चालुक्य वंश - वातापी या बादामी के चालुक्य | Chalukya Dynasty - Chalukyas of Badami - BHARAT GK - GK in Hindi

13 November 2017

चालुक्य वंश - वातापी या बादामी के चालुक्य | Chalukya Dynasty - Chalukyas of Badami

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चालुक्य वंश - वातापी या बादामी के चालुक्य | Chalukya Dynasty - Chalukyas of Badami :

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वातापी या बादामी के चालुक्य वंश के संस्थापक जयसिंह थे। सत्ता का केंद्र कर्नाटक स्थित बीजापुर तथा राजधानी बादामी या वातापी थी।

प्रमुख शासक

  1. पुलकेशिन प्रथम
  2. कृतिवर्मन प्रथम
  3. मंगलेश
  4. पुलकेशिन द्वितीय
  5. विजयादित्य
  6. विक्रमादित्य
  7. विनयादित्य
  8. कीर्तिवर्मन द्वितीय

कृतिवर्मन प्रथम

पुलकेशिन प्रथम ने अश्वमेघ यज्ञ, वाजपेई यज्ञ और हिरण्यगर्भ यज्ञ करवाया।
कृतिवर्मन प्रथम साम्राज्यवादी थे इन्होंने कदंब और कोंकण को परास्त किया। वातापी का निर्माणकर्ता कीर्तिवर्मन को माना गया है। कृतिवर्मन को वातापी का निर्माण करता माना जाता है इन्होंने उत्तरी कोंकण के मौर्यों वनवासी, वनवासी के कदम्बों और दक्षिण मैसूर के नल को युद्ध में पराजित किया था। कृतिवर्मन की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र पुलकेशिन द्वितीय के छोटे होने के कारण इसका भाई मगलेश शासक बना। इन्होंने बादामी में एक विष्णु मंदिर का निर्माण कराया। मंगलेश के बाद पुलकेशिन द्वितीय शासक बना।

पुलकेशिन द्वितीय

इस वंश का सबसे महान शासक पुलकेशिन द्वितीय था। महाकूट स्तंभलेख से यह जानकारी मिलती है कि पुलकेशिन द्वितीय ने बहू सुवर्णा यज्ञ एवं अग्निष्टोम यज्ञ करवाया और पृथ्वी वल्लभ की उपाधि धारण किया। पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्धन को नर्मदा नदी पर परास्त कर परमेश्वर की उपाधि धारण किया। इन्होंने पृथ्वी वल्लभ एवं दक्षिणापथेश्वर की उपाधि भी धारण किया। जितेंद्र का मेगुति मंदिर पुलकेशिन द्वितीय ने बनवाया। 642 ई० में पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने पुलकेशिन द्वितीय को परास्त कर उनकी राजधानी वातापी पर अधिकार कर लिया और ऐसा माना जाता है कि इसी युद्ध में पुलकेशिन द्वितीय की मृत्यु हो गई। इस विजय पर नरसिंहवर्मन ने वातापीकोंड की उपाधि धारण किया।
एलोह अभिलेख का संबंध पुलकेशिन द्वितीय से है। अजंता गुहाचित्र में पुलकेशिन द्वितीय को फारसी दूत-मंडल का स्वागत करते हुए दिखाया गया है। पुलकेशिन द्वितीय के सामंत गंगराज दुर्विनीत ने शब्दावतार नमक व्याकरण ग्रंथ की रचना किया।

विक्रमादित्य द्वितीय

विक्रमादित्य द्वितीय के शासनकाल में दक्कन में अरबों का आक्रमण हुआ। इस आक्रमण का मुकाबला विक्रमादित्य के भतीजा पुलकेशिन ने किया। इस अभियान की सफलता पर विक्रमादित्य द्वितीय ने पुलकेशिन को अवनिजनाश्रय की उपाधि प्रदान किया। विक्रमादित्य की प्रथम पत्नी लोकमहादेवी ने पट्टदकल में विश्वपाक्षमहादेव मंदिर तथा दूसरी पत्नी त्रैलोक्य देवी ने त्रलोकेश्वर मंदिर का निर्माण करवायी।

विजयादित्य

विजयादित्य के द्वारा वातापी में शिव मंदिर का निर्माण करवाया गया। यह मंदिर संगमेश्वर की मंदिर के नाम से विख्यात है।

कृतिवर्मन द्वितीय

चालुक्य वंश के अंतिम शासक कृतिवर्मन द्वितीय था। इसे इनके सामंत दंतिदुर्ग ने परास्त कर चालुक्य वंश पर आधिपत्य कायम कर लिया और नए वंश राष्ट्रकूट वंश की स्थापना किया।
चालुक्य की अन्य शाखाएं :
चालुक्य वंश - पश्चिमी चालुक्य या कल्याणी का चालुक्य | Chalukya Dynasty - Chalukya of Kalyani
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