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अर्थशास्त्र : परिचय | Economics

अर्थशास्त्र : परिचय | Economics

चौथी शताब्दी ईसा पूर्व अर्थशास्त्र की रचना कौटिल्य विष्णुगुप्त या चाणक्य ने किया। चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे। अर्थशास्त्र में राजनीतिक, धर्म, अर्थ और कानून का वृहद रूप से वर्णन किया गया है। चाणक्य के अनुसार मनुष्य की वृत्ति को अर्थ कहते हैं यानी मनुष्य का संयुक्त भूमि ही अर्थ है। इसकी प्राप्ति तथा पालन के उपाय को अर्थशास्त्र कहते हैं। अर्थशास्त्र के 15 भाग हैं 180 भाग हैं और 6000 लोग हैं। अर्थशास्त्र को सूत्र शैली में संस्कृत में लिखा गया है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र को पहले दंड नीति कहा जाता था।
अरस्तू ने अपनी पुस्तक  पॉलिटिक्स में अर्थशास्त्र को गृह प्रबंध का विज्ञान कहा।
जेम्स स्टीवर्ट के अनुसार परिवार के लिए जो महत्व अर्थशास्त्र का है, राज्य के लिए वही महत्व राजनीतिक शास्त्र का है।
अर्थशास्त्र का अध्ययन पहले राजनीतिक शास्त्र के अंतर्गत किया जाता था। राजनीतिक अर्थशास्त्र का जनक फ्रांकोइस क्यूसनेय (François Quesnay) को माना जाता है। 18वीं शताब्दी में स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने राजनीतिक शास्त्र से अर्थशास्त्र को अलग किया अर्थशास्त्र का जनक एडम स्मिथ को माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि 1885 के पश्चात अर्थशास्त्र को स्वतंत्र अस्तित्व प्राप्त हुआ एडम स्मिथ के दो महत्वपूर्ण ग्रंथ है -
  1. 1. The theory of sentiments
  2. 2. An enquiry into the nature and causes on the wealth of nation
राष्ट्र के धन के स्वरूप एवं उनके कारणों की खोज (An enquiry into the nature and causes on the wealth of nation) ने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसमें स्मिथ ने उत्पादन उपभोग विवरण और विनिमय का वृहद रूप से वर्णन किया है यानी अर्थशास्त्र का वैज्ञानिक अध्ययन एडम स्मिथ ने किया। अपनी पुस्तक में स्मिथ ने अर्थशास्त्र को धन का विज्ञान बतलाया। धन प्राप्ति के लिए स्मिथ ने स्वतंत्र व्यापार का सिद्धांत दिया। इसमें बतलाया की अर्थशास्त्र को स्वतंत्र करके ही धन की प्राप्ति किया जा सकता है यानी अहस्तक्षेप की धारणा का विकास 18वीं शताब्दी में हुई। एडम स्मिथ का समर्थन डेविड रिकार्डो, जे एस मिल, जे बी सॉ एवं माल्थस इत्यादि अर्थशास्त्रियों ने किया। ठीक इसके विपरीत प्रोफेसर रस्किन एवं कार्लाइन ने एडम स्मिथ की परिभाषा की आलोचना किया और बतलाया कि अर्थशास्त्र कुबेर का शास्त्र या कुबेर पंथ (Mammon worship), घृणा का शास्त्र (Dismal science) और रोटी मक्खन का विज्ञान है। एडम स्मिथ ने मानव की अपेक्षा धन को अधिक महत्व प्रदान किया यानी शादी की अपेक्षा साधन पर ज्यादा जोर दिया।

न्यू क्लासिकल अर्थशास्त्री प्रोफेसर अल्फ्रेड मार्शल ने अपनी पुस्तक प्रिंसिपल ऑफ इकोनॉमिक्स में बतलाया की
धन मनुष्य के लिए है ना कि मनुष्य धन के लिए
मार्शल ने धन की अपेक्षा मानव पर ज्यादा जोर दिया और बतलाया की अर्थशास्त्र भौतिक कल्याण का शास्त्र है। इन्होंने अपनी पुस्तक में मांग और पूर्ति का वृहद रूप से वर्णन किया है। 1885 से पहले अर्थशास्त्र का अध्ययन दर्शन शास्त्र और इतिहास के पाठ्यक्रम के अंतर्गत किया जाता था लेकिन मार्शल ने अर्थशास्त्र को स्वतंत्र पहचान दिलाया। मार्शल की एक और पुस्तक Money Credit and Commerce का प्रकाशन 1923 में हुआ। मार्शल को डायग्रामेटिक अर्थशास्त्र का जनक माना जाता है। मार्शल की परिभाषा की आलोचना मार्शल की शिस्या श्रीमती जॉन रॉबिंसन ने किया। रॉबिंसन के अनुसार मानव के भौतिक कल्याण में वृद्धि तब हो सकती है जब व्यक्ति चयन की नीति अपनाता है। रॉबिंसन के अनुसार अर्थशास्त्र चयन का शास्त्र है। रॉबिंसन ने बतलाया की आवश्यकता अनंत एवं साधन सीमित होने के कारण चयन की नीति के तहत व्यक्ति अपने भौतिक कल्याण में वृद्धि करते हैं। रॉबिंसन की परिभाषा संवैधानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण से सही है लेकिन व्यवहारिक दृष्टिकोण से सही नहीं है। मार्शल का परिभाषा व्यवहारिक दृष्टिकोण पर आधारित होने के कारण सर्व व्यापक एवं सर्वमान्य है।

प्रोफेसर सैम्यूल्सन विकासवादी परिभाषा दीया और मैक्रो अर्थशास्त्र बल दिया। सैम्यूल्सन ने बतलाया कि साधन एवं साध्य परिवर्तनशील है। वर्तमान समय परिवर्तनशील होने के कारण नित्य नई तकनीक का प्रयोग होता है और उसके साथ अर्थव्यवस्था का समायोजन किया जाता है। यह समायोजन प्रायोगिक अर्थव्यवस्था में ही संभव है अर्थार्थ सिमुलेशन ने विकासवादी परिभाषा देकर अर्थव्यवस्था में गति लाने का प्रयास किया।

यथार्थवादी और आदर्शवादी विज्ञान

यथार्थवादी विज्ञान से हमें यह जानकारी मिलती है कि विष खाने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है लेकिन यह नहीं बतलाता है कि विष खाना चाहिए या नहीं परंतु आदर्शवादी विज्ञान हमें यह बताता है कि विष खाने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है इसीलिए हमें विष नहीं खाना चाहिए। अर्थशास्त्र में दोनों विज्ञान का अध्ययन किया जाता है। यथार्थवादी अर्थशास्त्री एडम स्मिथ और रॉबिंसन है जबकि आदर्शवादी अर्थशास्त्री अल्फ्रेड मार्शल, प्रो. पीगू और होबसन है।

अर्थशास्त्र कला और विज्ञान दोनों है। कला कृक धातु से बना है। जिसका शाब्दिक अर्थ 'करना' होता है। किसी कार्य को सुचारु रुप से करना ही कला कहलाता है। जबकि विज्ञान से आशय किसी वस्तु का क्रमबद्ध ज्ञान से है। विज्ञान से ज्ञान की प्राप्ति होती है। दोनों का तुलनात्मक अध्ययन से पता चलता है कि विज्ञान एक ज्ञान है एवं कला उसका प्रयोग है यानी जब ज्ञान को व्यवहारिक रुप दिया जाए तो वह कला बन जाता है।

अर्थशास्त्र की शाखाएं :

अर्थशास्त्र की विषय वस्तु को दो भागों में बांटा गया है –
  1. 1. व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economics)
  2. 2. समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics)
इन दोनों शब्दों का प्रयोग विश्वव्यापी मंदी के पश्चात 1935 में रेगनर फ्रिश (Ragnar Frish) ने किया। Micro एवं Macro शब्द ग्रीक भाषा के Mikros एवं Makros से बने हैं जिनका अर्थ क्रमश: लघु एवं विशाल होता है।
व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economics) में संपूर्ण अर्थव्यवस्था का अध्ययन ना कर कुछ लघु इकाइयों जैसे व्यक्तिगत फर्म, बाजार, विशिष्ट परिवार, छोटे छोटे समूहों जैसे उद्योग, व्यक्तिगत आय या मजदूरी व्यक्तिगत व्यय एवं बचत का अध्ययन किया जाता है।
समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics) में संपूर्ण अर्थव्यवस्था का अध्ययन करते हैं जैसे कुल उत्पादन कुल योग कुल रोजगार कुल निवेश आदि। माइक्रो अर्थव्यवस्था में कुल परिवर्तनशील तत्व तथा उनके योगों में लगातार परिवर्तन का अध्ययन भी किया जाता है इसे आय और रोजगार सिद्धांत भी कहा जाता है।

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