September 2017 - BHARAT GK - GK in Hindi

24 September 2017

जनजाति समाज | Tribal society : भारत तथा विश्व की प्रमुख जनजातियां

जनजाति समाज | Tribal society :

संविधान के 89वाँ संसोधन (2013) के द्वारा एक राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (अनुच्छेद 338-क) की स्थापना की गई। प्रथम अध्यक्ष यू. एस. ढेबर को बने।
जनजातिय विकाश विभाग के अनुसार भारत में 638 जनजातियां है। भारत मे विश्व की सर्वाधिक जनजातियां निवास करती है।
Janjati, tribe
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 366 (25) जिसके अनुसार जनजाति से तात्पर्य में जनजातीय समुदायों के  अंश या समूह से है जो संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजातियों के रूप में माने गए हैं।
सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति मध्यप्रदेश ( 1,53,16784 ) में निवास करती है जबकि मिजोरम सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या प्रतिशत (94.4% ) वाला राज्य है।
थारू जनजाति में संयुक्त परिवार की परंपरा होती है।
भारत की सबसे बड़ी जनजाति गोंड है।
शोम्पेन जनजाति निकोबार द्वीपसमूह में पाई जाती है।
थारू जनजाति दीपावली को शोक त्योहार के रुप में मानती है।
हो, उरांव तथा मुंडा जनजातियों में धार्मिक पुरुषों को पाहन कहा जाता है जबकि छत्तीसगढ़ के गोंड इन्हें बैगा, केरल के कन्निकर तथा उराली इन्हें प्लाथि कहते है।
संथाली जनजाति पुजारी को नायक कहते है।
ठक्करबापा को आदिवासियों का मसीहा कहा जाता है।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में अनुसूचित जनजातियों की संख्या 10,42,81,034 है जो कि देश की कुल जनसंख्या का 8.6% है।
भारत की सबसे प्राचीन जनजाति गोंड है।


भारत की प्रमुख जनजातियाँ

राज्य
जनजातियां
आंध्र प्रदेश
चेन्चुस, कौढस सावरा, गदवा, गोंड आदि।
अरुणाचल प्रदेश
सुलुंग, मिश्मी, मोम्पा, डाबला, मिनयोंग, मिरिगेलौंग, अपतनी, मेजी आदि।
असम
राभा, दिमारा, कोछारी वोडो, मिकिर, आओ, अबोर, नागा, लुसाई आदि।
राजस्थान
सांसी, मीणा, सहरिया, भील, बंजारा, कोली, गरासिया आदि।
सिक्किम
लेपचा
ओडिशा
चेंचू, ओराँव, कोल, गोंड, सोंड, हो, जुआंग, खरिया, भुइया, संथाल आदि।
नागालैंड
अंगामी, मिकिर, नागा, नबुई नागा आदि।
मिजोरम
मीजो,, कुकी, चकमा, लाखर, लुशाई, पावो आदि।
मणिपुर
कुकी, मैटी, नागा, अंगामी आदि।
मेघालय
जयन्तिया, मिकिर, गारो, खासी आदि
झारखंड
संथाल, मुंडा, बिरहोर, हो, कोरबा, असुर, ओराँव, भुइया, भूमिज, सौरिया, गोंड आदि।
मध्य प्रदेश
बंजारा, गोंड, भील, मुण्डा, कोल, अबूझमाड़िया, लमबाडी, मुरिया, गोंड खेरवार वैगा आदि।
जम्मू कश्मीर
लद्दाखी, बक्करवाल, गुज्जर, गद्दी आदि।
केरल
मोपला, इरुला, पनियान, उराली, कदर आदि।
गुजरात
कोली, तोड़िया, बंजारा, डाफर, पटेलिया, भील आदि।
हिमाचल प्रदेश
कानोरा, लाहौली, गड्डी या गुड्डी आदि।
तमिलनाडु
टोडकोटा, कोटा, बड़गा, टोडा (नीलगिरी पहाड़ी की मूल जनजाति)।
महाराष्ट्र
कोली, बंजारा, गोंड, चितपावन, बारली, अम्बुम्फमड़िया आदि।
त्रिपूरा
चकमा, त्रिपुरी, लुशाई, रियांग आदि।
पश्चिम बंगाल
लोघा, संथाल, भूमिज, लेपचा (दार्जलिंग क्षेत्र में) आदि।
उत्तराखंड
कोय, भोट या भोटिया ( गढ़वाल तथा कुमाई क्षेत्र मे ), थारू, नीति, मारा आदि।

विश्व की प्रमुख जनजातियां

जनजाति
संबंधित देश / क्षेत्र
रेड इंडियन
उतरी अमेरिका (कनाडा)
सेमांग
मलेशिया
हाउसा
नाइजीरिया
नीग्रो
मध्य अफ्रीका
फलाह
मिस्र
वेद्दास
श्री लंका
द्रविड़
दक्षिण भारत, अलास्का तथा पूर्वी साइबेरिया
मसाई
पूर्वी अफ्रीका (कीनिया), पूर्वी युगांडा, उत्तरी तंजानिया
चोनो
दक्षिणी चिली
माओरी
न्यूजीलैंड
बिन्दिबू
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया
खिरगीज
मध्य एशिया
बेम्बा
जांबिया
एस्किमो
ग्रीनलैंड, कनाडा
आरापाहो
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका
बोरो
ब्राज़ील
बुशमैन
कालाहारी मरुस्थल (बोत्सवाना)
पिग्मीज
कांगो बेसिन, विषुवत रेखा - अफ्रिका के बौने लोग
आइनू
जापान
मंगोल
मंगोलिया के मूल निवासी
हैदा
अमेरिका
लाई
म्यानमार
इकांथा
दक्षिण अफ्रीका
जवानी
जावा (इंडोनेशिया)
डोगा
अंगोला
इफुगाओ
ल्युजो द्वीप
मुंडूगूमोर
पापुआ न्यू गिनी
हुतू
जायरे रवांडा तथा बरूण्डी
हुपा
कैलिफोर्निया

अम्ल, क्षार एवं लवण | Acids, Bases and Salt

अम्ल क्षार एवं लवण | Acids, bases and salt :

अम्ल की परिभाषा : आरहेनियस के अनुसार "अम्ल ऐसा यौगिक है जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H+) देता है"।
अम्ल क्षार एवं लवण | Acids bases and salt
Brønsted-Lowry acid–base theory के अनुसार "अम्ल अन्य पदार्थ के साथ मिलकर प्रोटॉन का त्याग करता है।"
Lewis acids and bases सिद्धांत के अनुसार "अम्ल इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करता है।"
रॉबर्ट बॉयल के अनुसार "अम्ल का स्वाद खट्टा होता है, यह नीला लिटमस पेपर को लाल कर देता है तथा क्षार के साथ मिलकर लवण तथा जल का निर्माण करता है।"

अम्ल तथा उनके स्त्रोत :

स्त्रोत
अम्ल
नींबू नारंगी तथा संतरा
सिट्रिक अम्ल
सिरका तथा अचार
एसिटिक अम्ल
दूध
लैक्टिक अम्ल
मक्खन
ब्यूटेरिक एसिड
इमली तथा अंगूर
टार्टरिक अम्ल
लाल चीटी
फार्मिक अम्ल
चाय
टैनिक अम्ल
चींटी के डंक में
मैथेनॉइक अम्ल
सोडा वाटर
कार्बनिक अम्ल
टमाटर
ऑक्सेलिक अम्ल

अम्ल के उपयोग (Uses of acid) –


  • सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग संचायक सेल में होता है।
  • कपड़ा से जंग के दाग धब्बे हटाने के लिए ऑक्जेलिक अम्ल का प्रयोग किया जाता है।
  • लोहे पर जस्ते की परत चढ़ाने (galvanising) से पहले उसे H2SO4 एवं NHO3 से साफ किया जाता है।
  • NHO3 का उपयोग गहनों की सफाई में किया जाता है।
  • NHO3 का उपयोग धातुओं के ऊपर खुदाई करने में रंग उर्वरक विस्फोटक दवाई इत्यादि बनाने में भी होता है।
  • HCL खाना पचाने में सहायक होता है जो हमारे अमाशय की ग्रंथियों से स्रावित होता है।
  • HCL का उपयोग स्टार्च से ग्लूकोज बनाने में उत्प्रेरक रूप में होता है।

★ सभी खनिज अम्ल जैसे HCL, S2SO4 और NHO3 प्रबल ऑक्सीकारक अम्ल है तथा कार्बनिक अम्ल जैसे, साइट्रिक एसिड, फार्मिक एसिड, ऐसीटिक एसिड दुर्बल अम्ल में आते हैं।
★ सभी अम्ल में हाइड्रोजन समान रुप से विद्यमान होता हैं।
H2SO4 को रसायन का राजा कहा जाता है।
★ अम्लराज (Aqua regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल (3:1) का मिश्रण है, इस अम्ल में सोना तथा प्लेटिनियम भी घुल जाता है।
★ कार्बन डाइऑक्साइड जल में घुलकर कार्बनिक अम्ल का निर्माण करती है।
★ आयल ऑफ़ विड्रॉल S2SO4 को कहा जाता है।
★ ग्लाइकोलिसिस में विघटन के फलस्वरुप एक ग्लूकोज अनु में दो पयरुविक अम्ल बनते हैं।
★ कॉपर सल्फेट का जलीय विलयन अम्लीय होता है।
★ मूत्र में यूरिक अम्ल की मात्रा 0.5% होती है। यूरोक्रोम के कारण मूत्र का रंग पीला होता है तथा अमोनिया के कारण इसमें गंध होता है।
★ सर्वाधिक अम्लीय वर्षा नार्वे में होती है। 
★सॉफ्ट ड्रिंक में कार्बोलिक अम्ल मिलाने के कारण सुरसुराहट की आवाज होती है।
★Gibberellic acid को पादप वृद्धि अम्ल तत्व कहा जाता है।
★ अम्ल तथा भस्म की प्रतिक्रिया से लवन का निर्माण होता है।
★सोडियम क्लोराइड (NaCl) साधारण नमक है, इस नमक को टेबल सॉल्ट भी कहा जाता है। टेबल साल्ट का निर्माण HCL और सोडियम हाइड्रोक्साइड के प्रतिक्रिया से बनता है ।
★ जो अम्ल अधिक मात्रा में हाइड्रोजन आयन उत्पन्न करता है, उसे प्रबल अम्ल कहा जाता है और जो अम्ल कम मात्रा में हाइड्रोजन आयन उत्पन्न करता है, उन्हें दुर्बल अम्ल कहा जाता है।
★ जिस अम्ल में हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन दोनों के परमाणु उपस्थित हो उसे आक्सी-अम्ल कहा जाता हैं। जैसे- सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड।
★ अकार्बनिक अम्ल के साथ धातु की प्रतिक्रिया होने पर हाइड्रोजन गैस निकलती है।
★ अम्लों में सबसे शक्तिशाली अपचायक नाइट्रिक एसिड (HNO3) है।

अम्लों के रासायनिक गुण :

अम्ल धातु आक्साइडों के साथ क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं।
{\displaystyle \mathrm {CaO+2\ HCl\longrightarrow \ CaCl_{2}+\ H_{2}O} }

एम्फोटेरिक आक्साइडों के साथ क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं।

{\displaystyle \mathrm {ZnO+2\ HNO_{3}\longrightarrow \ Zn(NO_{3})_{2}+\ H_{2}O} }
क्षारों के साथ क्रिया करके लवण व जल बनाते हैं (उदासीनीकरण अभिक्रिया)
{\displaystyle \mathrm {NaOH+\ HCl\longrightarrow \ NaCl+\ H_{2}O} }

अघुलनशील क्षारों के साथ क्रिया करके लवन और जल बनाते हैं।

{\displaystyle \mathrm {Cu(OH)_{2}\downarrow +\ H_{2}SO_{4}\longrightarrow \ CuSO_{4}+2\ H_{2}O} }

लवणों के साथ क्रिया

{\displaystyle \mathrm {BaCl_{2}+\ H_{2}SO_{4}\longrightarrow \ BaSO_{4}\downarrow +2\ HCl\uparrow } }

शक्तिशाली अम्ल, कमजोर अम्लों के मूलकों को विस्थापित कर देते हैं।

{\displaystyle \mathrm {K_{3}PO_{4}+3\ HCl\longrightarrow 3\ KCl+\ H_{3}PO_{4}} }
{\displaystyle \mathrm {Na_{2}CO_{3}+2\ HCl\longrightarrow 2\ NaCl+\ H_{2}O+\ CO_{2}\uparrow } }
(इस क्रिया में अस्थायी कार्बोनिक अम्ल {\displaystyle ~H_{2}CO_{3}} का निर्माण होता है जो तुरन्त पानी और कार्बन डाईआक्साइड में टूत जाता है।)

धातुओं के साथ क्रिया

{\displaystyle \mathrm {Mg+2\ HCl\longrightarrow \ MgCl_{2}+\ H_{2}\uparrow } }
नाइट्रिक अम्ल और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल क्रिया अलग प्रकार से होती है-
{\displaystyle \mathrm {Mg+2\ H_{2}SO_{4}\longrightarrow \ MgSO_{4}+\ SO_{2}\uparrow +2\ H_{2}O} }
। कार्बनिक अम्ल, अल्कोहल के साथ क्रिया करके इस्टर और जल बनाते हैं। इसे इस्टरीकरण क्रिया कहते हैं।
{\displaystyle \mathrm {R_{1}-COOH+\ R_{2}-OH\longrightarrow \ R_{1}-COO-R_{2}+\ H_{2}O} }
उदाहरण
{\displaystyle \mathrm {CH_{3}COOH+\ C_{2}H_{5}OH\longrightarrow \ CH_{3}COOC_{2}H_{5}+\ H_{2}O} }

क्षार (Base)

क्षार की परिभाषा : क्षार वे पदार्थ है जो अम्ल के साथ मिलकर जल और लवन बनाते हैं।
आरहेनिअस के अनुसार "क्षार वह पदार्थ है जो जलीय घोल में हाइड्रोक्साइड आयन (OH−) देता है।"
ब्रान्स्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार "क्षार वह पदार्थ है जो किसी अम्ल से प्रोटॉन ग्रहण कर सकता है।"
लुइस के इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत के अनुसार "क्षार वह पदार्थ हैं जिसमें इलेक्ट्रॉनिक की निर्जन जोड़ी प्रदान की क्षमता होती होती है।"

क्षार के उपयोग | Uses of base :


  • Mg(OH)2 ( मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड) या मिल्क ऑफ मैग्नीशिया एवं Al(OH)3 (एल्यूमीनियम हाइड्रोक्साइड) का उपयोग पेट की अम्लीयता को दूर करने में किया जाता है इसीलिए इसे प्रतिअम्ल भी कहते हैं।
  • Ca(OH)2 ( कैल्शियम हाइड्रोक्साइड ) या बुझा हुआ चूना का उपयोग दीवारों की पुताई में, गारा एवं प्लास्टर बनाने में, ब्लीचिंग पाउडर बनाने में, खारे जल को मृदु बनाने में, चमड़े के ऊपर के बाल को साफ करने में, अम्लीय के जलन पर मरहम के रूप में क्या जाता है।
  • KOH ( पोटेशियम हाइड्रोक्साइड ) या कास्टिक पोटाश का उपयोग प्रयोगशाला में अतिक्रमण के रूप में मुलायम साबुन बनाने में तथा CO2 एवं SO2 गैसों की अवशोषक के रूप में होता है।
  • NaOH ( सोडियम हाइड्रोक्साइड ) या कास्टिक सोडा का उपयोग साबुन बनाने में, कपड़ा एवं कागज बनाने में, दवा बनाने में, पेट्रोलियम को साफ करने में किया जाता है।
  • CaO ( कैल्शियम ऑक्साइड ) या कली चुना का उपयोग कास्टिक सोडा, सोडियम कार्बोनेट, शीशा, ब्लीचिंग पाउडर बनाने एवं खाने के रूप में किया जाता है।

लवन (Salt) 

लवण की परिभाषा : अम्ल एवं क्षार की प्रतिक्रिया के फलस्वरुप बने पदार्थ को लवन कहा जाता है।

लवन के उपयोग :


  • K2SO2.AL2(SO4)3.24H2O (फिटकरी या पोटास एलम) का उपयोग एंटीसेप्टिक के रूप में, रंगाई में, अशुद्ध जल को शुद्ध करने में किया जाता है।
  • CuSO4 का उपयोग कवकनाशी के रूप में, विद्युत लेपन, में रंगाई एवं छपाई में किया जाता है।
  • NaCl (साधारण नमक) का उपयोग भोजन में, क्लोरीन, HCL, धोवन सोडा, कास्टिक सोडा इत्यादि बनाने में किया जाता है।
  • NaHCO3 (खाने वाला सोडा) का उपयोग पेट की अम्लीयता को दूर कम करने एवं अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।
  • Na2CO3 (धोवन सोडा) का उपयोग कपड़ो की धुलाई तथा कांच बनाने में किया जाता है।
  • KNO3 का उपयोग बारूद बनाने में तथा उर्वरक के रूप में होता है।

pH मान | pH values :

किसी घोल में अम्ल तथा क्षरकता को व्यक्त करने के लिए 1909 में डेनिश रसायनशास्त्री सॉरेनसेन ने pH मान खोज किया।
अम्लीय विलयन का pH मान 7 से कम होता है तथा क्षारीय घोल का पीएच मान 7 से अधिक से अधिक होता है। सबसे कम पीएच मान S2SO4 (0) होता है। सबसे अधिक pH मान सोडियम हाइड्रोक्साइड (14) का होता है। pH मान 0 से 14 तक होता है। जल का pH मान 7 होता है जिसके कारण जल उदासीन होता है। जल की प्रवृत्ति उभयधर्मी होती है। सबसे शुद्ध जल वर्षा का जल (प्राकृतिक) तथा डिस्टिल वाटर (कृत्रिम) होता है। अम्लीय वर्षा में सल्फर डाइऑक्साइड (S2O) और NO2 होता है।

pH मान सूची :

पदार्थ
pH values
नींबू
2.2
सिरका
2.4
शराब
2.8
समुद्री जल
8.4
रक्त ( blood )
7.4
लार
6.5
दूध ( milk )
6.4
स्टमक
7.8
छोटी आत
7.5

लिटमस पत्र

अम्ल एवं क्षार के विलियन को पहचानने के लिए लिटमस पत्र का उपयोग किया जाता है। लिटमस पत्र जो प्रयोगशाला में उपयोग होता है वह रॉसेला नामक लाइकेन से प्राप्त होता है। जहां अम्ल नीला लिटमस को लाल कर देता है वही क्षार लाल लिटमस को नीला कर देता है। अम्ल का स्वाद खट्टा होता है जबकि छार का स्वाद कड़वा होता है।

21 September 2017

गैसों के नियम | Laws of gas



1738 में डैनियल बर्नोली ने हाइड्रोडायनामिका (Hydrodynamica) में गैस के अणुगति सिद्धान्त का नियम (kinetic theory of gases) दिया तथा इसकी पुष्टि James Clerk Maxwell, Rudolf Clausius एवं Kronig ने किया। बरनोली के अनुसार "सभी गैसें छोटे-छोटे कणों से बने होते हैं" इन कणों को उन्होंने अणु का नाम दिया। गैस का प्रत्येक अणु एक समान होते हैं और सभी दिशा में गतिशील होते हैं, गैसों के बीच अंतर आण्विक बल नहीं होता है, गैसों की अणु औसत गतिज ऊर्जा उनके परम ताप केे समानुपाती होता है, गैस के अणुओं को यदि बर्तन की दीवारों से टकराते हैं तो इनके कारण गैस दाब उत्पन्न होता है।
  • गैस की गति को तीन प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं-
1. औसत गति (Average speed)- गैसों की सभी अणुओं की गति के अंकगणितीय औसत को औसत गति कहते हैं।
2. मूल गति (Basic speed)- अनुओं की गति की औसत वर्गमूल को मूल-मध्यवर्ग गति कहते हैं।
3. अति संभाव्य गति (High potential speed)- किसी ताप पर सबसे अधिक अणुओं द्वारा धारित गति को अति संभाव्य गति कहते हैं।

बॉयल का नियम (Boyal's law)- 1662 में बॉयल ने बताया की "स्थिर ताप पर गैस के निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional) होता है" यानी बॉयल के अनुसार स्थित ताप पर गैस का दाब बढता है और आयतन घटता है और दाब के घटने से आयतन बढ़ता है।
चार्ल्स का नियम (Charles's law)- 1787 में चार्ल्स डार्विन ने बताया कि "स्थिर दाब पर किसी गैस किसी गैस के निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती होता है"।
आवोगर्दो का नियम (Avogadro's law)- आवोगर्दो ने बताया कि "समान ताप एवं दाब पर सभी गैसें समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है" यह परिकल्पना 1811 में इटली के रसायनशास्त्री आवोगर्दो द्वारा बर्जीलियस की परिकल्पना को संशोधन करके दिया गया।
Gay-Lussac's law- गैसीय आयतन संबंधी नियम दिया अथार्थ गैसों के आयतन के पारस्परिक अनुपात संबंधी रासायनिक संयोग का नियम Gay-Lussac ने दिया। Gay-Lussac के अनुसार "स्थिर आयतन पर किसी निश्चित मात्रा वाली गैस का दाब उनके उनके आयतन के समानुपाती होता है"।
स्थिर ताप और दाब गैसों के मिश्रण की गतियां उनके घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। गैसों का अणुभार उनके वाष्प दाब का दोगुना होता है।
डाल्टन का नियम या डाल्टन का आंशिक दाब का नियम (Dalton's law or Dalton's law of partial pressures)-  गैसों के आंशिक दाब का नियम 1801 में डाल्टन ने दिया।इस नियम के अनुसार, परस्पर क्रिया न करने वाली गैसों का कुल दाब उन गैसों के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है। यह नियम आदर्श गैसों पर लागू होता है।
गैस का अणुभार उनकी वाष्प घनत्व का दोगुना होता है।
जिस ताप पर गैसों का अणु गति करना बंद कर दें उस ताप को परम शून्य ताप (Absolute zero) कहा जाता है। परम शून्य ताप का मान –273.15 डिग्री सेल्सियस होता है।
ग्राहम बेल का गैसीय विसरण नियम (Graham's law of effusion or Graham's law of diffusion)- नियत ताप एवं दाब पर गैसों के विसरण की आपेक्षिक गतियां उसके घनत्व अथवा अणुभार के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
ग्राहम बेल ने 1833 में बताया कि सामान्य ताप और दाब पर विभिन्न गैसों के 1 ग्राम अनु का आयतन 22.4 लिटर होता है तथा इस 22.4 लीटर में 6.022×10²³ अणु होते है।
–273 डिग्री पर सभी गैस आयतन घेरती है। चार्ल्स के नियम के अनुसार –273 डिग्री परम शून्य ताप पर गैस का आयतन शून्य हो जाना चाहिए परंतु सभी वास्तविक गैसें इस ताप तक पहुंचने से पहले ही द्रवित हो जाती है।
गैसों का विसरण- घनत्व में अंतर रहते हुए पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध गैसों की आपस में मिलने जुलने की स्वभाविक प्रक्रिया विसरण (diffusion) कहलाती है।

बायो गैस - बायोगैस का मुख्य संघटक मीथेन (65%) गैस  है। घरेलू इंधन में मीथेन का उपयोग होता है इसे मार्श गैस भी कहा जाता है।
ओजोन गैस (O3)- ओजोन गैस पृथ्वी की रक्षा कवच की तरह कार्य करता है ये सूर्य से हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर इस हानिकारक किरण पृथ्वी पर जीवों की रक्षा करती है। क्लोरो फ्लोरो कार्बन के कारण ओजोन परत का क्षय हो रहा है।
लाफिंग गैस (N2O)- लाफिंग गैस नाइट्रस ऑक्साइड को सूंघने से उत्तेजना उत्पन्न होती है और हंसी आने लगती है अतः इस गैस को हास्य गैस भी कहा जाता है प्रयोगशाला में नाइट्रस ऑक्साइड गैस अमोनियम नाइट्रेट को गर्म करके अथवा सोडियम नाइट्रेट और अमोनियम सल्फेट के मिश्रण को 200 डिग्री सेंटीग्रेट पर गर्म करके बनाया जाता है।
प्राकृतिक गैस- प्राकृतिक गैस हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है इसका प्रयोग इंधन के तौर पर किया जाता है।
प्रोड्यूसर गैस (CO+N2)- प्रोड्यूसर गैस का उपयोग ईंधन की रूप में लोहे तथा काँच की भट्ठियों, भभकों और गैस इंजनों को गरम करने में किया जाता है। कोयले के उत्तापदीप्त तल पर भाप और वायु के मिश्रण के प्रवाह से प्रोड्यूसर गैस बनती है। इसमें कार्बन मोनोक्साइड, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइ-आक्साइड और मेथेन रहते हैं।
ट्यूब के अंदर अक्रिय गैस आर्गन के साथ पारे के वाष्प साथ बहुत कम दाब पर भरी होती है।
द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG)- द्रवित पेट्रोलियम गैस का प्रमुख संगठन आइसो ब्यूटेन और प्रोपेण है। इसका उपयोग घरेलू ईंधन हेतु किया जाता है । LPG के रिसाव के पहचान हेतु इस में दुर्गंध युक्त पदार्थ मिथाइल मरकैप्टन मिलाया जाता है।
वाहन प्रदूषकों में सबसे प्रदूषक कार्बन मोनो ऑक्साइड एवं लेड है।