उपयोगिता - अर्थशास्त्र | Utility - Economics - BHARAT GK

24 April 2018

उपयोगिता - अर्थशास्त्र | Utility - Economics

उपयोगिता - अर्थशास्त्र | Utility - Economics

मानवीय आवश्यकता को संतुष्ट करने की क्षमता को उपयोगिता कहते हैं। संतुष्टि लाभदायक या हानिकारक दोनों होती है। यह उपयोगिता सापेक्ष होती है। यह आवश्यकता की तीव्रता पर निर्भर करती है। प्रोफेसर मार्शल ने उपयोगिता को मुद्रा के रूप में मापने का प्रयास किया यानी उपयोगिता का गणना किया या कार्डिनल थ्योरी दिया। प्रोफेसर हिग्स तथा एलन ने बतलाया की उपयोगिता को मापा नहीं जा सकता केवल तुलना कर सकते हैं क्योंकि उपयोगिता एक मानसिक धारणा है। उपयोगिता तीन प्रकार की होती है –

1. सीमांत उपयोगिता -

सीमांत से आशय किसी वस्तु की अंतिम इकाई सीमांत इकाई और उससे मिलने वाली उपयोगिता को सीमांत उपयोगिता कहते हैं दूसरे रूप में किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई में वृद्धि या कमी से कुल उपयोगिता में जो वृद्धि या कमी होती है उसे हम सीमांत उपयोगिता कहते हैं सीमांत उपयोगिता धनात्मक ऋण आत्मक एवं शुन्य भी हो सकती है।

2. कुल उपयोगिता -

सभी वस्तुओं से प्राप्त उपयोगिता के योग को कुल उपयोगिता कहते हैं।

3. औसत उपयोगिता -

कुल उपयोगिता में से वस्तु की कुल इकाई से भाग देने पर जो शेषफल आता है उसे औसत उपयोगिता कहते हैं।

सीमांत उपयोगिता का नियम

प्रोफेसर मार्शल के अनुसार उपभोग को बढ़ाने से अगली इकाई से मिलने वाली उपयोगिता घटती जाती है। प्रोफेसर मार्शल ने उन्हें ही सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम कहा। इनके लागू होने के दो कारण है :

  1. निश्चित समय में आवश्यकता को पूर्ण रुप से संतुष्ट किया जा सकता है।
  2. सही वस्तु एक दूसरे के पूर्ण प्रतिस्थापन नहीं हो सकते (निश्चित अनुपात में प्रतिस्थापन संभव है)

सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम को गोसेन का प्रथम नियम भी कहा जाता है। गोसेन ने इस नियम का प्रतिपादन किया था।इसकी वृहद रूप से व्याख्या प्रोफेसर मार्शल ने किया।

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