भारत मे हिन्द-यवन का राज्य | Indo-Greek Kingdom


भारत मे हिन्द-यवन का राज्य | Indo-Greek Kingdom :

सिकंदर महान का सेनापति सेल्यूकस ने सर्वप्रथम पश्चिमी तथा मध्य एशिया में अपने आक्रमणों कब द्वारा विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
सेल्यूकस द्वितीय के उत्तराधिकारी एण्टियोकस प्रथम ने यूनानी साम्राज्य को सुदृढ़ रखा। एण्टियोकस द्वितीय के समय भारत के अनेक प्रांत स्वतंत्र हो गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख उत्तर-पश्चिम अफगानिस्तान का बल्ख या बैक्ट्रिया था।
डिओडोटस प्रथम शक्तिशाली शासक हुआ इनका सेनापति डेमेट्रियस ने भारत पर आक्रमण किया। इनका शासनकाल 205 से 170 ईसापूर्व रहा। डेमेट्रियस का छोटा भाई अपोलोडोटस कुछ समय तक भारत पर शासन किया लेकिन यूनान का भारतीय क्षेत्र का वास्तविक संस्थापक डेमेट्रियस का दामाद या सेनापति मिनांडर हुआ। इन्होंने 170 से 150 ईसापूर्व तक शासन किया। इन्होंने सर्वप्रथम बाजोर यानी पेशावर पर आधिपत्य कायम किया और अपनी राजधानी शाकल को बनाया। शाकल का आधुनिक नाम सियालकोट है। मिनांडर शक्तिशाली शासक थे। इनका  साम्राज्य सिंधु से यमुना तक फैला था। मिनांडर के सिक्कों पर धर्म चक्र का चिन्ह मिलता हैे। मिनांडर ने शुंग शासक वसुमित्र के साथ सिंधु नदी के तट पर युद्ध किया पर हार का सामना करना पड़ा। 
नागसेन द्वारा रचित बौद्ध ग्रंथ मिलिंदपन्हो मिनांडर द्वारा नागसेन से पूछे गए प्रश्न एवं नागसेन द्वारा मिनांडर के प्रश्नों के दिए गए उत्तर का संकलन है।
बौद्ध भिक्षु नागसेन से प्रभावित होकर मिनांडर ने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया। मिलिंदपन्हों में मिनांडर को महान दार्शनिक बताया गया है। मिनांडर ने भारत में सोने का सिक्का चलाया।
मिनांडर की मृत्यु के पश्चात इनका पुत्र स्ट्रेटो प्रथम (Strato I) शासक बना अल्पवयस्क होने के कारण मां Agathokleia सत्ता संभाली।
स्ट्रेटो द्वितीय के समय शासन काफी कमजोर हो गया गया और Antialcidas ने स्ट्रेटो द्वितीय को परास्त कर सत्ता पर आधिपत्य कायम कर लिया। Antialcidas ने अपना राजदूत हेलियोडोरस को शुंग शासक भागवत या भागभद्र के दरबार में भेजा। हेलियोडोरस भागवत धर्म को स्वीकार किया और विदिशा में गरुड़ स्तंभ का निर्माण का निर्माण करवाया। भागवत धर्म को स्वीकार करने वाला पहला विदेशी शासक हेलियोडोरस था। हेलियोडोरस ने ही विदिशा में विष्णु मंदिर के सामने ध्वज स्तंभ का निर्माण करवाया। अंतिम यवन शासक हर्मियस थे। हर्मियस के पश्चात शक का आधिपत्य कायम हो गया।

यूनानि आक्रमण का भारत पर प्रभाव :

1. भारत में गंधार शैली का विकास हुआ।
2. सांचा में ढाला गया मुद्रा का प्रचलन प्रारंभ हुआ।
3. लेख युक्त मुद्रा प्रारंभ हुआ।
4. ज्योतिष विद्या, खगोल विद्या यूनानियों की देन है।
5. संस्कृत नाटक में यवनिका शब्द यूनानियों की देन है।
6. स्याही और कलम भी यूनानियों की ही देन है।
यूनान के पश्चात शकों का भारत पर आधिपत्य कायम हो गया।


भारत में शकों का राज्य | Shaka kingdom in india

Post a Comment

0 Comments