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15 December 2018

नागरिकता | Citizenship of India

नागरिकता (Citizenship of India)

भारतीय संविधान के भाग - 2 और अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता का वर्णन है। इसे 26 नवंबर 1949 को लागू किया गया। भारत में एकल या इकहरी नागरिकता की व्यवस्था है यानी जो व्यक्ति राज्य का नागरिक है वह देश का भी नागरिक होगा। जबकि अमेरिका और स्विजरलैंड में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था है। दोहरी नागरिकता में राज्य एवं केंद्र के लिए अलग-अलग नागरिकता होती है।
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नागरिकता ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है। नागरिकता को संविधान में परिभाषित नहीं किया गया है। सामान्यता नागरिकता से आशय व्यक्ति राज्य के प्रति निष्ठावान हो और राज्य उनको संरक्षण प्रदान करता हो। कश्मीर के नागरिकों को दोनों प्रकार की नागरिकता प्राप्त है। संविधान के अंतर्गत नागरिकता प्राप्त करने के लिए जन्म सिद्धांत और वंश सिद्धांत दोनों को अपनाया गया है। 1955 में नागरिकता अधिनियम बना।

नागरिकता अधिनियम 1955

नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार भारत में पांच प्रकार से नागरिकता प्राप्त किया जा सकता है।

नागरिकता प्राप्त करने की विधि

  1. जन्म द्वारा – 26 जनवरी 1950 ईस्वी से (भारतीय संविधान लागू होने की तिथि) जिनका जन्म भारत में हुआ हो या माता-पिता का जन्म भारत में हुआ हो।
  2. वंश द्वारा – 26 जनवरी 1950 के बाद विदेश में जन्म लेने वाला  बच्चा भी भारतीय नागरिक होगा, यदि उसके माता-पिता में या माता-पिता में से कोई एक भी भारत का नागरिक हो।
  3. पंजीकरण के आधार पर।
  4. देसी करण के आधार पर।
  5. किसी क्षेत्र को भारत में मिलाने पर।
अनुच्छेद 6 के तहत 19 जुलाई के पहले या बाद पाकिस्तान चला गया हो और 26 नवंबर 1949 से पहले भारत आ गया हो तो वह भारत का नागरिक होगा।
अनुच्छेद 7 के तहत 1 मार्च 1947 के पश्चात पाकिस्तान चला गया हो और स्वतंत्रता के पश्चात भारत आ गया हो वह भारत का नागरिक होगा।
अनुच्छेद 8 के तहत ऐसा व्यक्ति जो भारत से बाहर रहता हो लेकिन उनके दादा-दादी का जन्म भारत में हुआ हो तो वह पंजीकरण कराकर नागरिकता प्राप्त कर सकता है।

भारतीय नागरिकता की समाप्ति के आधार –

  • यदि गलत सूचना देकर नागरिकता प्राप्त किया जाता है।
  • देशद्रोह या युद्ध के समय शत्रु की सहायता करने पर बिना सूचना के 7 वर्षों तक विदेश में रहने पर।
  • किसी व्यक्ति को यदि विदेशों में 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा हुई हो।
अनुच्छेद 9 में वर्णन है कि यदि विदेशी नागरिकता प्राप्त करते हैं तो भारत की नागरिक स्वतः समाप्त हो जाएगी।
अनुच्छेद 10 के तहत संसदीय विधान के अलावा अन्य किसी विधि से नागरिकता को समाप्त नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 11 में नागरिकता की प्राप्ति और समाप्ति का वर्णन है।

नागरिकता अधिनियम 1986

सन् 1986 में पुनः नागरिकता में संशोधन किया गया। जिसमें पंजीकरण की अवधि 6 महीने से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया और देसी करण का समय 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया। 1955 का अधिनियम कश्मीर में लागू नहीं था, लेकिन 1986 के अधिनियम संपूर्ण भारत पर लागू है।

नागरिकता अधिनियम 1993

1986 के पश्चात 1993 में नागरिकता में पुनः संशोधन किया गया। इसमें प्रावधान किया गया कि भारत से बाहर पैदा होने वाले बच्चे की माँ यदि भारत की नागरिक हो तो उसे भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। पहले सिर्फ पिता की स्थिति में नागरिकता दी जाती थी। 1992 के पश्चात 2004 में 16 देशों के नागरिकों को दोहरी नागरिकता प्रदान किया गया। यह नागरिकता सिर्फ विदेशियों की आने-जाने के लिए था, मत देने या चुनाव में भाग लेने का नहीं।

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