उत्प्रेरण | catalysis

उत्प्रेरण | catalysis :

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जब किसी पदार्थ की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया की दर परिवर्तित हो जाए उसे उत्प्रेरण (catalysis) कहा जाता है तथा जिस पदार्थ की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया की दर परिवर्तित हो लेकिन स्वयं अपरिवर्तित रहे तो ऐसे पदार्थों को उत्प्रेरक (catalyst) कहा जाता है।
यदि उत्प्रेरक एवं अभिकारक दोनों समान अवस्था में हो तो उन्हें समांगी उत्प्रेरण करते हैं।
जब रसायनिक अभिक्रिया में उत्प्रेरण की अवस्था अभीकारकों से भिन्न हो विसमांगी उत्प्रेरण कहलाता है।
जब किसी पदार्थ की उपस्थिति से रासायनिक अभिक्रिया बढ़ जाए तो उसे धनात्मक उत्प्रेरण कहते है।
जब किसी पदार्थ की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया की दर घट जाए तो उन्हें ऋणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं।
जब रासायनिक अभिक्रिया में बना कोई उत्पाद उस अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरण का कार्य करें तो उसे सह-उत्प्रेरण कहते हैं।
जो पदार्थ स्वयं किसी उत्प्रेरक की उत्प्रेरण क्षमता को कम या  नष्ट कर दे या नष्ट कर दे तो उसे उत्प्रेरण विष कहते कहते है।
वह पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक ना हो लेकिन अपनी उपस्थिति के कारण रासायनिक अभिक्रिया को बढ़ा दे उन्हें हम वर्धक (Promoter) कहते हैं।
जिन रासायनिक अभिक्रिया में उष्मा उत्सर्जित हो उसे ऊष्माक्षेपी कहते हैं। चारकोल का दहन ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। इनके दहन से 395 kg जूल प्रति मोल उष्मा निकलती है।
रसायनिक अभिक्रिया में उष्मा का अवशोषण उस्मा रोधी अभिक्रिया कहलाता है। नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन के संयोग से नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण ऊष्मा रोधी अभिक्रिया है।

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