BHARAT GK

7 December 2019

Current Affairs [Updated]

दिसंबर 2018 में घोषित राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग में पहला स्थान गुजरात ने प्राप्त किया है।
महाराष्ट्र कृष्णा नदी पर टेंपो लिफ्ट सिंचाई परियोजना का शुभारंभ श्री नरेंद्र मोदी जी ने दिसंबर 2018 में किया । यह 4,889 करोड़ की परियोजना है।
दिसंबर 2018 में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन कुरुक्षेत्र हरियाणा में हुआ।
चीन और भारत के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास हैंड इन हैंड का प्रारंभ चीन के चेंगदू शहर में हुआ ।
25 दिसंबर 2018 को असम के डिब्रूगढ़ जिला स्थित ब्रह्मपुत्र नदी पर देश का सबसे लंबा रेल सड़क पुल बोगीबील पुल का उद्घाटन श्री नरेंद्र मोदी ने किया ।
अटल बिहारी बाजपेई 94वें जन्मदिवस पर सुशासन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।
दिसंबर 2018 में ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग को आईसीसी क्रिकेट ने “हॉल ऑफ फेम” से सम्मानित किया।
2018 का तानसेन सम्मान मंजू मेहता को दिया गया।
2018 का मिसेज इंडिया का खिताब दिव्या पाटीदार को दिया गया।
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2018 में 6 वर्षों के पश्चात संयुक्त अरब अमीरात ने सीरिया के साथ पुनः राजनीतिक संबंध स्थापित किया।
27 दिसंबर 2018 को लोकसभा में ट्रिपल तलाक विधेयक पारित हुआ इसके पक्ष में 243 मत प्राप्त हुए।
2022 में अंतरिक्ष में भारत का गण यान मिशन के लिए मंजूरी प्रदान किया। यह मिशन 10,000 करोड़ का होगा।
150 से अधिक टेस्ट मैच जीतने वाला भारत पांचवा देश बन गया है।
जनवरी 2019 में अगरतला एयरपोर्ट का नाम बदलकर महाराजा बीर बिक्रम माणिक्य किशोर एयरपोर्ट कर दिया गया है।
4 जनवरी 2019 को अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विल्सन पर चढ़ने वाली पहली महिला अरुणिमा सिन्हा बनी।
4 जनवरी 2019 को नरेंद्र मोदी द्वारा डोलीदा बराज परियोजना का उद्घाटन मणिपुर में किया गया है।
उड़ीसा सरकार ने मिशन शक्ति योजना के तहत स्वयं सहायता समूह द्वारा 3 लाख राशि पर कोई भी ब्याज देय नहीं होगा।
7 जनवरी 2019 को भारत के लिए ईरान के चाबहार बंदरगाह को खोल दिया गया।
केंद्र सरकार 2019 - 20 के शैक्षणिक सत्र हेतु जवाहर नवोदय विद्यालय में सीटों की संख्या बढ़ाकर 5000 कर दिया है।
जनवरी 2019 में विज्ञान कांग्रेस का आयोजन जालंधर में हुआ।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद में 105 वां सदस्य देश अमेरिका क्रिकेट परिषद बना है।
आईएमएफ की पहली महिला मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ बनी है।
जनवरी 2019 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स जो पुणे में संपन्न हुआ था उसमें पहला स्थान महाराष्ट्र, दूसरा हरियाणा तथा तीसरा स्थान दिल्ली का रहा।
12 जनवरी 2019 सिक्किम सरकार ने ‘एक परिवार एक नौकरी योजना’ प्रारंभ किया है।
आर्थिक रूप से पिछड़े स्वर्ण को जो 10% आरक्षण देने वाला पहला राज्य गुजरात है।
2019 के सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड बुद्धदेव दासगुप्ता को दिया गया है।
भारत का सबसे कम उम्र का ग्रैंड मास्टर (12 वर्ष 7 माह) डी गुकेश बना है।
2019 का लॉरेंस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड से सम्मानित पहली भारतीय महिला विनेश फोगाट बनी है।
भारतीय सिनेमा राष्ट्रीय संग्रहालय की स्थापना पुणे में किया गया है।
2019 में विश्व आर्थिक मंच की बैठक सुजरलैंड के दावोस में हुआ।

27 September 2019

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 तक नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General - CAG) का वर्णन है। भारत में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक 1919 की अधिनियम पर आधारित है। 1935 के अधिनियम में इसे अधिक महत्व दिया गया और प्रांतों के लिए स्वतंत्र लेखा परीक्षक की नियुक्ति की गई। देश स्वतंत्र होने के पश्चात महालेखा परीक्षक का नाम बदलकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कर दिया गया। अनुच्छेद 148 (1) में वर्णन है कि भारत में एक नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक होगा जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति महोदय 6 वर्षों के लिए करेंगे। इसे हटाने की प्रक्रिया वही है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश का है। यह अपने पद का 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक या 6 वर्षों तक रह सकते हैं। इन्हें कदाचार अथवा कार्य करने में असमर्थ होने पर संसद के दोनों सदनों के समावेशन पर हटाया जा सकता है।
अनुच्छेद 148 (2) वर्णन है कि पहले राष्ट्रपति के समक्ष शपथ ग्रहण करेंगे। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सरकार के प्रति उत्तरदाई ना होकर संविधान के प्रति उत्तरदाई होते हैं।
अनुच्छेद 148 (3) के दांत इनके वेतन और सेवा शर्तों का वर्णन है वेतन भत्ता संचित निधि से दिया जाता है इनका वेतन पहले 90000 था जिसे बढ़ाकर 2,50,000 कर दिया गया। कार्यकाल के दौरान वेतन में कमी नहीं किया जा सकता है।अनुच्छेद 148 (4) में वर्णन है कि पद से अवकाश ग्रहण करने के पश्चात किसी पद पर कार्य नहीं करेंगे अपवाद स्वरूप A. K. चंदा 1961 में अवकाश के बाद तीसरे वित्त आयोग के अध्यक्ष बने थे। अनुच्छेद 149 मैं नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कार्यों का वर्णन है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कार्य

  • इसका मुख्य कार्य व्यय विधि संबद्ध किया गया है या नहीं इसका ध्यान रखना है।
  • यह धन की लेन-देन का हिसाब भी रखता है और धन संबंधी लेखों की जांच भी करता है।
  • वित्तीय कुशलता मितव्ययिता और प्रशासन में कुशलता लाता है।
  • केंद्र - राज्य के अनुरोध पर सरकारी विभागों कि आय की जांच करता है।
  • संचित निधि से धन निकासी पर इसका कोई अधिकार नहीं है परंतु ब्रिटेन में CAG को अधिकार प्राप्त है।
अनुच्छेद 150 के तहत संघ एवं राज्यों के लेखकों को राष्ट्रपति के सलाह पर सदन में रखा जाता है इसकी जांच लोक लेखा समिति करती है। 1976 से लेखांकन के दायित्व से क्या को मुक्त कर दिया गया है।
अनुच्छेद 151 में वर्णन है कि संघ का प्रतिवेदन राष्ट्रपति को वित्त मंत्री के माध्यम से दिया जाएगा और राज्य में राज्यपाल को दिया जाएगा और रक्षा विभाग में CAG का नियंत्रण नहीं है।

भारतिय संसद

संसद भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 में वर्णन है कि भारत की संसद दोनों सदनों, राज्य सभा और लोक सभा से मिलकर बनी है। अनुच्छेद 80 के तहत संसद मंत्रिपरिषद के क्रियाकलापों पर नजर रखती है। संसद का मुख्य कार्य मंत्री परिषद की रचना करना और उसे उत्तरदाई ठहराना है। किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करने का अधिकार संसद को है। संसद को वित्तीय अधिकार प्राप्त है जिससे होने वाले व्यय की जानकारी संसद को देना अनिवार्य है। संसद के दो सदन हैं -
  • उच्च सदन या राज्यसभा (Council of State)
  • निम्न सदन या लोकसभा (House of the people)

राज्य सभा (Council of state)

उच्च सदन या राज्य सभा या काउंसिल ऑफ स्टेट एक स्थाई सदन है। इसका गठन 03-04-1952 को किया गया। एक तिहाई सदस्यों का निष्कासन लॉटरी के द्वारा 02-04-1994 को किया गया। अनुच्छेद 80 (1) के तहत राज्यसभा में अधिकतम में अधिकतम सदस्यों की संख्या 250 है। वर्तमान में राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 245 (233+12) है। 12 सदस्यों को राष्ट्रपति साहित्य, कला, विज्ञान एवं समाज सेवा क्षेत्र के ख्याति प्राप्त व्यक्तियों को मनोनीत करते हैं। राज्यसभा का सदस्य बनने की न्यूनतम उम्र सीमा 30 वर्ष है। राज्यसभा में प्रतिनिधियों की संख्या जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होती है। सबसे अधिक सदस्य उत्तर प्रदेश (31) से आते हैं।
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राज्य सभा का गठन 3 मई 1952 को किया गया तथा प्रथम बैठक 13 मई 1952 को हुई। राज्य सभा की कार्यवाही शुरू करने के लिए कम से कम कुल सदस्य का 10वां भाग (1/10) होना आवश्यक है।
राज्यसभा सदस्य बनने की योग्यता : राज्यसभा सदस्य बनने के लिए न्यूनतम उम्र 30 वर्ष है साथ ही उम्मीदवार का नाम उस राज्य के निर्वाचन सूची में होना आवश्यक है जहां से वह चुनाव लड़ना चाहता हो।
राज्य सभा का कार्यकल : राज्यसभा एक स्थाई सदन है। प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। पुनः सदस्य बना जा सकता है। सदस्यों को निर्वाचन अनुपातिक एवं एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है तथा हर 2 वर्ष पर एक तिहाई सदस्य निष्कासित होते हैं और उतने ही मनोनीत होते हैं [अनुच्छेद 83 (1)]।

राज्य सभा सदस्यों की सूची (September, 2019)



क्रम संख्याराज्यसीटों की संख्यासदस्यों की संख्यारिक्तियों
1 अरूणाचल प्रदेश (AR ) 1 1
2 असम (AS ) 7 5 2
3 आंध्र प्रदेश (AP ) 11 11
4 उत्तर प्रदेश (UP ) 31 30 1
5 उत्तराखंड (UTK ) 3 3
6 ओडिशा (OR ) 10 9 1
7 कर्नाटक (KAR ) 12 12
8 केरल (KR ) 9 9
9 गुजरात (GJ ) 11 11
10 गोवा (GOA ) 1 1
11 छत्तीसगढ़ (CHT ) 5 5
12 जम्मू-कश्मीर (J & K ) 4 4
13 झारखंड (JHK ) 6 6
14 तमिलनाडु (TN ) 18 18
15 त्रिपुरा (TR ) 1 1
16 तेलंगाना (TG ) 7 7
17 नागालैंड (NG ) 1 1
18 नाम निर्देशित (Nominated ) 12 12
19 पंजाब (PB ) 7 7
20 पुडुचेरी (PUD ) 1 1
21 पश्चिमी बंगाल (WB ) 16 16
22 बिहार (BR ) 16 14 2
23 मेघालय (MGH ) 1 1
24 मणिपुर (MN ) 1 1
25 मध्य प्रदेश (MP ) 11 11
26 महाराष्ट् र(MH ) 19 19
27 मिज़ोरम (MZ ) 1 1
28 राजस्थान (RJ ) 10 10
29 राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र,दिल्ली (DL ) 3 3
30 सिक्किम (SK ) 1 1
31 हरियाणा (HR ) 5 5
32 हिमाचल प्रदेश (HP ) 3 3
योग: 245 239 6
Source - Rajya Sabah
वित्त विधेयक को छोड़ कर अन्य सभी विधेयक पर कानून बनाने का अधिकार राज्यसभा को लोकसभा के समान ही प्राप्त है। राज्यसभा धन विधेयक या वित्त विधेयक को मात्र 14 दिनों तक ही रोक सकता है। साधारण विधेयक में दोनों सदनों का सामान अधिकार है परंतु विवाद की स्थिति में अंतिम निर्णय लोकसभा के पक्ष में जाएगी। अनुच्छेद 312 के तहत राज्यसभा को संघ लोक सेवा आयोग सेवा आयोग के गठन का अधिकार प्राप्त है जबकि नियुक्ति की प्रक्रिया लोकसभा करती है।
अनुच्छेद 249 के तहत राष्ट्रहित में राज्य सूची में कानून बनाने का अधिकार सिर्फ राज्यसभा को है। 2003 से राज्यसभा में खुले मतदान की व्यवस्था है। उम्मीदवार के लिए राज्य विशेष का निवासी होना अनिवार्य नहीं है। सदस्यों को सत्र से 40 दिन पूर्व या बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। यह छूट सिर्फ दीवानी मामले में है फौजदारी में नहीं। यदि कोई सदस्य बिना सूचना दिए लगातार 60 दिनों तक बैठक से अनुपस्थित रहे तो उसका पद रिक्त समझा जाता है।

सभापति एवं उपसभापति

अनुच्छेद 89 के तहत राज्यसभा में एक सभापति तथा एक उपसभापति होते हैं। यह पद अमेरिका के संविधान से लिया गया है। राज्य सभा के कार्य का संचालन सभापति करते हैं एवं सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति करते हैं। राज्यसभा का पहला सभापति राधाकृष्णन तथा उपसभापति कमलापति त्रिपाठी थे। अनुच्छेद 90 के तहत उपसभापति को पद से हटाए जाने का वर्णन है।
  • जब उपसभापति  राज्यसभा का सदस्य नहीं रह जाता है तो वो अपना पद त्याग देगा।
  • उपसभापति त्यागपत्र दे कर भी अपना पद छोड़ सकता है।
  • राज्यसभा के सदस्यों के द्वारा भी दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित दे और लोकसभा अनुमोदित कर दे तो सभापति अपने पद से हट जाएंगे परंतु कम से कम 14 पूर्व सूचना देना अनिर्वाय है।
यदि सभापति एवं उपसभापति को हटाने की प्रक्रिया चल रही हो तो अनुच्छेद 93 के तहत यह अध्यक्षता नहीं करेंगे और ना ही निर्णायक मत देंगे लेकिन कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। उपसभापती का चुनाव राज्यसभा सदस्य अपने बीच से ही करते हैं जिसका कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।

लोकसभा | House of people

अनुच्छेद 81 के तहत लोकसभा संसद का निम्न सदन है। यह जनता का प्राततिनिधि सदन कहलाती है। जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होने के कारण यह शक्तिशाली होता है। मूल संविधान में लोकसभा के सदस्यों की संख्या 500 है। 130 वां संविधान संशोधन द्वारा सदस्यों की सख्या बढ़ाकर 530+20 (530 राज्यों से तथा 20 केंद्र शासित प्रदेशों से ) कर दिया गया। सदस्यों की संख्या 552 से अधिक नहीं हो सकती है। अनुच्छेद 331 के तहत 2 एंग्लो-इंडियन को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं  यदि प्रतिनिधि न हो तो। 84 वां संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा को विधान सभा के सदस्यों की संख्या में 2026 तक कोई परिवर्तन नहीं होगा। लोकसभा में सबसे ज्यादा (80) उत्तर प्रदेश से जाते हैं।

लोक सभा सदस्यों की सूची (September, 2019)

कुल सदस्य : 528
क्रम सं.राज्य का नामसदस्य
1आंध्र प्रदेश25
2अरुणाचल प्रदेश2
3असम14
4बिहार39
5छत्तीसगढ़11
6गोवा2
7गुजरात26
8हरियाणा10
9हिमाचल प्रदेश4
10जम्‍मू और कश्‍मीर6
11झारखंड14
12कर्णाटक28
13केरल20
14मध्‍य प्रदेश29
15महाराष्‍ट्र47
16मणिपुर2
17मेघालय2
18मिजोरम1
19नागालैंड1
20ओडिशा21
21पंजाब13
22राजस्‍थान25
23सिक्‍किम1
24तमिलनाडु39
25तेलंगाना17
26त्रिपुरा2
27उत्तर प्रदेश80
28उत्तराखंड5
29पश्‍चिम बंगाल42


संघ राज्य क्षेत्र-वार

कुल सदस्य : 13
क्रम सं.राज्य का नामसदस्य
1अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह1
2चंडीगढ़1
3दमन और दीव1
4राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्‍ली7
5दादर और नागर हवेली1
6लक्षद्वीप1
7पुडुच्‍चेरी1
Source - Loksabha
दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में से एक-एक एमपी जाते हैं दिल्ली से 7 (6 सामान्य + एक अनुसूचित जाति) जाते हैं। लोकसभा के सदस्यों का चुनाव गुप्त मतदान के द्वारा व्यस्क मताधिकार के आधार पर होता है। 61 वां संशोधन संशोधन के तहत मतदाता की उम्र सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। भारत में अभी 79 करोड़ मतदाता है। अनुच्छेद 326 के तहत मत का प्रयोग किया जाता है

लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता

  • भारत का नागरिक हो।
  • न्यूनतम उम्र सीमा 25 वर्ष।
  • लोकसभा या राज्यसभा के सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
  • पागल या दिवालिया न हो।
  • भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी लाभ के पद पर न हो।
  • एमपी बनने के लिए भारत की मतदाता सूची में नाम होना चाहिए परंतु व्यक्ति पर भ्रष्टाचार सिद्ध हो गया हो या देशद्रोह का आरोप हो या अपराध में 2 वर्ष की सजा काट चुका हो तो वह सदस्य नहीं बन सकता है।
अनुच्छेद 93 में प्रावधान कर दिया गया है कि यदि MP  तथा MLA के चुनाव के दौरान किसी निर्दलीय उम्मीदवार की मृत्यु हो तो चुनाव स्थगित नहीं होगा। लोकसभा में अनुसूचित जाति और जनजाति की संख्या 79+40 = 119 था परंतु वर्तमान में बढ़ाकर 131 कर दिया गया है। सबसे अधिक अनुसूचित जाति यूपी से 17, बंगाल - 10, तमिल नाडु - 7,  बिहार - 6 जाते हैं। सबसे अधिक जनजाति एमपी (6), झारखंड (5) और छत्तीसगढ़ (4) से जाते हैं। लक्ष्यदीप और दादर हवेली से एक-एक जाते हैं।
लोक सभा का कार्यकाल : लोक सभा का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्षों का होता है परंतु प्रधानमंत्री के परामर्श पर राष्ट्रपति समय से पूर्व भी इसे भंग कर सकता है। अभी तक ऐसा 8 बार हो चुका है।

संसद समितियाँ :  संसद में समितियों की संख्या पहले 17 (11 + 6 ) से थी, वर्तमान समय में 24 (लोकसभा 16 + राज्यसभा 8) है। प्रत्येक समिति में 45 सदस्य (लोकसभा 30 + राज्यसभा 15) होते हैं। अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति महोदय लोक सभा का अधिवेशन बुलाते हैं, सत्र समाप्ति की घोषणा करते हैं और लोकसभा को भंग भी करते हैं। अनुच्छेद 86 में राष्ट्रपति के अभिभाषण का वर्णन है। अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण है। अनुच्छेद 88 के तहत महान्यायवादी संसद में मत का प्रयोग नहीं करते हैं। अनुच्छेद 89 के तहत यह वर्णन है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापतित्व  करेंगे और इसके नहीं रहने पर उपसभापति करेंगे। अनुच्छेद 92 में सभापति और उपसभापति को हटाने की व्यवस्था है।अनुच्छेद 93 के तहत लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की चुनाव व्यवस्था है। चुनाव प्रत्यक्ष रूप से लोकसभा के सदस्यों द्वारा किया जाता है। यदि अध्यक्ष ना हो तो उपाध्यक्ष अध्यक्षता करते हैं यदि दोनों को हटाने की प्रक्रिया चल रही हो तो वरिष्ठ सदस्य अध्यक्षता करेंगे। यदि हटाने की प्रक्रिया चल रही हो तो उस समय निर्णायक मत का प्रयोग नहीं करेंगे परंतु कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। अनुच्छेद 102 के तहत बराबर मत की स्थिति में अध्यक्ष निर्णायक मत का प्रयोग करते हैं और सदस्य के रूप में भी मतदान करते हैं। लोकसभा के अध्यक्ष एवं सदस्यों का शपथ ग्रहण प्रोटेम स्पीकर कराते हैं।

13 June 2019

संगम काल

संगम (संस्कृत) का शब्द है जिसका अर्थ संग, परिसर या सभा होता है। दक्षिण भारत के इस प्रदेश में तमिल कवियों द्वारा सभाओं तथा गोष्ठियों का आयोजन किया जाता था। इन गोष्ठियों में विद्वानों के मध्य विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता था, इसे ही 'संगम' के नाम से जाना जाता है। इस शब्द का प्रयोग तिरुवरूर वकार नयनार ने किया था। पाण्ड्य नेतृत्व में तीन संगम संगम का आयोजन किया गया। इसमें दक्षिण के 3 राज्य (चेर, चोर तथा पाण्ड्य) सम्मिलित थे।
पहला संगम - पहला संगम पाण्ड्य की राजधानी मथुरा में हुआ जिसकी अध्यक्षता अगस्त ऋषि ने किया।

दूसरा संगम - दूसरा संगम का आयोजन मधुरा के समुंद्र में विलय हो जाने के कारण कपाट पुरम में हुआ। इसके अध्यक्ष तोलकपियर थे। इन्होंने व्याकरण ग्रंथ तोल्कापपियम् की रचना किया। यह एक व्याकरण ग्रंथ है।

तीसरा संगम - तीसरा संगम का आयोजन परवर्ती मदूरा नगर में हुआ जिसकी अध्यक्षता नक्कीकर ने किया किया। इस संगम में बहुत सारे ग्रंथों की रचना हुई जिसमें प्रमुख है –

शिलप्पादिकारम् - इसके रचयिता इलांगो अडिगल है। इसे संगम काल का महाकाव्य कहा जाता है। इसे राष्ट्रीय तमिल काव्य भी माना जाता है। शिलप्पादिकारम् का अर्थ पायल की कथा होता है। यह ग्रंथ प्रेम कथा पर आधारित है इसका नायक कोबलन और नायिका कण्णगी है। इस ग्रंथ में कण्णगी पूजा (पत्नी पूजा) का उल्लेख मिलता है।

मणिमेकलई - इसके रचनाकार चितलाई चतनार है। यह भी प्रेम कथा पर आधारित है। इसकी नायिका माधवी है यह प्रेमी की मृत्यु के पश्चात बौद्ध भिक्षु बनी थी।

तिरुक्कुरल - इसकी रचना तिरुवल्लुवर ने किया। इसे संगम काल का बाइबिल कहा जाता है। इसे दक्षिण का पांचवा वेद माना जाता है। इसमें धर्म शास्त्र, अर्थशास्त्र और कामसूत्र का वर्णन है।

जीवक चिंतामणि - इसके रचनाकार तिरुतक्कदेवर है। इसमें जन्म से लेकर मोक्ष तक का वर्णन है। इसमें कवि ने 'जीवक' नामक राजकुमार का जीवनवृत्त प्रस्तुत किया है।

संगम काल के प्रमुख वंश :

चेर वंश

संगम काल में पाड्य, चोल और चेर में सबसे प्राचीन चेर राज्य था। सत्ता का केंद्र केरल था। प्रथम शासक उदयन को माना जाता है। इन्होंने केरल में पाकशाला की स्थापना किया, यहां जनता को भोजन कराया जाता था। इस वंश का महान शासक शेनगुट्टुवन या लाल चेर था। इन्होंने अपनी पत्नी कन्नागी की की पूजा देवी के रूप में मूर्ति बनाकर प्रारंभ करवाया। लाल चेर के पश्चात इसका भाई पेरुनजेरल इरंपोरई शासक बना। इसका युद्ध चोल शासक करिकाल से हुआ। घायल हो जाने के कारण इसे हार का सामना करना पड़ा। प्रायश्चित हेतु रणभूमि रणभूमि में ही शरीर का त्याग कर दिया।

चोल वंश

चोल वंश का सबसे प्रतापी शासक करिकाल था। करिकाल अर्थ जला हुआ पैर वाला व्यक्ति होता है। इसने कावेरी नदी के तट पर पूम्पुहर को राजधानी बनाया। इसने चेर शासक पेरुजेरल को परास्त किया था। करिकाल ने संपूर्ण तमिल क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया। इसकी नाभिक शक्ति सुदृढ़ सुदृढ़ होने के कारण इसने श्रीलंका पर श्रीलंका पर भी अधिकार किया।

पांड्य वंश

पांड्य वंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक Nedunjeliyan II नेदुनजेलियण था। सत्ता का केंद्र मदुरै था। इन्होंने शिलप्पादिकारम् के नायक कोबलन को मृत्युदंड दिया क्योंकि इस पर इसके पत्नी के पायल चुराने का आरोप था। पांडे शासकों का रोम के साथ व्यापारिक संबंध था।
चेर का प्रतीक चिन्ह - धनुष
चोल का प्रतीक चिन्ह - बाघ या चीता
पांडे का प्रतीक चिन्ह -  मछली
संगम काल में कर 1/6 था।
इस समय के महत्वपूर्ण देवता मुरुगन थे।
चोल राज्य को चोर मंडलम या कोरोमंडल कहा जाता था।
पांडे की सत्ता का केंद्र मदुरई और महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र प्रतिष्ठान आंध्र प्रदेश थी।
संगम काल में न्यायालय को मनरम कहा जाता था और गुप्तचर को ओरर कहा जाता था।
संगम युग को तमिल साहित्य का स्वर्ण युग काल कहा जाता है। इसका समय 300 ईसा पूर्व से 300 ईसवी तक माना जाता है। संगम साहित्यों के अनुसार इस समय समाज में वर्ण व्यवस्था का स्पष्ट विभाजन नहीं था, फिर भी समाज में ब्राह्मणों को सम्मानजनक स्थान प्राप्त था।

8 June 2019

महान्यायवादी (Attorney General)

अनुच्छेद 76 में वर्णन है कि भारत में एक महान्यायवादी होगा इस की नियुक्ति राष्ट्रपति करेंगे। महान्यायवादी भारत का प्रथम विधि अधिकारी होता है। यह विधि संबंधी सलाह सरकार को देती है। यह मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता है जबकि ब्रिटेन में महान्यायवादी भी मंत्रिमंडल का सदस्य होता है। अभी तक 15 महान्यायवादी चुने जा चुके हैं वर्तमान (2019) में भारत के 15वें महान्यायवादी के. के. वेणुगोपाल है जिन्होंने जून 2017 से मुकुल रोहतगी का स्थान लिया है।

महान्यायवादी बनने की योग्यता

  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • दस साल के लिए उच्च न्यायलय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए।
  • सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनने के बराबर योग्यता रखता हो।

महान्यायवादी की पदावधि

इसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता है इसलिए वह राष्ट्रपति की मर्ज़ी के अनुसार ही कार्यरत रहता है। परन्तु परम्परानुसार इसकी नियुक्ति 3 साल के लिए की जाती है। उसे किसी भी समय राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। उसे हटाने के लिए संविधान में कोई भी प्रक्रिया या आधार उल्लेखित नहीं है।
★ सबसे लंबे समय तक एम सी सीतलवाड़ जबकि सबसे कम समय तक सोली सोराबजी महान्यायवादी रहे।

महान्यायवादी का वेतन

महान्यायवादी का वेतन राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है। संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है।

यह किसी सदन का सदस्य नहीं होता है लेकिन यह किसी भी सदन में जा सकता है, बोल सकता है परंतु अनुच्छेद 88 के तहत यह मत का प्रयोग नहीं कर सकता है। यह भारत सरकार के विरुद्ध किसी को सलाह नहीं दे सकता है और ना ही मुकदमों की पैरवी कर सकता है। महान्यायवादी भारत सरकार का पूर्णकालिक सदस्य नहीं हो सकता है और ना ही सरकारी सेवक होता है। इसको सहायता के लिए एक सॉलिसिटर जनरल तथा दो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल होते हैं। महान्यायवादी को भारत के राज्य क्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। महान्यायवादी को भारत की संचित निधि से वेतन व भत्ते दिए जाते हैं। अनुच्छेद 105 (4) के तहत इसे संसद सदस्यों के समान ही विशेषाधिकार प्राप्त है।

4 June 2019

मंत्रिपरिषद एवं प्रधानमंत्री

संघीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति संविधान प्रधान होता है जबकि व्यवहारिक रूप से प्रधानमंत्री ही कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख होता है। अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति को सहायता एवं सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगा जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होता है। प्रधानमंत्री किसी मंत्री को हटा सकता है, त्याग पत्र मांग सकता है और इनकार करने पर राष्ट्रपति को उसे हटाने की सलाह दे सकता है।
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प्रधानमंत्री बनने की योग्यता

  • भारत का नागरिक हो।
  • 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  • प्रधानमंत्री बनते समय वह किसी भी लाभ के पद पर नियुक्त ना हो।

प्रधानमंत्री का वेतन

प्रधानमंत्री का वेतन संसद द्वारा तय किया जाता है और समय-समय पर संशोधित किया जाता है। वर्तमान में प्रधानमंत्री का वार्षिक वेतन ₹20 लाख रुपए है।

2003 से पहले मंत्रियों की संख्या निश्चित नहीं थी लेकिन 91वां संविधान संशोधन द्वारा कुल सदस्यों का अधिकतम 15% होनी चाहिए। संविधान में मंत्रियों की संख्या का उल्लेख नहीं है। व्यवहार में चार प्रकार के मंत्री होते हैं –
  1. कैबिनेट मंत्री
  2. राज्य मंत्री
  3. स्वतंत्र प्रभार मंत्री
  4. उप मंत्री
कैबिनेट मंत्री - यह सिर्फ अपने विभाग का अध्यक्ष होते हैं मंत्रिमंडल की बैठक में भाग लेते हैं।

राज्य मंत्री - यदि विभाग से संबंधित मामला हो तो बैठक में बैठ सकते हैं। राज्यमंत्री का दर्जा केंद्रीय मंत्री से निम्न होता है परंतु दोनों का वेतन समान होता है।

स्वतंत्र प्रभार मंत्री - राज्य मंत्री ही स्वतंत्र प्रभार मंत्री होते हैं लेकिन कैबिनेट के अधीन कार्य नहीं करते हैं।

उपमंत्री - उप मंत्री कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री दोनों को सहायता देते हैं। संसदीय सचिव उप मंत्री से भी नीचे होता हैं।

संविधान में मंत्रिपरिषद शब्द का प्रयोग किया गया है, मंत्रिमंडल शब्द का नहीं। मंत्री परिषद ब्रिटेन से लिया गया है।
मंत्रिमंडल सिर्फ कैबिनेट स्तर के मंत्री से बने होते हैं। मंत्रिमंडल की अध्यक्षता प्रधान मंत्री करते हैं। सामान्यत: सप्ताह में एक बार बैठक होती है। इसका निर्णय मंत्री मंडल के सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होता है। त्यागपत्र देकर ही विरोध कर सकते हैं। मंत्रिमंडल के निर्णय को गुप्त रखा जाता है। 1971 में श्रीमती गांधी संसद की जानकारी के बिना ही रूस के के साथ समझौता कर लिया था।  जब मंत्रिमंडल लोकसभा में बहुमत खो देता है तो संपूर्ण मंत्रिमंडल को त्यागपत्र देना पड़ता है। यदि निर्णय से कोई मंत्री असहमत हो तोे उन्हें त्यागपत्र देना पड़ता है। 1962 में देश के रक्षा की घोर उपेक्षा के कारण रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन को त्यागपत्र देना पड़ा। मंत्रिमंडल की कार्यकाल निश्चित नहीं है।
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद को जोड़ने का कार्य करते हैं। मंत्रियों के बीच में अगर किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न हो जाए तो उसका निपटारा प्रधानमंत्री करते हैं। विधेयकों को पारित करवाने का जिम्मा प्रधानमंत्री के ऊपर होता है। प्रधानमंत्री सदन, देश तथा दल के नेता होते हैं।
1960 में राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि संविधान में कोई उल्लेख नहीं है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की बात मानने के लिए बाध्य है। इस हेतु जवाहरलाल नेहरू ने महान्यायवादी M C सीतलवाड़ से परामर्श किया। सीतलवाड़ ने कहा कि राष्ट्रपति सिर्फ नाम मात्र का अध्यक्ष है इसीलिए मंत्री परिषद की बात मानने के लिए बाध्य है। जिसका समर्थन सर्वोच्च न्यायालय ने भी किया। तत्पश्चात श्री मती इंदिरा गांधी ने 1976 में 42वां संविधान संशोधन करके अनुच्छेद 74 में (I) जोड़कर जोड़कर राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की बात मानने के लिए बाध्य कर दिया।

भारत के सभी प्रधानमंत्री

नाम कार्यकाल
01 जवाहरलाल नेहरू 15-08-1947 से 27-05-1964
02 लाल बहादुर शास्त्री 09-06-1964 से 11-01-1966
03 इंदिरा गांधी 24-01-1966 से 24-03-1977
04 मोरारजी देसाई 24-03-1977 से 28-07-1979
05 चौधरी चरण सिंह 28-07-1979 से 14-01-1980
06 इंदिरा गांधी 14-01-1980 से 31-10-1984
07 राजीव गांधी 31-10-1984 से 01-12-1989
08 विश्वनाथ प्रताप सिंह 02-12-1989 से 10-11-1990
09 चंद्रशेखर सिंह 10-11-1990 से 21-06-1991
10 पीवी नरसिम्हा राव 21-06-1991 से 16-05-1996
11 अटल बिहारी बाजपेई 16-05-1996 से 01-06-1996
12 एच डी देवगौड़ा 01-06-1996 से 21-04-1997
13 आई के गुजराल 21-04-1997 से 18-03-1998
14 अटल बिहारी बाजपेई 19-03-1998 से 13-10-1999
15 अटल बिहारी बाजपेई 13-10-1999 से 21-05-2004
16 डॉ मनमोहन सिंह 22-05-2004 से 21-05-2009
17 डॉ मनमोहन सिंह 22-05-2009 से 17-05-2014
18 नरेंद्र मोदी 26-05-2014 से 30-05-2019
19 नरेंद्र मोदी 30-05-2019 से ...... ..

मंत्री परिषद तथा प्रधानमंत्री से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य –

★ मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उप मंत्रियों को निशुल्क आवास एवं अन्य सुविधाएं दी जाती है।
★ भारत की पहली महिला केंद्रीय मंत्री राजकुमारी अमृता कौर थी।
★ भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी बनी।
★ नेहरू मंत्रिमंडल में गैर कांग्रेसी मंत्री को सम्मिलित किया था जैसे – भीमराव अंबेडकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा जॉन मथाई।
★ संघीय मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देने वाला पहला मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं।
★ संसद सदस्य बने बिना गोविंद बल्लभ पंत मंत्री बने थे। यह पहला मंत्री है जिन्हें मंत्री पद पर रहते हुए भारत रत्न मिला।
★ सबसे अधिक दिनों तक प्रधानमंत्री नेहरू रहे और सबसे कम अटल बिहारी बाजपेई।
★ पी. वी. नरसिंहा राव और एच. डी. देवगोड़ा संसद सदस्य बने बिना प्रधानमंत्री बने जबकि इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनने से पहले राज्यसभा के सदस्य थे।
★ 1994 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के पश्चात गुलजारीलाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे। पद पर रहते हुए 3 प्रधानमंत्रियों मृत्यु को प्राप्त हुए –
  1. जवाहरलाल नेहरू
  2. इंदिरा गांधी
  3. लाल बहादुर शास्त्री
★ लाल बहादुर शास्त्री का निधन 11 जनवरी 1966 को देश से बाहर ताशकंद में हुआ था।
★ सबसे बुजुर्ग प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (80 वर्ष 23 दिन) और सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी (40 वर्ष 42 दिन) थे।
★ लोकसभा चुनाव में पराजित होने वाला पहली प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थी।
★ चौधरी चरण सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जो कभी लोक सभा में उपस्थित नहीं हो पाए।
★ सबसे पहला घोटाला (जीप घोटाला) जवाहरलाल नेहरू के समय में 1963 में हुआ था।
★ सबसे पहले अविश्वास प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू पर 1963 में लाया गया। सबसे अधिक अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी के समय लाया गया था।
★ अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाए जाने वाले प्रथम प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रसाद सिंह है।
★ लोकसभा में विश्वास मत प्राप्त करने से पहले त्यागपत्र देने वाला प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई है।
★ कैबिनेट मंत्रियों में सर्वाधिक बड़ा कार्यकाल (32 वर्ष) जगजीवन राम का था।