चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य | Important facts about elections - BHARAT GK

5 April 2019

चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य | Important facts about elections

चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य :

अक्टूबर 2013 से मतदाताओं को NOTA (None of the above) विकल्प दिया गया। यह अधिकार मध्य प्रदेश राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली एवं मिजोरम के विधानसभा चुनाव में पहली बार दिया गया।
2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव के में NOTA (None of the above) का प्रयोग लगभग 5.42 लाख मतदाताओं ने किया।
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1991 के जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव में जमानत राशि ₹10000 और ₹5000 था। 2009 के अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभा की जमानत राशि ₹10000 और ₹25000 कर दिया गया। जबकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए लोकसभा ₹12500 और राज्यसभा और राज्यसभा ₹5000 कर दिया गया।
वैध मतों का 1/6% से कम आने पर जमानत राशि जप्त हो जाती पर जमानत राशि जप्त हो जाती है।
2014 में लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव में उम्मीदवार के खर्च की अधिकतम सीमा लोकसभा का ₹70 लाख और राज्यसभा का ₹28 लाख है।
दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव में खर्च की राशि MP के लिए ₹55 लाख और MLA के लिए ₹20 लाख निर्धारित किया गया है।
1967 के चुनाव में पहली बार क्षेत्रीय विसंगति आई यानि केंद्र और राज्य में अलग-अलग पार्टी की सरकार बनी और 1967 से ही चुनाव में स्याही का प्रयोग होने लगा। इसी चुनाव से ही राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा किया जाने लगा तथा केंद्र और राज्य के बीच विवाद प्रारंभ हुआ।
चुनाव सुधार से संबंधित समितियां –
  • तारकुंडे समिति - 1975
  • दिनेश गोस्वामी समिति - 1990
  • इंद्रजीत गुप्ता समिति - 1998
चुनाव प्रणाली में मूल्य बहुत सुधार टीएन सेशन ने किया। ये 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे।
यदि कोई व्यक्ति न्यायालय द्वारा 2 वर्ष की सजा दिया गया हो तो वह व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता है।
निर्वाचन संबंधित याचिका पर 6 महीना के अंदर सुनवाई आवश्यक है।
लोकसभा सदस्य बनने के लिए अनुच्छेद 84 में प्रावधान है।
10 जुलाई 2013 को सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया की जेल में बंद कोई व्यक्ति यदि मतदान के लिए अयोग्य हो तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है।
धारा 33-7A के तहत कोई भी उम्मीदवार दो से अधिक स्थानों से चुनाव नहीं लड़ सकता है। जबकि 1997 से पहले ऐसा प्रावधान नहीं था।
2001 की जनगणना के तहत 2026 तक निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
मतदाता अनुच्छेद 326 के तहत जिनका उम्र 18 वर्ष हो गया हो वह मतदान कर सकता है (61वां संविधान संशोधन)।
भारत में वर्तमान समय में भारत में मतदाताओं की संख्या 90 करोड़ है।
पहली लोकसभा चुनाव में 489 स्थान में से कांग्रेस को 364 स्थान प्राप्त हुआ था।
छठी लोकसभा चुनाव (1977) में जनता पार्टी ने 542 स्थान में से 296 स्थान लाया।
आठवीं लोकसभा चुनाव 1984 में 508 स्थान में से कांग्रेस ने 401 स्थान लाया। यह सर्वाधिक है।
16वीं लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 543 स्थानों में से 282 स्थान लाया।
सेना को 2003 से प्रॉक्सी मतदान का अधिकार निर्वाचन आयोग ने दिया। प्रवासी भारतीयों को भी 2015 से मतदान का अधिकार मिला है।
टीएन सेशन को चुनाव सुधार का जनक माना जाता है। इन्होंने फोटो पहचान पत्र को लागू किया। हरियाणा पहला राज्य है जहां मतदाताओं को मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र दिया गया।
चुनाव के 45 दिनों के अंदर प्रतिनिधि को चुनाव खर्च का हिसाब देना आवश्यक है।
विधानसभा चुनाव में सर्वप्रथम 1982 में केरल पारावुर में
जून 1999 में गोवा पहला राज्य बना जिसने आम चुनाव में EVM (Electronic voting machine) का प्रयोग किया गया।
EVM का प्रयोग हुआ। 14वां लोकसभा चुनाव (2004) सभी राज्यों में EVM का प्रयोग हुआ।
4 फरवरी 2017 को गोवा विधानसभा का चुनाव हुआ था इस चुनाव में अंधे व्यक्तियों के लिए ब्रेल ईवीएम का प्रयोग हुआ।
वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) या वेरिफाइड पेपर रिकार्ड (VPR) एक मतदाता मत प्रणाली का उपयोग करते हुए मतदाताओं को फीडबैक देने का एक तरीका है। सर्वप्रथम 2013 में वीवीपैट का प्रयोग नागालैंड के नोकसेन विधानसभा क्षेत्र में किया गया।
2006 के 16वीं लोकसभा चुनाव में 8 निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपैट का प्रयोग किया गया। 2017 में गोवा विधानसभा चुनाव में भी का प्रयोग किया गया।
25 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग की स्थापना हुआ था इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन निर्वाचन आयोग का स्थापना हुआ था।
सबसे अधिक मतों से जीतने वाले उम्मीदवार पश्चिम बंगाल के अनिल बसु है। इन्होंने 2014 में पश्चिम बंगाल के आराम बाग से 592502 मतों से जीता।
वर्तमान चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा है जबकि दो अन्य चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुनील चंद्र है।
सरकारी कंपनी को छोड़कर कोई भी कंपनी या व्यक्ति यदि किसी पार्टी को ₹20,000 से अधिक चंदा देती है तो उसे निर्वाचन आयोग को सूचित करना होगा 2013 से यह व्यवस्था लागू है।

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