चालुक्य वंश - वातापी या बादामी के चालुक्य | Chalukya Dynasty - Chalukyas of Badami

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चालुक्य वंश - वातापी या बादामी के चालुक्य | Chalukya Dynasty - Chalukyas of Badami :

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By Mlpkr (Own work) [GFDL, CC-BY-SA-3.0 or CC BY-SA 2.5-2.0-1.0], via Wikimedia Commons
वातापी या बादामी के चालुक्य वंश के संस्थापक जयसिंह थे। सत्ता का केंद्र कर्नाटक स्थित बीजापुर तथा राजधानी (capital) बादामी या वातापी थी। वातापी के चालुक्य वंश के प्रमुख शासक इस प्रकार हैं–
  1. पुलकेशिन प्रथम
  2. विजयादित्य
  3. कृतिवर्मन प्रथम
  4. मंगलेश
  5. पुलकेशिन द्वितीय
  6. विक्रमादित्य
  7. विनयादित्य
  8. कीर्तिवर्मन द्वितीय
पुलकेशिन प्रथम ने अश्वमेघ यज्ञ, वाजपेई यज्ञ और हिरण्यगर्भ यज्ञ करवाया।
कृतिवर्मन प्रथम साम्राज्यवादी थे इन्होंने कदंब और कोंकण को परास्त किया। वातापी का निर्माणकर्ता कीर्तिवर्मन को माना गया है।
कृतिवर्मन प्रथम के पश्चात मगलेश शासक बना। इन्होंने बादामी में एक विष्णु मंदिर का निर्माण कराया।
इस वंश का सबसे महान शासक पुलकेशिन द्वितीय था। महाकूट स्तंभलेख से यह जानकारी मिलती है कि पुलकेशिन द्वितीय ने बहू सुवर्णा यज्ञ एवं अग्निष्टोम यज्ञ करवाया और पृथ्वी वल्लभ की उपाधि धारण किया। पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्धन को नर्मदा नदी पर परास्त कर परमेश्वर की उपाधि धारण किया। इन्होंने पृथ्वी वल्लभ एवं दक्षिणापथेश्वर की उपाधि भी धारण किया। जितेंद्र का मेगुति मंदिर पुलकेशिन द्वितीय ने बनवाया। 642 ई० में पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने पुलकेशिन द्वितीय को परास्त कर उनकी राजधानी वातापी पर अधिकार कर लिया और ऐसा माना जाता है इसी युद्ध में पुलकेशिन द्वितीय की मृत्यु हो गई। इस विजय पर नरसिंहवर्मन ने वातापीकोंड की उपाधि धारण किया।
एलोह अभिलेख का संबंध पुलकेशिन द्वितीय से है। अजंता गुहाचित्र में पुलकेशिन द्वितीय को फारसी दूत-मंडल का स्वागत करते हुए दिखाया गया है। पुलकेशिन द्वितीय के सामंत गंगराज दुर्विनीत ने शब्दावतार नमक व्याकरण ग्रंथ की रचना किया।
विक्रमादित्य द्वितीय के शासनकाल में दक्कन में अरबों का आक्रमण हुआ इस आक्रमण का मुकाबला विक्रमादित्य के भतीजा पुलकेशिन ने किया इस अभियान की सफलता पर विक्रमादित्य द्वितीय ने पुलकेशिन को अवनिजनाश्रय की उपाधि प्रदान किया। विक्रमादित्य की प्रथम पत्नी लोकमहादेवी ने पट्टदकल में विश्वपाक्षमहादेव मंदिर तथा दूसरी पत्नी त्रैलोक्य देवी ने त्रलोकेश्वर मंदिर का निर्माण करवायी।
विजयादित्य के द्वारा वातापी में शिव मंदिर का निर्माण करवाया गया। यह मंदिर संगमेश्वर की मंदिर के नाम से विख्यात है।
चालुक्य वंश के अंतिम शासक कृतिवर्मन तृतीय था। इसे इनके सामंत दंतिदुर्ग ने परास्त कर चालुक्य वंश पर आधिपत्य कायम कर लिया और नए वंश राष्ट्रकूट वंश की स्थापना किया।

चालुक्य की अन्य शाखाएं

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