भारत के उपराष्ट्रपति | Vice President - BHARAT GK

1 February 2019

भारत के उपराष्ट्रपति | Vice President

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भारत के उपराष्ट्रपति

संविधान के भाग 5 और अनुच्छेद 63 से अनुच्छेद 73 तक उपराष्ट्रपति का वर्णन है। उपराष्ट्रपति पद अमेरिका से लिया गया है। भारत में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति का पद कार्यकारिणी में दूसरा सबसे बड़ा पद होता है। भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन थे। वर्तमान (2019) में वेंकैया नायडू है।
अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत में उपराष्ट्रपति होंगे।
अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होगें।
अनुच्छेद 65 के तहत राष्ट्रपति की मृत्यु त्यागपत्र या हटाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे। कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने के दौरान सभापति के रूप में कार्य न कर उपसभापति के रूप में कार्य करेंगे।
सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति का वेतन पहले ₹135000 था जो वर्तमान में ₹300000 है। पहला कार्यवाहक राष्ट्रपति राधाकृष्णन तथा दूसरा वी वी गिरी थे। कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में अधिकतम 6 महीना ही कार्य कर सकेंगे जबकि अमेरिका में शेष समय के लिए उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।

उप राष्ट्रपतियों की सूची :

उपराष्ट्रपति पद ग्रहण एवं पद मुक्ति
डॉ एस राधाकृष्णन 1952 से 1962
डॉ जाकिर हुसैन 1962 से 1967
वी वी गिरि 1967 से 1969
गोपाल स्वरूप पाठक 1969 से 1974
बी डी जत्ती 1974 से 1979
मोहम्मद हिदायतुल्लाह 1979 से 1984
आर वेंकटरमन 1984 से 1987
डॉ शंकर दयाल शर्मा 1987 से 1992
के आर नारायणन 1993 से 1997
कृष्णकांत 1997 से 2002
भैरों सिंह शेखावत 2002 से 2007
हामिद अंसारी 11-08-2007 से 11-08-2012
वेंकैया नायडू 11-08-2017 से वर्तमान (2019)

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन

अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति के निर्वाचन का वर्णन है। निर्वाचन अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मत से होता है। निर्वाचन में दोनों सदनों के निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्य भाग लेते हैं।

उपराष्ट्रपति की योग्यता

उपराष्ट्रपति बनने के लिए निम्न शर्त आवश्यक है :
  • भारत का नागरिक हो।
  • 35 वर्ष आयु पूरी कर चुका हो।
  • राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
  • लाभ के पद पर ना हो यदि को तो त्यागपत्र देना आवश्यक है।
  • उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो जाता है तो यह समझा जाएगा कि उसने उस सदन में अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद ग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है।

उपराष्ट्रपति का कार्यकाल

अनुच्छेद 67 में उपराष्ट्रपति के कार्य काल का वर्णन है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का का होता है। 5 वर्ष पूरे होने पर भी वह तब तक अपने पद पर बना रहता है जब तक कि नव निर्वाचित उपराष्ट्रपति पद ग्रहण नहीं कर लेता। उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए राज्य सभा बहुमत से संकल्प पारित किया हो और लोकसभा सहमत हो।
अनुच्छेद 68 के तहत उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर पुनः निर्वाचन की व्यवस्था है।
अनुच्छेद 69 में उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की व्यवस्था है। उपराष्ट्रपति को शपथ ग्रहण राष्ट्रपति कराते हैं राष्ट्रपति के अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश कराएंगे।
अनुच्छेद 70 में यदि राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों पद रिक्त हो तो उस स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दोनों पदों का निर्वहन करेंगे। 20 जुलाई 1969 को बीवी गिरी के त्यागपत्र देने के पश्चात मोहम्मद हिदायतुल्लाह एक महीना के लिए दोनों पदों का निर्वहन किए थे।
अनुच्छेद 71 के तहत उपराष्ट्रपति निर्वाचन के विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय मे किया जाएगा। यदि निर्वाचन अवैध हो तो उस स्थिति में उनके द्वारा किया गया कार्य वैध होगा।
अनुच्छेद 72 में राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के क्षमादान का वर्णन है अनुच्छेद 73 में उपराष्ट्रपति के कार्यों का वर्णन है। उपराष्ट्रपति के निम्न कार्य  करते हैं :
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सदन में अनुशासन बनाए रखते हैं।
विधेयक पर मतदान कर आते हैं और बराबर की स्थिति में निर्णायक मत देते हैं।
कार्य के दृष्टिकोण से इन्हें लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में शक्ति प्राप्त है लेकिन दोनों के वेतन समान है।
दोबारा चुने जाने पर पेंशन की व्यवस्था नहीं है। 1997 से  उपराष्ट्रपति की पेंशन की व्यवस्था की गई है। डॉ राधाकृष्णन लगातार दो बार उपराष्ट्रपति रहे। श्री कृष्ण कांत का पद पर रहते हुए देहांत हो गया। आर वेंकटरमन उपराष्ट्रपति बनने से पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष थे। कृष्णकांत और भैरव सिंह शेखावत उपराष्ट्रपति बनने से पहले मुख्यमंत्री थे।

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