चाहमान वंश या चौहान वंश | Chahamanas of Shakambhari - Chauhan Dynasty - BHARAT GK

30 August 2018

चाहमान वंश या चौहान वंश | Chahamanas of Shakambhari - Chauhan Dynasty

चाहमान वंश या चौहान वंश

चौहान वंश का संस्थापक वसुदेव थे। चौहान वंश की प्रारंभिक राजधानी अहिच्छत्र थी। समंतराज ने अपनी राजधानी अहिच्छत्र से शाकंभरी (वर्तमान में सांभर) स्थांतरित कर लिया। स्वतंत्र शासक सिंह राज हुए। इन्होंने महाराजाधिराज की उपाधि धारण किया। विग्रहराज द्वितीय चालुक्य शासक मूलराज प्रथम को परास्त किया। गोविंद राज द्वितीय को 'शत्रुओं को नष्ट करने वाला' कहा गया है।
चौहान शासक अजयराज ने अजमेर नगर की स्थापना किया और शाकंभरी (वर्तमान सांभर) से राजधानी अजमेर लाया। अजयराज मालवा के परमार शासक नर वर्मा को परास्त किया। यह शैव धर्म को मानते थे। इसने राजस्थान के पुष्कर में वराह मंदिर का निर्माण करवाया।Chauhan vansh

विग्रहराज चतुर्थ | Vigrahraj IV

चौहान वंश का सबसे शक्तिशाली शासक विग्रहराज चतुर्थ थे। यह वीसलदेव के नाम से विख्यात थे। इसने तुर्क शासक खुसरु साह को लाहौर में परास्त किया। इसने हरिकेलि नामक संस्कृत नाटक की रचना किया। वह एक महान कवि और लेखक था। इसका दरबारी कवि सोमदेव था। सोमदेव ने ललित विग्रहराज नामक ग्रंथ की रचना किया। विग्रहराज चतुर्थ ने अजमेर में एक संस्कृत विद्यालय (सरस्वती कण्ठाभरण विद्यापीठ) निर्माण किया था। इस विद्यालय को कुतुबुद्दीन ऐबक ने नष्ट कर यहां एक मस्जिद का निर्माण करवाया जिसका नाम 'अढाई दिन का झोपड़ा' पड़ा।

पृथ्वीराज चौहान | Prithviraj Chauhan

इस वंश के महान शासक पृथ्वीराज III या पृथ्वीराज चौहान हुआ। इसका जन्म 1166 ईस्वी में गुजरात के पाटन में हुआ। पिता सोमेश्वर के देहांत के पश्चात 14 वर्ष की अवस्था में यह अजमेर का शासक बना। अल्प व्यस्त होने के कारण इसकी माता कर्पूर देवी संरक्षिका बनी। सत्ता संचालन में मंत्री केम्बास, भुवनैकमल्ल (कर्पूर देवी के चाचा) और सेनापति स्कन्द ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। पृथ्वीराज चौहान  1178 में दिल्ली की गद्दी पर बैठा। पृथ्वीराज चौहान ने सबसे पहले 1182 में परमर्दि देव को परास्त किया। इसके बाद जयचंद के साथ युद्ध किया क्योंकि जयचंद ने परमर्दि देव का सहयोग किया था। दोनों दिल्ली को प्राप्त करना चाहते थे। इसके बाद गुजरात के चालुक्य शासक भीम प्रथम को परास्त किया।
पृथ्वीराज तृतीय ने 1191 में तराइन के प्रथम युद्ध में मोहम्मद गोरी को हरा दिया था। 1192 में तराइन की दूसरी लड़ाई में जयचंद ने पृथ्वीराज चौहान का सहयोग नहीं किया। जिसके कारण इसे हार का सामना करना पड़ा। गोरी अजमेर को ध्वस्त किया और 1192 में अजमेर में पृथ्वीराज की हत्या कर दिया।

चौहान वंश के शाशकों की सूची :

  • चाहमान (संभवतः पौराणिक)
  • वासु देव (6 वीं शताब्दी ईस्वी)
  • सामंत राज (684-709 ईस्वी)
  • नर देव (70 9-721 ईस्वी)
  • अजय राज प्रथम (721-734 ईस्वी), उर्फ ​​जयराज या अजयपाल
  • विग्रह राज प्रथम (734-759 ईस्वी)
  • चंद्र राज प्रथम (75 9-771 ईस्वी)
  • गोपेन्द्र-राजा (771-784 ईस्वी)
  • दुरलाभ राजा प्रथम (784-80 9 ईस्वी)
  • गोविंदा राज प्रथम (80 9-836 ईस्वी),
  • इंद्रंधरा राज द्वितीय (836-863 ईस्वी
  • गोविंदराजा द्वितीय (863-890 ईस्वी)
  • आईकंदाना-राज (890-917 ईस्वी)
  • वाकपति राज (917-944 ईस्वी)
  • सिम्हाराज (944-971 ईस्वी)
  • विग्रह राजा द्वितीय (971-998 ईस्वी)
  • दुरलभ राज द्वितीय (998-1012 ईस्वी)
  • गोविंदा राजा III (1012-1026 ईस्वी)
  • वाकापति राजा द्वितीय (1026-1040 ईस्वी)
  • विर्यराम (1040 ईस्वी)
  • चामुंडा राजा (1040-1065 ईस्वी)
  • दुर्लभ राज III (1065-1070 ईस्वी)
  • विग्राहा- राजा III (1070-10 9 0 ईस्वी)
  • पृथ्वीराज प्रथम (10 9 0-1110 ईस्वी)
  • अजय राज द्वितीय (1110-1135 ईस्वी)
  • आरनो राज (1135-1150 ईस्वी),
  • जगद देव (1150 ईस्वी)
  • विग्रा राजा चतुर्थ (1150-1164 ईस्वी), उर्फ ​​विसालेदेव
  • अपारा-गैंगेया (1164-1165 ईस्वी)
  • पृथ्वी-राजा II (1165 -1169 ईस्वी)
  • सोमेश्वर (1169-1178 ईस्वी)
  • पृथ्वी राज III (1178-1192 ईस्वी), उर्फ़ पृथ्वीराज चौहान
  • गोविंदा राज चतुर्थ (1192 ईस्वी)
  • हरि राज (1193-1194 ईस्वी)
पृथ्वीराज चौहान एक विद्वान थे। उनके दरबार में निम्न विद्वान रहते थे ―
  • चंदवरदाई - यह दरबारी कवि थे। इसने पृथ्वीराजरासो की रचना किया।
  • जयानक भट्ट - इन्होंने पृथ्वीराज विजय की रचना किया। 
  • विद्यापति गौड़
  • वाशीश्वर जनार्दन
  • विश्वरूप और रामभट्ट
प्राचीन भारत का प्रथम हिंदी कवि चंदवरदाई को माना जाता है और पृथ्वीराजरासो को हिंदी भाषा का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। पृथ्वीराज चौहान रणथंबोर में जैन मंदिर का निर्माण करवाया था। पृथ्वीराज तृतीय को राय पिथौरा भी कहा जाता है  यह चौहान वंश का अंतिम स्वतंत्र शासक था। चौहान वंश के अंतिम शासक हरिराज थे। इसने किसी तरह रणथंबोर में 1198 तक शासन किया।

चौहान वंश♂

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