भारतीय संसद | Parliament of India - BHARAT GK

27 September 2019

भारतीय संसद | Parliament of India

भारतिय संसद

संसद भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 में वर्णन है कि भारत की संसद दोनों सदनों, राज्य सभा और लोक सभा से मिलकर बनी है। अनुच्छेद 80 के तहत संसद मंत्रिपरिषद के क्रियाकलापों पर नजर रखती है। संसद का मुख्य कार्य मंत्री परिषद की रचना करना और उसे उत्तरदाई ठहराना है। किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करने का अधिकार संसद को है। संसद को वित्तीय अधिकार प्राप्त है जिससे होने वाले व्यय की जानकारी संसद को देना अनिवार्य है। संसद के दो सदन हैं -
  • उच्च सदन या राज्यसभा (Council of State)
  • निम्न सदन या लोकसभा (House of the people)

राज्य सभा (Council of state)

उच्च सदन या राज्य सभा या काउंसिल ऑफ स्टेट एक स्थाई सदन है। इसका गठन 03-04-1952 को किया गया। एक तिहाई सदस्यों का निष्कासन लॉटरी के द्वारा 02-04-1994 को किया गया। अनुच्छेद 80 (1) के तहत राज्यसभा में अधिकतम में अधिकतम सदस्यों की संख्या 250 है। वर्तमान में राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 245 (233+12) है। 12 सदस्यों को राष्ट्रपति साहित्य, कला, विज्ञान एवं समाज सेवा क्षेत्र के ख्याति प्राप्त व्यक्तियों को मनोनीत करते हैं। राज्यसभा का सदस्य बनने की न्यूनतम उम्र सीमा 30 वर्ष है। राज्यसभा में प्रतिनिधियों की संख्या जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होती है। सबसे अधिक सदस्य उत्तर प्रदेश (31) से आते हैं।
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राज्य सभा का गठन 3 मई 1952 को किया गया तथा प्रथम बैठक 13 मई 1952 को हुई। राज्य सभा की कार्यवाही शुरू करने के लिए कम से कम कुल सदस्य का 10वां भाग (1/10) होना आवश्यक है।
राज्यसभा सदस्य बनने की योग्यता : राज्यसभा सदस्य बनने के लिए न्यूनतम उम्र 30 वर्ष है साथ ही उम्मीदवार का नाम उस राज्य के निर्वाचन सूची में होना आवश्यक है जहां से वह चुनाव लड़ना चाहता हो।
राज्य सभा का कार्यकल : राज्यसभा एक स्थाई सदन है। प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। पुनः सदस्य बना जा सकता है। सदस्यों को निर्वाचन अनुपातिक एवं एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है तथा हर 2 वर्ष पर एक तिहाई सदस्य निष्कासित होते हैं और उतने ही मनोनीत होते हैं [अनुच्छेद 83 (1)]।

वित्त विधेयक को छोड़ कर अन्य सभी विधेयक पर कानून बनाने का अधिकार राज्यसभा को लोकसभा के समान ही प्राप्त है। राज्यसभा धन विधेयक या वित्त विधेयक को मात्र 14 दिनों तक ही रोक सकता है। साधारण विधेयक में दोनों सदनों का सामान अधिकार है परंतु विवाद की स्थिति में अंतिम निर्णय लोकसभा के पक्ष में जाएगी। अनुच्छेद 312 के तहत राज्यसभा को संघ लोक सेवा आयोग सेवा आयोग के गठन का अधिकार प्राप्त है जबकि नियुक्ति की प्रक्रिया लोकसभा करती है।
अनुच्छेद 249 के तहत राष्ट्रहित में राज्य सूची में कानून बनाने का अधिकार सिर्फ राज्यसभा को है। 2003 से राज्यसभा में खुले मतदान की व्यवस्था है। उम्मीदवार के लिए राज्य विशेष का निवासी होना अनिवार्य नहीं है। सदस्यों को सत्र से 40 दिन पूर्व या बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। यह छूट सिर्फ दीवानी मामले में है फौजदारी में नहीं। यदि कोई सदस्य बिना सूचना दिए लगातार 60 दिनों तक बैठक से अनुपस्थित रहे तो उसका पद रिक्त समझा जाता है।

सभापति एवं उपसभापति

अनुच्छेद 89 के तहत राज्यसभा में एक सभापति तथा एक उपसभापति होते हैं। यह पद अमेरिका के संविधान से लिया गया है। राज्य सभा के कार्य का संचालन सभापति करते हैं एवं सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति करते हैं। राज्यसभा का पहला सभापति राधाकृष्णन तथा उपसभापति कमलापति त्रिपाठी थे। अनुच्छेद 90 के तहत उपसभापति को पद से हटाए जाने का वर्णन है।
  • जब उपसभापति  राज्यसभा का सदस्य नहीं रह जाता है तो वो अपना पद त्याग देगा।
  • उपसभापति त्यागपत्र दे कर भी अपना पद छोड़ सकता है।
  • राज्यसभा के सदस्यों के द्वारा भी दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित दे और लोकसभा अनुमोदित कर दे तो सभापति अपने पद से हट जाएंगे परंतु कम से कम 14 पूर्व सूचना देना अनिर्वाय है।
यदि सभापति एवं उपसभापति को हटाने की प्रक्रिया चल रही हो तो अनुच्छेद 93 के तहत यह अध्यक्षता नहीं करेंगे और ना ही निर्णायक मत देंगे लेकिन कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। उपसभापती का चुनाव राज्यसभा सदस्य अपने बीच से ही करते हैं जिसका कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।

लोकसभा | House of people

अनुच्छेद 81 के तहत लोकसभा संसद का निम्न सदन है। यह जनता का प्राततिनिधि सदन कहलाती है। जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होने के कारण यह शक्तिशाली होता है। मूल संविधान में लोकसभा के सदस्यों की संख्या 500 है। 130 वां संविधान संशोधन द्वारा सदस्यों की सख्या बढ़ाकर 530+20 (530 राज्यों से तथा 20 केंद्र शासित प्रदेशों से ) कर दिया गया। सदस्यों की संख्या 552 से अधिक नहीं हो सकती है। अनुच्छेद 331 के तहत 2 एंग्लो-इंडियन को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं  यदि प्रतिनिधि न हो तो। 84 वां संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा को विधान सभा के सदस्यों की संख्या में 2026 तक कोई परिवर्तन नहीं होगा। लोकसभा में सबसे ज्यादा (80) उत्तर प्रदेश से जाते हैं।

दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में से एक-एक एमपी जाते हैं दिल्ली से 7 (6 सामान्य + एक अनुसूचित जाति) जाते हैं। लोकसभा के सदस्यों का चुनाव गुप्त मतदान के द्वारा व्यस्क मताधिकार के आधार पर होता है। 61 वां संशोधन संशोधन के तहत मतदाता की उम्र सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। भारत में अभी 79 करोड़ मतदाता है। अनुच्छेद 326 के तहत मत का प्रयोग किया जाता है

लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता

  • भारत का नागरिक हो।
  • न्यूनतम उम्र सीमा 25 वर्ष।
  • लोकसभा या राज्यसभा के सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
  • पागल या दिवालिया न हो।
  • भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी लाभ के पद पर न हो।
  • एमपी बनने के लिए भारत की मतदाता सूची में नाम होना चाहिए परंतु व्यक्ति पर भ्रष्टाचार सिद्ध हो गया हो या देशद्रोह का आरोप हो या अपराध में 2 वर्ष की सजा काट चुका हो तो वह सदस्य नहीं बन सकता है।
अनुच्छेद 93 में प्रावधान कर दिया गया है कि यदि MP  तथा MLA के चुनाव के दौरान किसी निर्दलीय उम्मीदवार की मृत्यु हो तो चुनाव स्थगित नहीं होगा। लोकसभा में अनुसूचित जाति और जनजाति की संख्या 79+40 = 119 था परंतु वर्तमान में बढ़ाकर 131 कर दिया गया है। सबसे अधिक अनुसूचित जाति यूपी से 17, बंगाल - 10, तमिल नाडु - 7,  बिहार - 6 जाते हैं। सबसे अधिक जनजाति एमपी (6), झारखंड (5) और छत्तीसगढ़ (4) से जाते हैं। लक्ष्यदीप और दादर हवेली से एक-एक जाते हैं।
लोक सभा का कार्यकाल : लोक सभा का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्षों का होता है परंतु प्रधानमंत्री के परामर्श पर राष्ट्रपति समय से पूर्व भी इसे भंग कर सकता है। अभी तक ऐसा 8 बार हो चुका है।

संसद समितियाँ :  संसद में समितियों की संख्या पहले 17 (11 + 6 ) से थी, वर्तमान समय में 24 (लोकसभा 16 + राज्यसभा 8) है। प्रत्येक समिति में 45 सदस्य (लोकसभा 30 + राज्यसभा 15) होते हैं। अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति महोदय लोक सभा का अधिवेशन बुलाते हैं, सत्र समाप्ति की घोषणा करते हैं और लोकसभा को भंग भी करते हैं। अनुच्छेद 86 में राष्ट्रपति के अभिभाषण का वर्णन है। अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण है। अनुच्छेद 88 के तहत महान्यायवादी संसद में मत का प्रयोग नहीं करते हैं। अनुच्छेद 89 के तहत यह वर्णन है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापतित्व  करेंगे और इसके नहीं रहने पर उपसभापति करेंगे। अनुच्छेद 92 में सभापति और उपसभापति को हटाने की व्यवस्था है।अनुच्छेद 93 के तहत लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की चुनाव व्यवस्था है। चुनाव प्रत्यक्ष रूप से लोकसभा के सदस्यों द्वारा किया जाता है। यदि अध्यक्ष ना हो तो उपाध्यक्ष अध्यक्षता करते हैं यदि दोनों को हटाने की प्रक्रिया चल रही हो तो वरिष्ठ सदस्य अध्यक्षता करेंगे। यदि हटाने की प्रक्रिया चल रही हो तो उस समय निर्णायक मत का प्रयोग नहीं करेंगे परंतु कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। अनुच्छेद 102 के तहत बराबर मत की स्थिति में अध्यक्ष निर्णायक मत का प्रयोग करते हैं और सदस्य के रूप में भी मतदान करते हैं। लोकसभा के अध्यक्ष एवं सदस्यों का शपथ ग्रहण प्रोटेम स्पीकर कराते हैं।

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