December 2017 - BHARAT GK - GK in Hindi

26 December 2017

प्रतिहार वंश | Gurjara-Pratihara

प्रतिहार वंश | Gurjara-Pratihara

गुर्जर प्रतिहार वंश के संस्थापक नागभट्ट प्रथम (730-760 ई०) थे। इसे ही प्रतिहार वंश भी कहा जाता है। इसकी राजधानी उज्जैन थी। प्रतिहार मंदौर के मूल निवासी थे। नागभट्ट प्रथम के समय अरब का भारत पर आक्रमण हुआ। इसके बाद कक्कूक और देवराज शासक बने। ये अयोग्य शासकों में गिने जाते हैं। गुर्जर प्रतिहार वंश के प्रमुख शासक वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय, मिहिरभोज, महेंद्र पाल, महिपाल, राजपाल आदि थे।

वत्सराज (780 - 800 ई०)

प्रतिहार वंश का शक्तिशाली शासक वत्सराज (780 -800 ई०) थे। सम्राज्य विस्तार के क्रम में कन्नौज पर आक्रमण किया। कन्नौज के साथ-साथ इंदिरा युद्ध को परास्त कर सामंत के रुप में शासन करने दिया। कन्नौज पर आधिपत्य को लेकर पाल शासक धर्मपाल को भी परास्त किया लेकिन राष्ट्रकूट के शासक ध्रुव के हाथों वत्सराज की हार हुई अनुकूल स्थिति पाकर धर्मपाल ने कन्नौज पर आधिपत्य कायम कर लिया और इंदिरा युद्ध को हराकर चकरा युद्ध को शासक बना दिया।

नागभट्ट द्वितीय (800 - 833 ई०)

वत्सराज के पश्चात नागभट्ट द्वितीय (800 - 833 ई०)  शासक बने इन्होंने चकरा युद्ध को परास्त कर कन्नौज को दूसरी राजधानी बनाया और पाल शासक धर्मपाल को भी परास्त किया लेकिन राष्ट्रकूट शासक गोविंद तृतीय के हाथों परास्त हुआ।

मिहिर भोज या भोज प्रथम (836–885 ई०)

इस वंश के सबसे शक्तिशाली शासक मिहिर भोज (836 - 885) थे। इनकी जानकारी अरब यात्री सुलेमान के विवरण से मिलती है। मिहिरभोज पहले पाल शासक देवपाल से प्राप्त हुआ और राष्ट्रकूट शासक गोविंद तृतीय से भी परास्त होना पड़ा। पुनः पाल शासक नागभट्ट पाल को परास्त किया और राष्ट्रकूट शासक कृष्ण द्वितीय को भी प्राप्त किया। मिहिरभोज वैष्णव धर्म को मानते थे। इन्होंने आदिवराह और प्रभास की उपाधि धारण किया। आदिवराह की उपाधि उसने विष्णु के सम्मान में धारण किया था।


महेंद्र पाल प्रथम (885 - 910 ई०)

मिहिर भोज के पश्चात इनका पुत्र महेंद्र पाल प्रथम (885 - 910) शासक बना। यह विद्वान थे उनके दरबार में प्रसिद्ध विद्वान राजशेखर रहते थे। राजशेखर ने काव्यमीमांसा, बाल रामायण, बाल भारत, कर्पूरमंजरी, विद्धशालभंजिका, भुवनकोश और हरिविलास की रचना किया।

महिपाल (913 - 944 ई०)

महेंद्र पाल के बाद भोज द्वितीय (910 -913 ई०) और इसके बाद महिपाल (913 - 944 ई०) शासक बना। महिपाल के समय इंद्र तृतीय कन्नौज पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दिया। इसीके समय बगदाद यात्री अल मसूदी ने भारत की यात्रा किया। महिपाल के समय प्रतिहार वंश का विघटन प्रारंभ हो गया अंतिम शासक यशपाल (1024 -1036 ई०) थे। इनके समय 1018 में मोहम्मद गजनबी ने कन्नौज पर आक्रमण कर आधिपत्य कायम कर लिया।

प्रतिहार शासकों की सूची :

  • नागभट प्रथम (730–760)
  • कक्कूक और देवराज (760–780)
  • वत्सराज (780–800)
  • नागभट्ट द्वितीय (800–833)
  • रामभद्र (833–836)
  • मिहिर भोज या भोज प्रथम (836–885)
  • महेन्द्रपाल प्रथम (885–910)
  • भोज द्वितीय (910–913)
  • महिपाल (913–944)
  • महेन्द्रपाल द्वितीय (944–948)
  • देवपाल (948–954)
  • विनायकपाल (954–955)
  • महिपाल द्वितीय (955–956)
  • विजयपाल (956–960)
  • राजपाल (960–1018)
  • त्रिलोचनपाल (1018–1027)
  • यसपाल(1024–1036)

20 December 2017

चोल वंश | Chola Dynasty in Hindi

चोल वंश | Chola Dynasty in Hindi :

चोल पल्लव के सामंत थे। पल्लव वंश के ध्वंसावसेसो पर चोल वंश की नींव रखी गयी थी। चोल वंश के संस्थापक विजयालय ( 850 - 871 ई०) थे इन्होंने 9वी शताब्दी  में चोल वंश की स्थापना किया। इसकी राजधानी तंजौर या तांजाय या तंजावूर थी। तंजावूर का वास्तुकार कुंजरमल्लन राजराज पेरुथच्चन था। विजयालय ने नरकेसरी की उपाधि धारण किया था। निशुम्भसूदिनी का मंदिर विजयालय ने बनवाया।

आदित्य प्रथम (871-907 ई०)

स्वतंत्र शक्तिशाली शासक आदित्य प्रथम थे इन्होंने पल्लव शासक अपराजित को परास्त कर पल्लव पर आधिपत्य कायम कर लिया। कावेरी नदी के मुहाने पर शिव मंदिर का निर्माण आदित्य प्रथम ने करवाया।

परांतक प्रथम (907-950ई०)

आदित्य प्रथम के बाद परांतक प्रथम शासक बना इन्होंने पांड शासक नरसिंह को परास्त कर मदुरैकोंडा (मदुरै को जीतने वाला) की उपाधि धारण किया। परांतक प्रथम ने पल्लवों पर जीत हासिल किया और इस उपलक्ष में कोदंडराम की उपाधि धारण किया।

राजराज प्रथम (985 - 1014 ई०)

आदित्य प्रथम के बाद परांतक द्वितीय का पुत्र राजराज प्रथम शासक बना। ये शैव धर्म के अनुयायी थे। ये एक महान शाषक थे। इन्होंने चोल की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः वापस किया वापस किया। सम्राज्य विस्तार के क्रम में मैसूर के गंगों, मदुरै के पांड्यो तथा बेंगी के चालुक्यों को परास्त किया। इन्होंने लंका के उत्तरी भाग पर भी आक्रमण किया और वहां के शासक राजा माहिम पंचम को परास्त कर लंका पर आधिपत्य कायम किया। माहिम पंचम को भागकर श्रीलंका के दक्षिण जिला रोहण में शरण लेनी पड़ी थी। राजराज प्रथम ने श्रीलंका में जीते गए क्षेत्र का नाम  मुम्ड़ीचोलमंडलम रखा और इसकी राजधानी अनुराधापुर के स्थान पर पोलन्नरूवा को बनाया साथ ही वहां एक शिव मंदिर का निर्माण कराया जो अभी भी विधमान है। चोल के समय भूमि माप की इकाई वेली थी। राजराज ने तंजोर में 13  मंजिला राजराजेश्वर या वृद्धेश्वर का मंदिर बनवाया। यह राजा राज महान के नाम से विख्यात है।

राजेंद्र प्रथम

राजराज प्रथम के पश्चात् पुत्र राजेंद्र प्रथम शासक बने। यह चोल वंश के सबसे शक्तिशाली शासक हुए। इन्होंने संपूर्ण श्रीलंका पर आधिपत्य कायम कर महेंद्र पंचम को बंदी बना लिया। चोल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार राजेंद्र प्रथम के काल में हुआ। राजेंद्र प्रथम ने पाल शासक महिपाल को परास्त किया और गंगा घाटी तक आधिपत्य होने के कारण गंगैकोंडचोल की उपाधि धारण किया। राजेन्द्र प्रथम ने तंजौर के समीप चोलगंगम नामक तालाब बनवाया और उस तालाब में गंगा का पानी ला कर डाला और उसके निकट गंगैकोंडचोलपुरम् नामक नगर बसाया। राजेन्द्र प्रथम के पास विशाल नौसेना थी जिनके कारण दक्षिण-पूर्व एशिया की मलाया, सुमात्रा और जावा द्वीप को भी जीता। यह विद्वान शासक थे उन्होंने तंजौर में वैदिक विद्यालय की स्थापना किया और पंडित चोल की उपाधि धारण किया। राजेन्द्र प्रथम गजनी के सुल्तान महमूद का समकालीन था। तिरुवलंगान्डु एव तंजौर अभिलेख से राजेन्द्र प्रथम की विस्तृत जानकारी मिलती है। राजेन्द्र प्रथम ने मुदिकोंड और कुदारकोंड की भी उपाधियां धारण किया था। राजराज प्रथम चोल वंश के प्रथम शासक थे जिन्होंने भूमि का सर्वेक्षण करवाया।

चोल काल मे भूमि के प्रकार :

  • वेल्लनवगाई : गैर ब्राह्मण किसान स्वामी की भूमि।
  • ब्राह्मदेय : ब्राह्मणों को उपहार में दी गई भूमि।
  • शालाभोग : किसी विद्यालय की राख रखाव की भूमि।
  • देवदान या तिरुनमटडक्कनी : मंदिर को उपहार दी गई भूमि।
  • पल्लीच्चंदम : जैन संस्थानों को दान दी गई भूमि।
चोल काल में भूमि कर उपज का 1/3 होता था।

राजाधिराज

राजेन्द्र प्रथम के पश्चात राजाधिराज शासक बने इन्होंने चालुक्य शासक विक्रमादित्य को परास्त कर विजय राजेंद्र की उपाधि धारण किया और कल्याणी से एक द्वारपाल की मूर्ति लाकर अपने दरबार में लगा दिया। चोल वंश के अंतिम शासक अधिराजन या राजेंद्र तृतीय थे इनके समय जनविद्रोह जनविद्रोह हुआ और इनको समाप्त कर दिया गया। उसके बाद चोल तथा चालुक्य का संयुक्त शासन प्रारंभ हुआ। प्रथम शासक पोलो तुंग प्रथम हुए उन्होंने पुनः भूमि का सर्वेक्षण करवाया और अपना दूत चीन भेजा। चोल वंश के अंतिम शासक राजेंद्र तृतीय था। राजेंद्र तृतीय को पांड्य शासकों ने पराजित कर चोल वंश का अंत कर दिया था।

चोल वंश के शासक :

  • विजयालय चोल – 848-871
  • आदित्य प्रथम – 871-907 -
  • परन्तक चोल प्रथम – 907-950
  • गंधरादित्य – 950-957
  • अरिंजय चोल – 956-957
  • सुन्दर चोल – 957-970
  • उत्तम चोल – 970-985
  • राजाराज चोल प्रथम – 985-1014
  • राजेन्द्र चोल प्रथम 1012-1044
  • राजाधिराज चोल प्रथम 1018-1054
  • राजेन्द्र चोल द्वितीय – 1051-1063
  • वीरराजेन्द्र चोल 1063-1070
  • अधिराजेन्द्र चोल 1067-1070

चालुक्य - चोल :

  • कुलोतुंग चोल प्रथम – 1070-1120
  • कुलोतुंग चोल द्वितीय – 1133-1150
  • राजाराज चोल द्वितीय – 1146-1163
  • राजाधिराज चोल द्वितीय – 1163-1178
  • कुलोतुंग चोल तृतीय – 1178-1218
  • राजाराज चोल तृतीय – 1216-1256
  • राजेन्द्र चोल तृतीय – 1246-1279

चोल संस्कृति की विशेषता :

चोल की मुख्य विशेषता स्थानीय स्वशासन थी। वर्तमान पंचायती राज्य व्यवस्था चोल की ही देन है। चोल का स्थानीय स्वशासन बहुत ही मजबूत थी। प्रांत को मंडलम कहा जाता था, कमिश्नरी को कोट्टम, जिला को नाडु, ग्राम को कुर्रम कहा जाता था। नगर की स्थानीय सभा को नगरतार, जिलों की स्थानीय सभा को नाटुर और आम जनता की समिति को उर कहा जाता था। सभा या महासभा अग्रहरो और ब्राह्मणों की सभा होती थी इसके सदस्यों को पेरूमक्कल कहा जाता था। व्यापारियों की सभा को नगरम कहा जाता था। चोल काल में सोने के सिक्कों को काशु कहते थे। चोल काल में धान आम वस्तुओं के आदान-प्रदान का माध्यम होता था। तमिल साहित्य के त्रिरत्न कहलाते थे – पुगलेंदि, कम्बन और औट्टक्कुट्टन। कन्नड़ साहित्य के त्रिरत्न कहलाते थे – पोन्न, रन्न और पम्प।
चोल कालीन सभी मंदिरों में सबसे महत्वपूर्ण नटराज शिव मंदिर है। मंदिर के प्रवेश द्वार को गोपुरम कहा जाता था। चोल की भाषा संस्कृत और तमिल थी।

14 December 2017

संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट अभिकरण व संगठन | United Nations Organizations in Hindi

संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट अभिकरण व संगठन

संयुक्त राष्ट्र संघ खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO - Food and Agriculture) – इस संगठन की स्थापना 16 अक्टूबर 1945 ईस्वी को किया गया। इसका मुख्यालय रोम (इटली) में है। इस संगठन का उद्देश्य विश्व में कृषि एवं पोषण स्तर में सुधार लाकर जीवन स्तर स्तर को बढ़ाना है। 

अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD - International Fund for Agricultural Development)
इस संगठन की स्थापना दिसंबर 1977 ईस्वी को की गई। इसका मुख्यालय रोम इटली में है। इस संगठन का उद्देश्य विकासशील देशों में निम्न वर्गों को उन्नत खाद उत्पादन तथा पोषाहार के साधन जुटाने में मदद करना है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF - International Monetary Fund) – इस संगठन की स्थापना 7 जुलाई 1944 ईस्वी को किया गया इस संगठन का मुख्यालय वाशिंगटन डीसी (USA) में है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रों के मध्य मौद्रिक सहयोग तथा व्यापार का संतुलित विकास करना है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO - World Trade Organization) – एक संगठन की स्थापना 1 जनवरी 1995 ईस्वी को किया गया इस संगठन का मुख्यालय जेनेवा (स्विजरलैंड) में है। इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के लिए संस्थागत तथा कानूनी आधार उपलब्ध कराना एवं विवादों को सुलझाना है।

विश्व बैंक (World Bank) – विश्व बैंक की स्थापना जुलाई 1945 ईस्वी को की गई। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी (USA) मैं है इस संगठन का मुख्य उद्देश्य उत्पादन एवं विकास हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूंजी के विनिमय को प्रशान देना है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO - World Health Organization) – विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 22 जुलाई 1946 ईस्वी को किया गया। इसका मुख्यालय जिनेवा स्विजरलैंड में है यह विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है। इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO - World Meteorological Organization) – इस संगठन की स्थापना 23 march 1950 ईस्वी में की गई इसका मुख्यालय जिनेवा स्विजरलैंड में है। इसका मुख्य उद्देश्य मौसम विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, प्राकृतिक आपदाओं को कम करने में मौसम विज्ञान का प्रयोग तथा मौसम विज्ञान के क्षेत्र में शोध एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहन देना है।

यूनेस्को (UNESCO) – इसका पूरा नाम संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization) है। इस संगठन की स्थापना 16 नवंबर 1945 ईस्वी को की गई इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है इस संगठन का कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ( ILO - International Labour Organization) – इस संगठन की स्थापना 11 अप्रैल 1919 को की गई इसका मुख्यालय जिनेवा स्विजरलैंड इसका मुख्यालय जिनेवा स्विजरलैंड में है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़दूरों के अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) का गठन किया गया।  इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास करना है। 1969 में इसे विश्व शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR - United Nations High Commissioner for Refugees) – इस संगठन का स्थापना 14 दिसंबर 1950 ईस्वी में किया गया इसका मुख्यालय जिनेवा (स्विजरलैंड) में है। इसका उद्देश्य शरणार्थियों की समस्याओं के प्रति आपात राहत पुनर्वास सहायता, सुरक्षा तथा स्थायी निदान उपलब्ध कराना है।

सार्वभौम डाक संघ (UNP - Universal Postal Union) इस संगठन की स्थापना 9 अक्टूबर 1874 ईस्वी को हुई। इसका मुख्यालय बर्न (स्विजरलैंड) में है। इस संगठन का उद्देश्य विश्व भर में डाक सेवाओं के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्थापित करना है।

संयुक्त राष्ट्री पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP - United Nations Environment Programme) – इस संगठन की स्थापना 5 जून 1972 ईस्वी को की गई इसका मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है। किसका कार्य विश्व स्तर पर पर्यावरण की सुरक्षा तथा संरक्षण को प्रोत्साहित करना है।

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन ( UNIDO - United Nations Industrial Development Organization) – इस संगठन की स्थापना नवंबर 1966 में की गई इसका मुख्यालय वियेना (ऑस्ट्रिया) में है। इस संगठन का कार्य भी तो बड़े में लोगों की समृद्धि आर्थिक मजबूती तथा जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए औद्योगिक आधार तैयार करना है।

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU - International Telecommunication Union) – इस संगठन की स्थापना 17 मई 1865 को हुई। इसका मुख्यालय जिनेवा स्विजरलैंड में है। यह अन्तर्राष्ट्रीय रेडियो और दूरसंचार को नियमित और मानकीकृत करने हेतु स्थापित हुई थी।

व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT - Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty) – एक संगठन की स्थापना 19 नवंबर 1996 ईस्वी को हुई इसका मुख्यालय वियेना (ऑस्ट्रिया) में है। यह संधि 24 सितंबर 1996 को अस्तित्व में आयी। उस समय इस पर 71 देशों ने हस्ताक्षर किया था परंतु अब तक इस पर 178 देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। भारत और पाकिस्तान ने सीटीबीटी पर अब तक हस्ताक्षर नहीं किया है। इसके तहत परमाणु परीक्षणों को प्रतिबंधित करने के साथ यह प्रावधान भी किया गया है कि सदस्य देश अपने नियंत्रण में आने वाले क्षेत्रें में भी परमाणु परीक्षण को नियंत्रित करेंगे।

विश्व पर्यटन संगठन (WTO - World Tourism Organization) – इस संगठन की स्थापना 1975 में की गई इसका मुख्यालय मेड्रिड (स्पेन) में है। इसका उद्देश्य विश्व पर्यटन को बढ़ावा देखकर रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO - World Intellectual Property Organization) – इस संगठन की स्थापना 14 जुलाई 1967 ईस्वी को की गई इसका मुख्यालय जिनेवा स्विजरलैंड में है। इसका उद्देश्य बौद्धिक संपदा के लिए सम्मान बढ़ाना तथा बौद्धिक संपदा को संरक्षण देना है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण (IAEA - International Atomic Energy Agency) – संगठन की स्थापना 29 जुलाई 1957 को की गई इसका मुख्यालय वियेना ऑस्ट्रिया में है। इस संगठन का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को विश्व भर में प्रोत्साहन देना है।

अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO - International Civil Aviation Organization) – इस संगठन की स्थापना 4 अप्रैल 1947 ईस्वी को की गई। इसका मुख्यालय मॉन्ट्रियल (कनाडा) में है। इस संगठन का कार्य अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन के मापदंड व नियमों को निश्चित करना तथा नागरिक उड्डयन की समस्याओं का अध्ययन करना वह उसका निदान प्रस्तुत करना है।

रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW - Organisation for the Prohibition of Chemical Weapons) – इस संगठन की स्थापना 29 अप्रैल 1997 ईस्वी को की गई इसका मुख्यालय द हेग, नीदरलैंड (The Hague, Netherlands) में है। इस संगठन का कार्य दुनिया भर में रासायनिक हथियारों को नष्ट करना और उनकी रोकथाम के लिए काम करना है। वर्तमान में यह संस्था सीरिया में हथियारों को ख़त्म किए जाने का काम देख रही है। नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने 2013 का शांति पुरस्कार इस संस्था को दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक संगठन (IMO - International Maritime Organization) – इस संगठन की स्थापना 1959 में की गई। इसका मुख्यालय लंदन ब्रिटेन में है। इस संगठन का कार्य नौ-परिवहन के क्षेत्र में सुरक्षा नियमों का निर्धारण तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि करना है।

संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations)

महासभा (General Assembly)

सुरक्षा परिषद (Security Council)

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council)

न्यासी परिषद (Trusteeship Council)

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय (United Nations Secretariat)

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय | United Nations Secretariat

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय | United Nations Secretariat

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय संयुक्त राष्ट्र का एक मुख्य अंग है जो संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा नेतृत्व होता है। इसकी स्थापना 1945 में की गई। इसका मुख्यालय मैनहैटन टापू, न्यूयॉर्क शहर, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य में है।
इसका प्रमुख कार्य विभिन्न सूचनाओं को एकत्र करना और करना और उन्हें संकलित कर सदस्यों के विचार-विमर्श हेतु उसके समक्ष प्रस्तुत करना है।
सचिवालय का प्रमुख महासचिव होता है। यह सचिवालय के प्रशासनिक अधिकारी होता है। इसे सचिवालय का संचालक भी माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के वर्तमान (2018) अध्यक्ष एंटोनियो गुटेरेस है। महसभा द्वारा सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर 5 वर्षों के लिए महासचिव की नियुक्ति की जाती है वह दुबारा भी चुना जा सकता है। महासचिव का कर्तव्य अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाना, शांतिरक्षा कार्यों का प्रबंध करना, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करना, सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के कार्यान्वयन को जांचना और सदस्य सरकारों से बातचीत करना है। सचिवालय में लगभग 4000 कर्मचारी है ।
संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations)

महासभा (General Assembly)

सुरक्षा परिषद (Security Council)

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council)

न्यासी परिषद (Trusteeship Council)

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)

संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट अभिकरण व संगठन (United Nations Special Agency and Organizations)

13 December 2017

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय | International Court of Justice

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय

अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) की स्थापना हैंग (नीदरलैंड) में जून 1945 ईस्वी को हुई और 3 अप्रैल 1946 ईस्वी से कार्य करना प्रारंभ किया। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को विश्व का अदालत कहा जाता है। यह विश्व का न्यायिक अंग है। इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 15 होती है जिनका निर्वाचन महासभा एवं सुरक्षा परिषद के द्वारा होता है और इनका कार्यकाल 9 वर्षों का होता है। यह दोबारा चुने जा सकते हैं लेकिन एक देश से सिर्फ एक ही सदस्य चुने जा सकते हैं। प्रत्येक 3 वर्ष पर पांच न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करते हैं और इतने ही नियुक्त किए जाते हैं और इसी में एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होते हैं। सभा के कार्यवाही चलाने हेतु कम से कम 9 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक है। न्यायालय की कार्यकारी भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है मान्यता प्राप्त भाषाएं छः है। निर्णय साधारण बहुमत से लिया जाता है। बराबर की स्थिति में अध्यक्ष निर्णायक मत देते हैं।
अभी तक 4 भारतीय अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का न्यायाधीश बने हैं :
  1. बेनेगल रामाराव – 1952-53
  2. नागेंद्र सिंह – 1973-1988 
  3. गोपाल स्वरूप पाठक – 1989 - 91
  4. दलवीर भंडारी – 2012 से वर्तमान
(नागेंद्र सिंहप्रथम भारतीय हैं जिन्होंने न्यायाधीश और अध्यक्ष दोनों पदों पर कार्य किया है 1976 से 79 तक न्यायाधीश और 85 से 88 तक अध्यक्ष।)
वर्तमान (2018) में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष सोमालिया के अब्दुलकवी अहमद यूसुफ (Abdulqawi Ahmed Yusuf) तथा उपाध्यक्ष चीन के Xue Hanqin है।
संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations)
महासभा (General Assembly)
सुरक्षा परिषद (Security Council)
आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council)
न्यासी परिषद (Trusteeship Council)
संयुक्त राष्ट्र सचिवालय (United Nations Secretariat)
संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट अभिकरण व संगठन (United Nations Special Agency and Organisations)

राष्ट्र संघ न्यास परिषद | United Nations Trusteeship Council

राष्ट्र संघ न्यास परिषद :

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के 8 वीं अध्याय द्वारा न्यास परिषद (Trusteeship Council) की व्यवस्था की गई। चार्टर्ड के अनुच्छेद 75 के अनुसार संयुक्त राष्ट्र अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत न्यास प्रदेशों के प्रशासन और नियंत्रण के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय न्यास व्यवस्था स्थापित करेगा जो समझौतों द्वारा संपादित होगी।
न्यास परिषद (Trusteeship Council) की स्थापना का मुख्य उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पराजित राष्ट्रों की संपत्ति को लौटाना और उसका पुनर्निर्माण करना था। जो राज्य पूर्ण रूप से स्वशासन की स्थिति में नहीं आ पाए उन्हें न्यास (trust) समझते हुए विकसित राष्ट्र उनके प्रति न्यासी (trustee) का भाव रख उसका उद्धार कर पूर्ण रुप से स्वतंत्र करना और उसकी अर्थव्यवस्था को अपने पैरों पर खड़ा करने में सहायता प्रदान करना इसका उद्देश्य था। इस परिषद में 11 देशों को रखा गया जिन्हें न्यासी क्षेत्र (Trusteeship territory) कहा गया। नवंबर 1996 ईस्वी में अमेरिका द्वारा प्रशासित प्रशांत द्वीप पलामू की स्वतंत्रता के साथ ही न्यास परिषद की स्थापना का उद्देश्य लगभग पूर्ण हो चुका है। 20 वर्षों के अंदर ही सारी समस्याओं का निदान कर दिया गया फिर भी इसका वजूद बना हुआ है। वर्ष में इसका अधिवेशन दो बार जून और नवंबर में होता है। इस परिषद में सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य शामिल है। न्यास परिषद के वर्तमान (2018) अध्यक्ष फ्रांस के अलेक्सिस लमेक (Alexis Lamek) तथा उपाध्यक्ष यूनाइटेड किंगडम के पीटर विल्सन हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations)

महासभा (General Assembly)

सुरक्षा परिषद (Security Council)

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council)

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय (United Nations Secretariat)

संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट अभिकरण व संगठन (United Nations Special Agency and Organizations)

12 December 2017

राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद | United Nations Security Council

राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद | United Nations Security Council

सुरक्षा परिषद की स्थापना 24 October 1945 में की गई।यह संघ का मुख्य अंग है। इसका कार्य विश्व शांति एवं सुरक्षा से संबंधित कार्य करना है। यह UNO की कार्यपालिका है।
सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष Gustavo Meza-Cuadra हैं। वर्तमान में सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य देश है जिनमें 5 सदस्य देश वीटो शक्ति से युक्त है और शेष 10 अस्थाई सदस्यों को महासभा द्वारा 2 वर्षों के लिए चुना जाता है। इन अस्थाई देशों की सदस्यता 01 जनवरी से प्रारंभ होती है। महासभा सुरक्षा परिषद के 10 अस्थाई सदस्यों को दो तिहाई बहुमत से चुनते हैं। सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य होते हैं स्थापना के समय 11 सदस्य थे (5+6 = 11) इनमें में 7 की बहुमत आवश्यक थी।1965 में 4 अस्थाई सदस्यों की वृद्धि की गई (5+10=15) इनमें 9 सदस्यों की स्वीकृति आवश्यक है।

सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य :

  1. अमेरिका
  2. ब्रिटेन
  3. चीन
  4. फ्रांस
  5. रूस

सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य :

  1. इटली
  2. बोलीविया
  3. इजिप्ट
  4. इथियोपिया (Ethiopia)
  5. जापान
  6. कजाखस्तान
  7. सेनेगल
  8. स्वीडेन
  9. यूक्रेन
  10. उरुग्वे (Uruguay)
पहले चीन स्थाई देशों की सूची में शामिल नहीं था। चीन के स्थान पर ताइवान शामिल था। जिसे 1971 में हटाकर चीन को स्थाई देशों की सूची में में शामिल किया गया। भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता प्राप्त करने के लिए सघन अभियान छेड़ा हुआ है। इन देशों की सदस्यता का निषेध करने के लिए इटली के नेतृत्व में Uniting for Consensus नामक संगठन बना है, जिसे कॉफी क्लब (Coffee Club) के नाम से भी जाना जाता है।
स्थाई सदस्य देशों को वीटो (Veto power) यानी निषेधाज्ञा का अधिकार प्राप्त है, जिसका प्रयोग कर वह किसी मुद्दे पर प्रस्ताव पारित करने या किसी कार्यवाही को आगे बढ़ने से रोक देते हैं। वीटो पावर का सबसे अधिक प्रयोग रूस के द्वारा भारत के पक्ष में हुआ है। 1954 में कश्मीर के प्रश्न पर किया था। अमेरिका ने अपनी वीटो शक्ति का प्रथम बार उपयोग रोडेशिया के प्रश्न पर मार्च 1971 में किया था। चीन ने वीटो शक्ति का प्रथम प्रयोग अगस्त 1972 में बांग्लादेश के संघ में प्रवेश के मुद्दे पर किया था।

किसी भी विधेयक को पारित होने के लिए पांच स्थाई सदस्य देशों का समर्थन आवश्यक है। यह 5 देशों में कोई भी देश यदि चाहे तो मौन या अनुपस्थित रह कर विधेयक को पारित करवा सकता है। सुरक्षा परिषद को विश्व का पुलिसमैन कहा जाता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations)

महासभा (General Assembly)

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council)

न्यासी परिषद (Trusteeship Council)

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय (United Nations Secretariat)

संयुक्त राष्ट्र संघ की विशिष्ट अभिकरण व संगठन (United Nations Special Agency and Organisations)

राष्ट्र संघ आर्थिक और सामाजिक परिषद | United Nations Economic and Social Council

राष्ट्र संघ आर्थिक और सामाजिक परिषद | United Nations Economic and Social Council

आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) संयुक्त राष्ट्र संघ का कल्याणकारी परिषद है। इसकी स्थापना 1945 में की गई। सदस्यों की संख्या स्थापना के समय 18 था, 1966 में 27 हो गया और 1973 में बढ़कर 54 हो गया, वर्तमान समय (2018) में इस परिषद में 54 सदस्य हैं। महासभा द्वारा प्रत्येक 3 वर्ष के लिए 1/3 सदस्य चुने जाते हैं और अवकाश ग्रहण करते हैं। अवकाश ग्रहण करने वाला सदस्य दोबारा चुना जा सकता है। स्थापना के समय 1946 में इस परिषद की अध्यक्षता रामास्वामी मुदालियर ने किया था। अध्यक्ष का कार्यकाल एक वर्ष के लिए होता है और उसका चयन ECOSOC के छोटे और मंझोले प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। वर्तमान (2018) में इसके अध्यक्ष Marie Chatardová है। यह चेक गणराज्य के हैं।
आर्थिक और सामाजिक परिषद की बैठक वर्ष में दो बार होता है जुलाई में जेनेवा में और अप्रैल में न्यूयॉर्क में। परिषद के कार्यों में युद्ध एवं अस्त्र-शस्त्र को छोड़कर समस्त अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषय जैसे की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य आदि विषय आते है। परिषद अपनी कार्यक्रमों और कार्यवाहियों के लिए विभिन्न आयोगों एवं संस्थाओं की सहायता लेती है जिनमें प्रमुख है :
  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)
  • आर्थिक और रोज़गार आयोग
  • जनसंख्या और यातायात आयोग
  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
  • संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त का कार्यालय (UNHCI)
  • विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) आदि

UN Women

महासभा द्वारा लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण हेतु जुलाई 2010 में UN Women नामक संगठन की स्थापना किया गया और मुख्यालय न्यूयॉर्क में बनाया गया तथा इसकी प्रमुख मिशेल बचेलेट (Michelle Bachelet) को बनाया गया। UN Women महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके आरती भेद-भाव की समाप्ति, विकाश और लाभों के वितरण में महिलाओं तथा पुरुषों के बीच समानता प्राप्ति, मानवाधिकार आदि महिला केंद्रित विषयों पर कार्य करने वाली एक नवीन संस्था है। वर्तमान में UN Women की प्रमुख अध्यक्ष Phumzile Mlambo-Ngcuka है।

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राष्ट्र संघ महासभा | United Nations General Assembly

राष्ट्र संघ महासभा | United Nations General Assembly

By Howard the Duck (Own work) via Wikimedia Commons

महासभा
को विश्व का लघु संसद कहा जाता है। इसमें प्रत्येक सदस्य देश अपने 5 प्रतिनिधि भेज सकता है पर उस राष्ट्र का वोट सिर्फ एक ही होता है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ का व्यवस्थापिका है। UNO के सभी सदस्य देश इसके सदस्य होते हैं। वर्तमान में 193 देश में सम्मलित हैं। महासभा का अधिवेशन वर्ष में एक बार सितंबर महीने तीसरे मंगलवार को प्रारंभ होता है और दिसंबर के मध्य तक चलता है। यह अधिवेशन न्यूयॉर्क में आयोजित होता है। आपातकाल की स्थिति में सुरक्षा परिषद के सिफारिश पर 24 घंटे के अंदर महासभा बैठक बुला सकती है लेकिन 15 सदस्य देशों में 9 की स्वीकृति आवश्यक है। महासभा के नियमित सत्र के लिए एक अध्यक्ष  21 उपाध्यक्ष और 7 मुख्य समितियों के अध्यक्षों का चुनाव होता है। महासभा के वर्तमान (2018) अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा हैं। महासभा की छः आधिकारिक भाषाएं हैं : अरबी, अंग्रेज़ी, चीनी, फ़्रांसीसी, रूसी, स्पेनी।

महासभा के कार्य:

(I) सुरक्षा परिषद की 10 अस्थाई सदस्यों को दो तिहाई बहुमत द्वारा चुनना।
(II) सुरक्षा परिषद की अनुशंसा पर महासचिव की नियुक्ति करना
(III) नए राष्ट्रों को सदस्यता प्रदान करना
(IV) संघ का बजट पारित करना
(V) अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करना
(VI) आर्थिक सामाजिक परिषद एवं न्यास परिषद के गठन में हिस्सा लेना आदि।

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