अर्थशास्त्र का अध्ययन

अर्थशास्त्र का अध्ययन

अर्थशास्त्र के अध्ययन के दो प्रणाली हैं –
1. निगमन प्रणाली
2. आगमन प्रणाली
निगमन प्रणाली में सामान्य से विशिष्ट की ओर जाते हैं उदाहरण स्वरूप मनुष्य मरणशील प्राणी है। रावि मनुष्य है इसीलिए वह मरणशील है। अर्थशास्त्र में प्रतिस्थापन का नियम निगमन प्रणाली पर आधारित है। निगमन प्रणाली को विश्लेशत्मक प्रणाली भी कहा जाता है। इस प्रणाली का प्रयोग परंपरवादि तथा नवपरंपरवादि दोनों करते हैं परंपरावादी अर्थशास्त्री एडम स्मिथ, माल्थस जे एस मिल और रिकार्डो को माना जाता है। निगमन प्रणाली के दो भाग हैं –
1. गणितीय प्रणाली
2. अगणितीय प्रणाली
गणितीय प्रणाली का प्रयोग 19वीं शताब्दी में एजवर्थ नामक अर्थशास्त्री ने किया। इनके प्रयोग से आर्थिक विश्लेषण में संक्षिप्तता एवं यथार्थता आती है साथ ही विश्लेषण सही होता है।
अगणितीय या आगमन प्रणाली में विशिष्ट से सामान्य का अध्ययन करते हैं। इसका आधार ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित होता है इसीलिए इस प्रणाली को ऐतिहासिक प्रणाली भी कहते हैं माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत आगमन प्रणाली पर आधारित है यह प्रणाली ऑब्जरवेशन अवलोकन (Observations) पर आधारित होने के कारण इसे वास्तविक प्रणाली या सांख्यिकी प्रणाली भी कहा जाता है।
स्थैतिक (Statistic) और प्रावैगिक (Dynamic) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कामरे ने किया जबकि इसका सिद्धांत जे एस मिल ने दिया। भौतिक विज्ञान में स्थैतिक से आशय विश्राम की स्थिति से है। जबकि अर्थशास्त्र में स्थैतिक से आशय नियमित गति या अनवरत गति और मृदुल गति से है यानी गति के दर में परिवर्तन के अभाव से है। मार्शल के अनुसार रुचि फैशन साधन एवं तकनीक में कोई परिवर्तन नहीं से है। जबकि प्रावैगिक से आशय सदैव में परिवर्तन से है जैसे जनसंख्या उत्पादन पूंजी और तकनीक में परिवर्तन से है। प्रावैगिक अर्थशास्त्र का संबंध समय की अवधि से है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता एवं भविष्य की घटनाओं की जोखिम उठाना और सामंजस्य स्थापित करना इसका मुख्य लक्ष्य होता है।