महान्यायवादी | Attorney General - BHARAT GK

8 June 2019

महान्यायवादी | Attorney General

महान्यायवादी (Attorney General)

अनुच्छेद 76 में वर्णन है कि भारत में एक महान्यायवादी होगा इस की नियुक्ति राष्ट्रपति करेंगे। महान्यायवादी भारत का प्रथम विधि अधिकारी होता है। यह विधि संबंधी सलाह सरकार को देती है। यह मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता है जबकि ब्रिटेन में महान्यायवादी भी मंत्रिमंडल का सदस्य होता है। अभी तक 15 महान्यायवादी चुने जा चुके हैं वर्तमान (2019) में भारत के 15वें महान्यायवादी के. के. वेणुगोपाल है जिन्होंने जून 2017 से मुकुल रोहतगी का स्थान लिया है।

महान्यायवादी बनने की योग्यता

  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • दस साल के लिए उच्च न्यायलय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए।
  • सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनने के बराबर योग्यता रखता हो।

महान्यायवादी की पदावधि

इसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता है इसलिए वह राष्ट्रपति की मर्ज़ी के अनुसार ही कार्यरत रहता है। परन्तु परम्परानुसार इसकी नियुक्ति 3 साल के लिए की जाती है। उसे किसी भी समय राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। उसे हटाने के लिए संविधान में कोई भी प्रक्रिया या आधार उल्लेखित नहीं है।
★ सबसे लंबे समय तक एम सी सीतलवाड़ जबकि सबसे कम समय तक सोली सोराबजी महान्यायवादी रहे।

महान्यायवादी का वेतन

महान्यायवादी का वेतन राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है। संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है।

यह किसी सदन का सदस्य नहीं होता है लेकिन यह किसी भी सदन में जा सकता है, बोल सकता है परंतु अनुच्छेद 88 के तहत यह मत का प्रयोग नहीं कर सकता है। यह भारत सरकार के विरुद्ध किसी को सलाह नहीं दे सकता है और ना ही मुकदमों की पैरवी कर सकता है। महान्यायवादी भारत सरकार का पूर्णकालिक सदस्य नहीं हो सकता है और ना ही सरकारी सेवक होता है। इसको सहायता के लिए एक सॉलिसिटर जनरल तथा दो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल होते हैं। महान्यायवादी को भारत के राज्य क्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। महान्यायवादी को भारत की संचित निधि से वेतन व भत्ते दिए जाते हैं। अनुच्छेद 105 (4) के तहत इसे संसद सदस्यों के समान ही विशेषाधिकार प्राप्त है।

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