भारत पर विदेशी आक्रमण (मध्यकालीन) : भारत पर तुर्कों का आक्रमण

अरब के पश्चात ईरानी और ईरानी के बाद तुर्क का भारत पर आक्रमण हुआ। 9वीं शताब्दी में मावरा उनहर में इरानी सरदारों ने सामानी साम्राज्य (Samanid Empire) की स्थापना किया। इसके अंतर्गत फ्रांस, खुरासन इराक और अफगानिस्तान क्षेत्र आते थे। तुर्क ईरानी दास थे। अलप्तगीन नामक शासक ने 932-33 में गजनी में स्वतंत्र राज्य की स्थापना। इसने 963 तक शासन किया। अलप्तगीन मृत्यु के पश्चात इसका दास परिक्तगीन शासक बना। यह 977 तक गजनी में शासन किया। परिक्तगीन पहली बार पंजाब पर आक्रमण कर हिंदूशाही वंश के शासक जयपाल को परास्त किया।

सुबुक्तगीन

परिक्तगीन के पश्चात सुबुक्तगीन शासक बना। सुबुक्तगीन अलप्तगीन का गुलाम था बाद में इसका दामाद बना। इसने विजयपाल को परास्त किया। इसके आक्रमण को इतिहासकार उतबी ने जिहाद की संज्ञा दिया। 997 में सुबुक्तगीन का देहांत हो गया। बड़ा पुत्र इस्माइल गजनी का शासक बना। छोटा भाई महमूद गजनी ने इस्माइल को अपदस्थ कर गजनी का शासक बना।

महमूद गजनी

महमूद गजनी का जन्म 2 नवंबर 971 को गजनी में हुआ था। 27 वर्ष की आयु में 997 ई० में गजनी का शासक बना। शासक बनते ही बनते ही इसने प्रत्येक वर्ष भारत पर आक्रमण करने की प्रतिज्ञा लिया। गवर्नर के रूप में इसने सिस्तान को जीता था। तारीख-ऐ-गुजीदा के अनुसार महमूद गजनी ने सिस्तान के शासक खलफ-बिन-अहमद को परास्त किया और इस उपलक्ष में सुल्तान की उपाधि धारण किया। बगदाद के खलीफा अल-आदिर-बिल्ला ने गजनी के पद को मान्यता दिया साथ ही इसे यमीन-उद-दौला (साम्राज्य का दाहिना हाथ) तथा यामीन-उल-मुल्लाह (मुसलमानी का रक्षक) की उपाधि से नवाजा। सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला पहला तुर्क महमूद गजनी था। महमूद अपने को अफरासियाद का वंशज घोषित किया। इसका वंश यामिनी वंश कहलाया।
महमूद गजनी ने 1000 से 1027 के बीच भारत पर कुल 17 बार आक्रमण किया। इतिहासकार हेनरी इलियट के अनुसार महमूद के 17 आक्रमण में 12 प्रमाणित है। महमूद गजनी ने भारत पर प्रथम आक्रमण 1001 में पेशावर पर आक्रमण किया। उस समय हिंदू शाही वंश के शासक जयपाल थे। जयपाल को परास्त होना पड़ा। पेशावर के निकट इन्हें बंदी बना लिया गया। ढाई लाख दिनार देखकर अपने को स्वतंत्र कराया और 1002 में आत्महत्या कर लिया। जयपाल का नाती सुखपाल ने इस्लाम धर्म को स्वीकार कर अपना नाम नौशा शाह रख लिया। इसके पश्चात गजनी ने 1008 में आनंदपाल से युद्ध किया। इसका साथ कन्नौज, राजस्थान, मुल्तान, ग्वालियर, कलिंजर एवं दिल्ली के शासकों ने दिया लेकिन हार से बचा नहीं सका। आनंदपाल के प।श्चात 1014 में त्रिलोचन पाल ने गजनी का प्रतिकार किया। इसका साथ कश्मीर के शासक संग्राम राज ने दिया परंतु इन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। त्रिलोचन पाल का उत्तराधिकारी भीम पाल भी महमूद का प्रतिकार किया परंतु सफलता नहीं मिली। 1026 में भीमपाल के देहांत के सात हिंदुशाही वंश का अंत हो गया।

महमूद गजनी के भारत पर आक्रमण

वर्ष आक्रमण क्षेत्र संबंधित शासक
1000 ईस्वी पंजाब के समीपवर्ती क्षेत्र जयपाल
1001 ई० पेशावर जयपाल
1005 ई० भटिंडा विजयराज
1006 ई० मुल्तान दाऊद कारमाथी
1007-08 ई० मुल्तान सुखपाल
1008-09 ई० वैहिंद (पेशावर) आनंदपाल
1009 ई० नारायणपुर (अलवर) अज्ञात शासक
1010 ई० मुल्तान सुखपाल
1013-14 ई० थानेश्वर राजाराम
1014 ई० नन्दशाह त्रिलोचनपाल
1015-16 ई० कश्मीर संग्रामराज
1018-19 ई० मथुरा व कन्नौज प्रतिहार राजपाल
1019 ई० कन्नौज चंदेल व त्रिलोचनपाल
1021 ई० कश्मीर रानी दिद्दा
1022 ई० ग्वालियर/कलिंजर गण्ड चंदेल
1025 ई० सोमनाथ मंदिर भीमदेव
1027 ई० सिंध के जाटों पर
महमूद गजनी का सबसे महत्वपूर्ण आक्रमण गुजरात का सोमनाथ मंदिर था। उस समय गुजरात की राजधानी अन्हिलवाड़ थी, शासक भीमदेव या भीम प्रथम थे। इस आक्रमण से महमूद को 20 लाख से अधिक दिनार प्राप्त हुआ, 50000 हिंदुओं का भी कत्ल किया। जब महमूद लूटकर गजनी वापस जा रहा था तो जाटों ने इसके साथ युद्ध किया। वापस लौटने के पश्चात जाटों के साथ 1027 में युद्ध किया। भारत का प्रवेशद्वार पंजाब को हस्तगत करने के बाद मथुरा को भी जीता। बहुत सारे मंदिरों को नष्ट किया इसके बाद कन्नौज के शासक राज्यपाल को भी परास्त किया। 1018 में मालवा के शासक विद्याधर ने राज्यपाल का वध कर डाला।
सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कुमारपाल ने करवाया।
1008 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा नगरकोट के विरुद्ध किया गया। यह हमला मूर्ति विवाद के विरुद्ध पहली महत्वपूर्ण जीत थी।
गजनी वापस जाने के पश्चात 30 अप्रैल 1030 को गजनी में 59 वर्ष की अवस्था में महमूद गजनी का देहांत हो गया। आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन लूटना और इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार करना था। महमूद के साथ भारत आने वाले इतिहासकारों में अल बिरूनी और उतबी थे।

  • अलबरूनी का वास्तविक नाम अबू रेहान मोहम्मद बिन अहमद था। यह एक इतिहासकार, दार्शनिक और संगीतज्ञ थे। इन्होंने तहक़ीक़-ए-हिंद या किताब-उल-हिंद की रचना किया। इस पुस्तक से उस समय के समाज की जानकारी मिलती है।
  •  उतबी ने किताब-उल-यामिनी की रचना किया। इसके अलावा इन के दरबार में शाहनामा के लेखक फिरदौसी, तहक़ीक़ ए सुबुक्तगीन के लेखक वहाकी रहता थे। वेहाकी को इतिहास का लेनपुल कहा जाता है।

महमूद ने गजनी में एक  विद्यालय और एक जामा मस्जिद बनवाया। गजनी सुन्नी मुसलमान था। इसके प्रधान सेनापति तिलक थे। महमूद की मृत्यु के पश्चात उनका पुत्र मसूद शासक बना। इन्हें सलजुक नामक तुर्क ने गजनी में परास्त किया। सलजुक साम्राज्य में अवशेष पर दो साम्राज्य का उदय हुआ : ख्वारिज्म साम्राज्य (ईरान) गौर साम्राज्य (अफगानिस्तान)।

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