मुद्रास्फीति एवं संकुचन | Inflation - BHARAT GK

24 April 2018

मुद्रास्फीति एवं संकुचन | Inflation

मुद्रास्फीति (Inflation in Hindi) :

मुद्रास्फीति से आशय कीमत में वृद्धि या मुद्रा के मूल्य में ह्रास से है। मुद्रास्फीति की परिभाषा निम्न रूप से दे सकते हैं : वस्तु तथा सेवा के पूर्ति तुलना में मांग में वृद्धि के कारण कीमत स्तर में जो वृद्धि होती है वही मुद्रास्फीति कहलाती है या मूल्य वृद्धि के कारण मुद्रा का मूल्य गिरना ही मुद्रास्फीति कहलाता है। प्रोफेसर पीगू के अनुसार मुद्रास्फीति वह स्थिति है जिसमें बहुसंख्यक मुद्रा अल्पसंख्यक मुद्रा का पीछा करती है।
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मुद्रास्फीति के कारन

मुद्रास्फीति उत्पन्न होने के दो कारण है –
  1. मौद्रिक आय में वृद्धि करने का कारक - नोट करने का निगमन, बैंक दर में कमी, कम कीमत पर प्रतिभूति बेचना, घाटे की व्यवस्था या हिनार्थ प्रबंधन।
  2. उत्पादन की मात्रा को कम करने वाला कारक - पुराने करो में वृद्धि, भुगतान संकुचन को ठीक करने हेतु निर्यात को प्रोत्साहन, औद्योगिक विवाद, हड़ताल, तालाबंदी आदि।

मुद्रास्फीति के प्रकार :

रेंगती या नर्म स्फीति (Creeping or Moderate Inflation) - जब स्फीति का वार्षिक दर एक अंग में ही हो तो उसे नर्म या रेंगती स्फीति कहा जाता है। यह स्फीति आर्थिक विकास में सहायक है।
ग्लोपिंग स्फीति (Galloping Inflation) - इस स्फीति के जनक सिमुलेशन है। इसमें स्फीति का वार्षिक 2 दो या 3 अंक का होता है। प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात जर्मनी की स्फीति दर 140 से 410 प्रति व्यक्ति हो गई थी।
अधि स्फीति (Hyper Inflation) - जब स्फीति 3 अंक वार्षिक से अधिक हो तो उन्हें हाइपर स्फीति कहते हैं। इसका जनक गण है। हाइपर स्फीति में पत्र मुद्रा बेकार हो जाती है। ऐसी स्फीति नवंबर 1930 में जर्मनी में हुआ था और हंगरी में भी।
खुली स्फीति (Open Inflation) - जब स्फीति में किसी प्रकार का नियंत्रण ना हो तो उसे खुली स्फीति कहा जाता है।
दबी स्फीति (Supposed Inflation) - जब सरकार मूल्य स्तर की सीमा एक सीमा से रखकर मूल्य ऊँचा दिखलाई न दे जितना वास्तविक है, दबी स्फीति कहलाती है। इसका लक्ष्य रहता है परंतु प्रकट नहीं करता है।
मांग प्रेरित स्फीति (Demand Pull Inflation) - जब समग्र पूर्ति की उपेक्षा मांग अधिक हो उसे मांग प्रेरित स्फीति का जाता है। यह स्फीति मौद्रिक आय में वृद्धि से होती है।
लागत जन्य स्फीति (Wage Push Inflation) - जब मजदूर संग्रहण अधिक मजदूरी बढ़ाने में या व्यापारिक भार की आपूर्ति के कारण लाभ सीमा बढ़ा देता है। वही लागत जन्य कहलाता है।
केन्स ने मुद्रास्फीति की व्याख्या 1940 में प्रकाशित पुस्तक 'How to Play for what' में कियाा है। केन्स की प्रसिद्ध पुस्तक 'General Theory on Employment, Investment and Money' है।

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