9 February 2018

सम्राट अशोक | Ashoka the Great

सम्राट अशोक | Ashoka the Great :

चक्रवर्ती सम्राट अशोक विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। अशोक को विश्व के महानतम सम्राट गिना जाता है। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य के बाद बिंदुसार शासक बने और बिंदुसार की मृत्यु के बाद उसका मझला पुत्र अशोक 273 ईसा पूर्व में मगध की गद्दी पर बैठा। इससे पूर्व अशोक अवंती का राज्यपाल था। पुराणों में अशोक को अशोकवर्धन कहा गया है। अशोक की मां का नाम सुभद्रांगी तथा सम्राट अशोक पत्नी महादेवी थी जिससे महेंद्र नामक पुत्र और संघमित्रा नामक पुत्री हुई। अशोक ने 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया इस युद्ध में अशोक की जीत हुई परंतु भयंकर रक्त पात के कारण अशोक का हृदय परिवर्तन हो गया। प्रारंभ में अशोक ब्राह्मण धर्म का पालक और शिव का उपासक था पर कलिंग युद्ध के पश्चात उपगुप्त नामक एक बौद्ध भिक्षु से बौद्ध धर्म की दीक्षा लेकर बौद्ध धर्मावलंबी बन गया। अशोक ने अपने अभिलेखों में अपने लिए प्रियदर्शी शब्द का प्रयोग किया अशोक की अन्य उपनाम है कामाशोक चंडशोक आदि।
भारत में शिलालेखों का प्रचलन सर्वप्रथम अशोक ने किया।
अशोक राज्यभिषेक की 10 वें वर्ष बोधगया की यात्रा किया और 20 वें वर्ष लुंबिनी की यात्रा किया।

अशोक के अभिलेख

अशोक के अभिलेखों को तीन भागों में बांटा जा सकता है –
  1. शिलालेख 
  2. स्तंभ लेख 
  3. गुहालेख

सम्राट अशोक के प्रमुख शिलालेख व उन में वर्णित विषय

अशोक के शिलालेख शिलालेख में वर्णित विषय
पहला शिलालेख शिलालेख में पशु बलि और समाज में उत्सव की निंदा की गई है।
दूसरा शिलालेख इस शिलालेख में सम्राट अशोक ने मनुष्य एवं पशुओं के लिए चिकित्सा व्यवस्था का उल्लेख किया है।
तीसरा शिलालेख अशोक ने किस अभिलेख में राज्यकीय अधिकारियों को आदेश जारी किया कि वह हर पाँचवें वर्ष दौरे पड़ जाए इसमें धर्म संबंधित कुछ नियम भी निर्देशित है।
चौथा शिलालेख इसमें भेरीघोष किस स्थान पर धम्मघोष की घोषणा वर्णित है।
पांचवाँ शिलालेख इसमें धर्म महामात्र की नियुक्ति के संबंध में दिशा निर्देश वर्णित है। समाज तथा वर्ण व्यवस्था का बीच में उल्लेख है।
छठा शिलालेख शिलालेख में आत्म नियंत्रण संबंधित शिक्षा दी गई है।
सातवाँ एवं आठवां शिलालेख सम्राट अशोक की तीर्थयात्राओं के बारे में किस शिलालेख में जानकारी दी गई है।
नौवां शिलालेख शिलालेख में सच्चे शिष्टाचार और सच्ची भेंट का उल्लेख वर्णित है।
दसवां शिलालेख किस शिलालेख में सम्राट अशोक ने आदेश जारी किया है कि राजा तथा उच्च राज्य अधिकारी हमेशा ही प्रजा के हित के बारे में सोचें।
ग्यारहवां शिलालेख इस शिलालेख में धम्म की विशेषता व व्याख्या वर्णित है।
बारहवां शिलालेख इस शिलालेख में स्त्री महामात्रों की नियुक्ति एवं हर प्रकार की विचारों की सम्मान करने की बात कही गई है।
तेरहवां शिलालेख इस शिलालेख में एक तरफ तो कलिंग युद्ध की भयावहता का वर्णन है साथ ही सम्राट अशोक के हृदय परिवर्तन की भी बात वर्णित है साथ ही इसमें पड़ोसी राजाओं के संबंध में भी उल्लेख है।
चौदहवां अभिलेख इसमें सम्राट अशोक नहीं अपनी जनता को धार्मिक जीवन बिताने के लिए प्रेरणा दी है।

अशोक के स्तंभ लेख

अशोक के स्तंभ लेख इस से जुडी प्रमुख जानकारी
प्रयाग स्तंभ लेख पूर्व में यह स्तंभलेख कौशांबी में स्थित था बाद में अकबर ने इसे इलाहाबाद के किले में स्थापित करवा दिया।
दिल्ली टोपरा टोपरा में स्थित इस स्तंभ लेख को फिरोजशाह तुगलक ने दिल्ली में मंगवाकर स्थापित करवाया।
दिल्ली मेरठ फिरोजशाह तुगलक ने मेरठ स्थित अशोक के स्तंभ लेख को दिल्ली मंगवा लिया था।
रामपुरवा स्तंभ लेख 1872 ईसवी में कारलायन द्वारा खोजा गया यह स्तंभलेख बिहार राज्य चंपारण में स्थित है।
लौरिया अरेराज बिहार के चंपारण में यह स्तंभ लेख स्थित है।
लौरिया नंदनगढ़ चंपारण बिहार के नंदनगढ़ गांव में स्थित इस स्तंभ लेख पर मोर का चित्र पाया जाता है।

अशोक के प्रमुख शिलालेखों की लिपि वह उनके प्राप्ति स्थान

शिलालेख लिपी स्थान
शाहबाजगढ़ी शिलालेख खरोष्ठी पेशावर (पाकिस्तान)
मनसेहरा शिलालेख खरोष्ठी हजारा जिला (पाकिस्तान)
सासाराम शिलालेख ब्राह्मी रोहतास जिला (बिहार, भारत)
धौली शिलालेख ब्राह्मी पुरी (उड़ीसा)
येरागुरी शिलालेख ब्राह्मी चीतल दुर्ग (मैसूर)
पालिगुन्डू शिलालेख ब्राह्मी आविमठ (कर्नाटक)
वैराट (भाब्रू) शिलालेख ब्राह्मी जयपुर (राजस्थान)
कलसी शिलालेख ब्राह्मी देहरादून (उत्तरांचल)
गिरिनार शिलालेख ब्राह्मी जूनागढ़ कठियावाड (गुजरात)
सोपारा शिलालेख ब्राह्मी थाने के पास (महाराष्ट्र)
जौगढ़ शिलालेख ब्राह्मी गंजाम जिला (ओड़िशा)
रूपनाथ शिलालेख ब्राह्मी जबलपुर (मध्य प्रदेश)
एर्रागुड़ी शिलालेख ब्राह्मी कुरनूल (आंध्र प्रदेश)
नेपाल की तराई से अशोक के केवल दो अभिलेख प्राप्त हुए हैं – रुम्मिनदेई अभिलेख और निग्लीवा अभिलेख। अशोक का सबसे छोटा स्तंभ लेख या अभिलेख रुम्मिनदेई है। इस अभिलेख में अशोक द्वारा लुंबिनी में धम्म यात्रा के दौरान भू राजस्व घटा देने की घोषणा की है। अशोक ने कर को घटाकर 1/6 से 1/8 कर दिया। राजस्थान के भ्राबु अभिलेख से अशोक के बौद्ध होने का स्पष्ट प्रमाण मिला है।
अशोक राज्यभिषेक के 18वें वर्ष श्रीलंका के शासक सिरु ने संदेश भिजवाया कि हम बौद्ध हो गए हैं। ऐसा माना जाता है कि अशोक ने 84000 स्तूप का निर्माण करवाया था। अशोक 12 वें वर्ष गया जिला स्थित बराबर की पहाड़ी की पर आजीवक संप्रदाय के लिए गुफा का निर्माण करवाया। इसमें सुदामा गुफा, कर्ण गुफा और चौफर गुफा प्रमुख है। यह गुफाएं लोमेश ऋषि का था।
अशोक के पुत्र दशरथ ने नागार्जुन की पहाड़ी पर गुहा विहार बनवाया दोनों गुफा को जुड़वां गुफा कहा जाता है।

अशोक का धम्म

अशोक प्रजा की उन्नति के लिए जिन सिद्धांतों को अभिलेखों में प्रस्तुत किया उसे धम्म कहते है। अशोक का धम्म सभी धर्मों का सार था। अशोक के दूसरे और सातवे अभिलेख में धम्म की परिभाषा दी गई है। धम्म से आशय है पाप कर्मों से दूर, दया-दान और विश्व कल्याण है। अशोक का राजधर्म बौद्ध धर्म था। अशोक ने 12वीं शिलालेख में बताया बताया कि अपने धर्म का आदर करना चाहिए और दूसरे धर्म की निंदा नहीं करनी चाहिए। अशोक ने धर्म के प्रचार के लिए महामात्रो की नियुक्ति किया। कौटिल्य अथवा चाणक्य रचित पुस्तक अर्थशास्त्र में शीर्षस्थ अधिकारी के रूप में तीर्थ का उल्लेख मिलता है। इसे महामात्र भी कहते थे। इनकी संख्या 18 थी। धम्म का प्रचार पाली भाषा में किया गया।
13वें शिलालेख से धर्म की प्रचार की जानकारी मिलती है। श्रीलंका में बौद्ध धर्म का प्रचार अशोक के पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा ने किया। शासक तिस्स को भी दीक्षित किया था। नेपाल में बौद्ध धर्म का प्रचार चारुमती ने किया था। अशोक प्रथम शासक थे जिन्होंने अभिलेख के माध्यम से जनता को संबोधित किया। अशोक के अभिलेख को 1750 में दीपेंद्र ने खोजा। अशोक के 40 से अधिक अभिलेख प्राप्त हुए है। मानसेहरा, शाहबाजगढ़ी, गिरनार ढोली सकरा प्रमुख अभिलेख है। कौशांबी अभिलेख को रानी का अभिलेख कहा जाता है। अशोक के संपूर्ण भारत में अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है, पाकिस्तान में खरोष्ठी लिपि अफगानिस्तान में और अरमाइक लिपि में है।
अशोक की मृत्यु के बाद 10 शासकों ने शासन किया मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था। सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने इसकी हत्या कर शुंग वंश की स्थापना किया।