हुआ।
चुनाव सुधार से संबंधित समितियां –
  • तारकुंडे समिति - 1975
  • दिनेश गोस्वामी समिति - 1990
  • इंद्रजीत गुप्ता समिति - 1998
चुनाव प्रणाली में मूल्य बहुत सुधार टीएन सेशन ने किया। ये 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे।
यदि कोई व्यक्ति न्यायालय द्वारा 2 वर्ष की सजा दिया गया हो तो वह व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता है।
निर्वाचन संबंधित याचिका पर 6 महीना के अंदर सुनवाई आवश्यक है।
लोकसभा सदस्य बनने के लिए अनुच्छेद 84 में प्रावधान है।
10 जुलाई 2013 को सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया की जेल में बंद कोई व्यक्ति यदि मतदान के लिए अयोग्य हो तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है।
धारा 33-7A के तहत कोई भी उम्मीदवार दो से अधिक स्थानों से चुनाव नहीं लड़ सकता है। जबकि 1997 से पहले ऐसा प्रावधान नहीं था।
2001 की जनगणना के तहत 2026 तक निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
मतदाता अनुच्छेद 326 के तहत जिनका उम्र 18 वर्ष हो गया हो वह मतदान कर सकता है (61वां संविधान संशोधन)।
भारत में वर्तमान समय में भारत में मतदाताओं की संख्या 90 करोड़ है।
पहली लोकसभा चुनाव में 489 स्थान में से कांग्रेस को 364 स्थान प्राप्त हुआ था।
छठी लोकसभा चुनाव (1977) में जनता पार्टी ने 542 स्थान में से 296 स्थान लाया।
आठवीं लोकसभा चुनाव 1984 में 508 स्थान में से कांग्रेस ने 401 स्थान लाया। यह सर्वाधिक है।
16वीं लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 543 स्थानों में से 282 स्थान लाया।
सेना को 2003 से प्रॉक्सी मतदान का अधिकार निर्वाचन आयोग ने दिया। प्रवासी भारतीयों को भी 2015 से मतदान का अधिकार मिला है।
टीएन सेशन को चुनाव सुधार का जनक माना जाता है। इन्होंने फोटो पहचान पत्र को लागू किया। हरियाणा पहला राज्य है जहां मतदाताओं को मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र दिया गया।
चुनाव के 45 दिनों के अंदर प्रतिनिधि को चुनाव खर्च का हिसाब देना आवश्यक है।
विधानसभा चुनाव में सर्वप्रथम 1982 में केरल पारावुर में
जून 1999 में गोवा पहला राज्य बना जिसने आम चुनाव में EVM (Electronic voting machine) का प्रयोग किया गया।
EVM का प्रयोग हुआ। 14वां लोकसभा चुनाव (2004) सभी राज्यों में EVM का प्रयोग हुआ।
4 फरवरी 2017 को गोवा विधानसभा का चुनाव हुआ था इस चुनाव में अंधे व्यक्तियों के लिए ब्रेल ईवीएम का प्रयोग हुआ।
वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) या वेरिफाइड पेपर रिकार्ड (VPR) एक मतदाता मत प्रणाली का उपयोग करते हुए मतदाताओं को फीडबैक देने का एक तरीका है। सर्वप्रथम 2013 में वीवीपैट का प्रयोग नागालैंड के नोकसेन विधानसभा क्षेत्र में किया गया।
2006 के 16वीं लोकसभा चुनाव में 8 निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपैट का प्रयोग किया गया। 2017 में गोवा विधानसभा चुनाव में भी का प्रयोग किया गया।
25 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग की स्थापना हुआ था इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन निर्वाचन आयोग का स्थापना हुआ था।
सबसे अधिक मतों से जीतने वाले उम्मीदवार पश्चिम बंगाल के अनिल बसु है। इन्होंने 2014 में पश्चिम बंगाल के आराम बाग से 592502 मतों से जीता।
वर्तमान चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा है जबकि दो अन्य चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुनील चंद्र है।
सरकारी कंपनी को छोड़कर कोई भी कंपनी या व्यक्ति यदि किसी पार्टी को ₹20,000 से अधिक चंदा देती है तो उसे निर्वाचन आयोग को सूचित करना होगा 2013 से यह व्यवस्था लागू है।

1 February 2019

भारत के उपराष्ट्रपति | Vice President

भारत के उपराष्ट्रपति

संविधान के भाग 5 और अनुच्छेद 63 से अनुच्छेद 73 तक उपराष्ट्रपति का वर्णन है। उपराष्ट्रपति पद अमेरिका से लिया गया है। भारत में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति का पद कार्यकारिणी में दूसरा सबसे बड़ा पद होता है। भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन थे। वर्तमान (2019) में वेंकैया नायडू है।
अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत में उपराष्ट्रपति होंगे।
अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होगें।
अनुच्छेद 65 के तहत राष्ट्रपति की मृत्यु त्यागपत्र या हटाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे। कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने के दौरान सभापति के रूप में कार्य न कर उपसभापति के रूप में कार्य करेंगे।
सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति का वेतन पहले ₹135000 था जो वर्तमान में ₹300000 है। पहला कार्यवाहक राष्ट्रपति राधाकृष्णन तथा दूसरा वी वी गिरी थे। कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में अधिकतम 6 महीना ही कार्य कर सकेंगे जबकि अमेरिका में शेष समय के लिए उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।

उप राष्ट्रपतियों की सूची :

उपराष्ट्रपति पद ग्रहण एवं पद मुक्ति
डॉ एस राधाकृष्णन 1952 से 1962
डॉ जाकिर हुसैन 1962 से 1967
वी वी गिरि 1967 से 1969
गोपाल स्वरूप पाठक 1969 से 1974
बी डी जत्ती 1974 से 1979
मोहम्मद हिदायतुल्लाह 1979 से 1984
आर वेंकटरमन 1984 से 1987
डॉ शंकर दयाल शर्मा 1987 से 1992
के आर नारायणन 1993 से 1997
कृष्णकांत 1997 से 2002
भैरों सिंह शेखावत 2002 से 2007
हामिद अंसारी 11-08-2007 से 11-08-2012
वेंकैया नायडू 11-08-2017 से वर्तमान (2019)

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन

अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति के निर्वाचन का वर्णन है। निर्वाचन अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मत से होता है। निर्वाचन में दोनों सदनों के निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्य भाग लेते हैं।

उपराष्ट्रपति की योग्यता

उपराष्ट्रपति बनने के लिए निम्न शर्त आवश्यक है :
  • भारत का नागरिक हो।
  • 35 वर्ष आयु पूरी कर चुका हो।
  • राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
  • लाभ के पद पर ना हो यदि को तो त्यागपत्र देना आवश्यक है।
  • उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो जाता है तो यह समझा जाएगा कि उसने उस सदन में अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद ग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है।

उपराष्ट्रपति का कार्यकाल

अनुच्छेद 67 में उपराष्ट्रपति के कार्य काल का वर्णन है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का का होता है। 5 वर्ष पूरे होने पर भी वह तब तक अपने पद पर बना रहता है जब तक कि नव निर्वाचित उपराष्ट्रपति पद ग्रहण नहीं कर लेता। उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए राज्य सभा बहुमत से संकल्प पारित किया हो और लोकसभा सहमत हो।
अनुच्छेद 68 के तहत उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर पुनः निर्वाचन की व्यवस्था है।
अनुच्छेद 69 में उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की व्यवस्था है। उपराष्ट्रपति को शपथ ग्रहण राष्ट्रपति कराते हैं राष्ट्रपति के अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश कराएंगे।
अनुच्छेद 70 में यदि राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों पद रिक्त हो तो उस स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दोनों पदों का निर्वहन करेंगे। 20 जुलाई 1969 को बीवी गिरी के त्यागपत्र देने के पश्चात मोहम्मद हिदायतुल्लाह एक महीना के लिए दोनों पदों का निर्वहन किए थे।
अनुच्छेद 71 के तहत उपराष्ट्रपति निर्वाचन के विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय मे किया जाएगा। यदि निर्वाचन अवैध हो तो उस स्थिति में उनके द्वारा किया गया कार्य वैध होगा।
अनुच्छेद 72 में राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के क्षमादान का वर्णन है अनुच्छेद 73 में उपराष्ट्रपति के कार्यों का वर्णन है। उपराष्ट्रपति के निम्न कार्य  करते हैं :
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सदन में अनुशासन बनाए रखते हैं।
विधेयक पर मतदान कर आते हैं और बराबर की स्थिति में निर्णायक मत देते हैं।
कार्य के दृष्टिकोण से इन्हें लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में शक्ति प्राप्त है लेकिन दोनों के वेतन समान है।
दोबारा चुने जाने पर पेंशन की व्यवस्था नहीं है। 1997 से  उपराष्ट्रपति की पेंशन की व्यवस्था की गई है। डॉ राधाकृष्णन लगातार दो बार उपराष्ट्रपति रहे। श्री कृष्ण कांत का पद पर रहते हुए देहांत हो गया। आर वेंकटरमन उपराष्ट्रपति बनने से पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे। कृष्णकांत और भैरव सिंह शेखावत उपराष्ट्रपति बनने से पहले मुख्यमंत्री थे।

4 January 2019

भारत के राष्ट्रपति | President of India

भारत के राष्ट्रपति | President of India

भारतीय संविधान के भाग - 4 और अनुच्छेद 52 से अनुच्छेद 62 तक राष्ट्रपति का वर्णन है। राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रधान होता है। भारत का राष्ट्रपति  संविधान का संरक्षण तथा भारतीय जनता का प्रतीक होता है। अनुच्छेद 52 के तहत भारत में एक राष्ट्रपति होंगे। अनुच्छेद 53 में वर्णन है कि संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। जिसका प्रयोग राष्ट्रपति स्वयं या अधीनस्थ अधिकारी के माध्यम से करेंगे।

राष्ट्रपति का निर्वाचन

अनुच्छेद 54 में राष्ट्रपति के निर्वाचन का वर्णन है। निर्वाचन में दोनों सदनों के निर्वाचित प्रतिनिधि और विधानसभा की प्रतिनिधि भाग लेंगे। 70 वां संविधान संशोधन (1952) के तहत दिल्ली और पांडिचेरी में विधान सभा की स्थापना की गई है। इस हेतु ये दोनों केंद्र शासित प्रदेश राष्ट्रपति निर्वाचन में भाग लेते हैं। राष्ट्रपति का निर्वाचन, निर्वाचक मंडल, गुप्त मतदान, अनुपातिक प्रतिनिधि और एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है। राष्ट्रपति का कोई भी उम्मीदवार यदि 50% से अधिक मत प्राप्त करते हैं तो वे निर्वाचित घोषित किए जाते हैं। परंतु 50% से कम मत प्राप्त करने पर दोहरी मतगणना का उपयोग करना पड़ता है। दोहरी मतगणना से निर्वाचित होने वाला एकमात्र राष्ट्रपति वीवी गिरी (1969) है।अनुच्छेद 55 में राष्ट्रपति के निर्वाचन में समरूपता एवं समतुल्यता का वर्णन है।
★ संसद सदस्य या विधान सभा का सदस्य अपने राज्य से भी मतदान कर सकते हैं परंतु उन्हें 10 दिन पहले सूचना देना होता है।
★ 1974 में जब गुजरात विधानसभा भंग था इसके बावजूद राष्ट्रपति चुनाव हुआ था।
★ भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए जन्म सिद्धांत आवश्यक नहीं है। जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के लिए जन्म सिद्धांत आवश्यक है।
★ राष्ट्रपति निर्वाचन के खिलाफ उम्मीदवार सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं।

राष्ट्रपति का कार्यकाल

अनुच्छेद 56 में राष्ट्रपति के कार्यकाल का वर्णन है। राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्षों तक पद पर रहेंगे तक पद पर रहेंगे। इससे पहले भी उपराष्ट्रपति को सूचना देकर त्यागपत्र दे सकते हैं। इसकी जानकारी लोकसभा के अध्यक्ष को देना होगा। राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर 6 महीना के अंदर अंदर चुनाव आवश्यक है। लेकिन उपराष्ट्रपति के लिए यह व्यवस्था नहीं है। अमेरिका में राष्ट्रपति के अनुपस्थिति में शेष समय  के लिए उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। जबकि भारत में राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 वर्षों का होता है और शपथ ग्रहण की तारीख 20 जनवरी है। यदि राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों का पद रिक्त हो तो ऐसी स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद को संभालेंगे। 1969 में जब जाकिर हुसैन का देहांत हो गया तो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एम हिदायतुल्ला कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।
अनुच्छेद 57 - इस अनुच्छेद में वर्णन है कि राष्ट्रपति दोबारा चुने जा सकते हैं। डॉ राजेंद्र राजेंद्र प्रसाद के अलावा दोबारा चुने जाने वाले राष्ट्रपति अभी तक नहीं बने हैं।

राष्ट्रपति का योग्यता

अनुच्छेद 58 में  राष्ट्रपति बनने की योग्यताओं का वर्णन है।
  • भारत का नागरिक हो।
  • 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  • संसद सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
  • भारत या राज्य सरकार के अधीन लाभ के पद पर ना हो।
  • पागल यदि वालिया ना हो।
★ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति अथवा संघीय राज्य के मंत्री परिषद के सदस्य को लाभ का पद के अंतर्गत नहीं माना गया है। अतः ये सभी राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं।
★ पद पर रहते हुए राष्ट्रपति, चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन विवि गिरी ने चुनाव लड़ने के लिए त्याग पत्र दे दिया। इस हेतु सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हिदायतुल्ला कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे।
★ प्रोफेसर पद पर रहते हुए भी चुनाव लड़ सकते हैं परंतु गैर राजनीतिक पदाधिकारी पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

राष्ट्रपति का वेतन

अनुच्छेद 59 में राष्ट्रपति का वेतन भत्ता का उल्लेख है। पहले राष्ट्रपति का वेतन ₹1.5 लाख प्रति महीना मिलता था जिसे वर्तमान समय में बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। दोबारा चुने जाने पर पेंशन की व्यवस्था नहीं है। डॉ राजेंद्र प्रसाद दोबारा चुने गए थे। राष्ट्रपति का वेतन आयकर से मुक्त है।
अनुच्छेद 60 - इसमें राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण का वर्णन है। शपथ ग्रहण सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश कराते हैं।

राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया

अनुच्छेद 61 के तहत राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने की व्यवस्था है। महाभियोग कोई भी सदन लगा सकती है। महाभियोग लगाने के लिए किसी भी  सदन के 1/4 सदस्यों का हस्ताक्षर आवश्यक है। जो सदन महाभियोग लगाती है उसे संकल्प पारित करने से पहले 14 दिन पूर्व राष्ट्रपति को सूचना देना आवश्यक है। इसके बाद कुल सदस्य, उपस्थित सदस्य या मतदान में भाग लेने वाले दो तिहाई बहुमत से पारित करना होगा। इसके बाद दूसरा सदन भेजा जाएगा। दूसरा सदन समीक्षा का सदन होगा। राष्ट्रपति स्वंग या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी अस्पष्टीकरण देंगे। यदि दूसरा सदन भी दो तिहाई बहुमत से पारित कर देती है तो राष्ट्रपति पद से मुक्त समझे जाएंगे। अभी तक (2018) किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं लगाया गया है। परतंत्र भारत में 1788 में वारेन हेस्टिंग्स पर महाभियोग लगाया गया था। परंतु पारित नहीं हो सका। तत्पश्चात 1993 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी रामास्वामी पर महाभियोग लगाया गया पर यह भी पारित नहीं हो सका। इसके पश्चात 2012 में पश्चिम बंगाल के न्यायाधीश सौमित्र सेन और कर्नाटक के न्यायाधीश पी दिनाकरण दिनाकरण पर महाभियोग लगाया गया परंतु उन्होंने त्याग पत्र दे दिया।
अनुच्छेद 62 - इसके तहत राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर 6 महीना के अंदर चुनाव कराना आवश्यक है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। 1960 में डॉ राजेंद्र प्रसाद रूस की यात्रा पर गए थे तो कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में डॉ राधाकृष्णन ने पदभार संभाला था। पुनः 1961 में जब राष्ट्रपति बीमार पड़ गए गए तो 15 दिनों के लिए राधाकृष्णन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। 1969 में डॉक्टर जाकिर हुसैन का देहांत हुआ तो वी वी गिरी 6 महीना तक पूर्ण कार्यवाहक राष्ट्रपति बने रहें। अभी तक चार लोगों ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया है –
  1. राधाकृष्णन
  2. वी वी गिरी
  3. बी डी जत्ती
  4. मोहम्मद हिदायतुल्ला
कार्यवाहक राष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी सुविधा दी जाती है। वर्तमान में 14वें (15वां चुनाव) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद है।
अभी तक 8 लोग निर्विरोध राष्ट्रपति बने है –
  1. डॉ राजेंद्र प्रसाद
  2. फखरुद्दीन अली अहमद
  3. नीलम संजीवा रेड्डी
  4. ज्ञानी जैल सिंह
  5. एपीजे अब्दुल कलाम
  6. श्रीमती प्रतिभा पाटिल
  7. प्रणब मुखर्जी
  8. रामनाथ कोविंद
★ अनुच्छेद 74 के तहत रास्ट्रपति को सहायता एवं सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगा जिसका प्रधान, प्रधानमंत्री होगा।
★ 42वां संविधान संशोधन के तहत अनुच्छेद 74 में (1) कर यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की बात मानने के लिए बाध्य हैं।
★ अनुच्छेद 75 (1) के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं। अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री के सिफारिश पर राष्ट्रपति करते हैं। प्रधानमंत्री के अलावा कार्यपालिका संबंधित सारी नियुक्तियां राष्ट्रपति करते हैं।
★ अनुच्छेद 11 के तहत राष्ट्रपति द्वारा धन विधेयक को छोड़कर साधारण विधेयक को एक बार पुनर्विचार हेतु भेजा जा सकता है।
★ अनुच्छेद 78 में यह प्रावधान है कि प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की सारी जानकारी राष्ट्रपति को को देंगे।
★ अनुच्छेद 79 में कहा गया है कि भारत में एक संसद होगा जिनके अंग राष्ट्रपति होंगे।

राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां

अनुच्छेद 80 (3) के तहत राष्ट्रपति राज्यसभा में साहित्य विज्ञान और कला के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं।
अनुच्छेद 331 के तहत लोकसभा में राष्ट्रपति दो एंग्लो इंडियन को मनोनीत करते हैं। जबकि राज्यपाल अनुच्छेद 333 के तहत एक एंग्लो इंडियन को मनोनीत करते हैं। यह प्रावधान 23 वां संविधान संशोधन द्वारा किया गया।
अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति महोदय संसद का अधिवेशन बुलाते हैं, सत्रावसान करते हैं और लोकसभा को भंग भी करते हैं।
अनुच्छेद 86 के तहत राष्ट्रपति दोनों सदनों में अभिभाषण देते हैं और अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति विशेष अभिभाषण देते अभिभाषण देते हैं।
अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुलाते हैं जिन की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करते हैं अभी तक 3 बार संयुक्त अधिवेशन हुआ है –
  1. 1961 – दहेज प्रथा
  2. 1978 – बैंकिंग
  3. 2002 – POTA
राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना कोई भी विधेयक कानून का रूप नहीं ले सकती है। यदि राष्ट्रपति को कोई विधेयक अस्वीकार हो तो वह 6 महीना तक अपने पास लंबित रख सकता है। वह किसी विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस संसद में भेज सकता है। 1986 में ज्ञानी जैल सिंह और प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच गतिरोध के कारण भारतीय डाक संशोधन विधेयक पर वीटो का प्रयोग किया गया। यह विधेयक 'जेबी विटो शक्ति' के नाम से जाना जाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति वीटो का प्रयोग केवल 10 दिनों के लिए करते हैं।
संसद में कुछ विधायकों को प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की सहमति लेना आवश्यक है। जैसे –
  • धन विधेयक - अनुच्छेद 110
  • राज्य हित को प्रभावित करने वाले कराधान संबंधी विधेयक - अनुच्छेद 304
  • राज्यों की सीमाओं एवं नामों में परिवर्तन करने वाले विधेयक
  • राज्यों के बीच व्यापार वाणिज्य व समागम पर निबर्धन लगाने वाले विधेयक
अनुच्छेद 129 के तहत राष्ट्रपति अधिवेशन ना चलने पर अध्यादेश जारी करते हैं। सत्र प्रारंभ की 6 सप्ताह के अंदर दोनों सदनों की स्वीकृति आवश्यक है अन्यथा निरस्त समझा जाएगा। 44 वें संविधान संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया कि अध्यादेश विधि संवत ना हो तो न्यायालय में चुनौती दिया जा सकता है।
पद पर रहते हुए राष्ट्रपति पर फौजदारी मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। दीवानी मुकदमा चलाया जा सकता है परंतु 2 महीने पूर्व इसकी सूचना देना आवश्यक है।
राष्ट्रपति की सैन्य शक्ति - देश का सर्वोच्च नागरिक होने के नाते राष्ट्रपति तीनों सेनाओं (जल, थल और वायु) का प्रमुख होते हैं।
राष्ट्रपति की राजनीतिक शक्ति - विदेशों में भारतीय राजपूतों की नियुक्ति करना  भारत में विदेशी राजपूतों की नियुक्ति के को स्वीकृति देना तथा सरकार के सभी कार्यपालिका संबंधी कार्य राष्ट्रपति के नाम से होता है।
राष्ट्रपति के न्यायिक अधिकार - राष्ट्रपति न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं उनको पदच्युत करते हैं। अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श ले सकते हैं परंतु परामर्श मानने के लिए बाध्य नहीं है।
क्षमादान की शक्ति - अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमादान, प्रतिलंबन, विराम निलंबन लघु करण की शक्ति प्राप्त है।
राष्ट्रपति की आपात शक्तियां - विशेष परिस्थिति में राष्ट्रपति अनुच्छेद 352, अनुच्छेद 356 और अनुच्छेद 360 का प्रयोग करते हैं।
  • अनुच्छेद 352 - राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आपात 
  • अनुच्छेद 356 - राष्ट्रपति शासन 
  • अनुच्छेद 360 - आर्थिक या वित्तीय आपात
 ★ 1969 के चुनाव में नीलम संजीवा रेड्डी हार गए थे फिर 1977 में यह निर्विरोध निर्वाचित हुऐ।
★ डॉ जाकिर हुसैन राष्ट्रपति बनने से पहले बिहार के राज्यपाल थे।
★ जाकिर हुसैन तथा फखरुद्दीन अली अहमद का पद पर रहते हुए देहांत हो गया।
★ डॉक्टर दयाल शर्मा राष्ट्रपति से पहले मुख्यमंत्री और राज्यपाल थे।
★ आंध्र प्रदेश आर वेंकटरमन राष्ट्रपति बनने से पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे।
★ के आर नारायण पहला अनुसूचित जाति के राष्ट्रपति थे। ये विधान सभा को संबोधित करने वाला पहला राष्ट्रपति थे। इन्होंने पंक्तिबद्ध होकर मतदान मतदान किया था। यह हिंदी नहीं जानते थे। इन्होंने 1988 में यूपी के राष्ट्रपति शासन को वापस लिया था और 1999 में बिहार विधानसभा को भंग न करके स्थगित किया और राज्यसभा में बहुमत साबित करने को कहा।
★ मिसाइल मैन के नाम से डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जाने जाते हैं। कलाम ने भी बिहार विधान सभा को संबोधित किया था तथा इन्होंने बिहार का 3 बार यात्रा किया।
★ दूसरे जनजाति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद है।
★ नीलम संजीवा रेड्डी और ज्ञानी जेल सिंह NAM के महासचिव पद पर रहे हैं।