14 November 2017

राष्ट्रकूट वंश | Rashtrakutas Dynasty in Hindi

राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक दंतिदुर्ग थे इन्होंने 752 ई० में राष्ट्रकूट वंश की स्थापना किया  जिसकी राजधानी मान्यखेत या मानकिर ( शोलापुर के निकट, वर्तमान का मानखेड़ ) को बनाया गया। दंतिदुर्ग ने महाराजधिराज, परमेश्वर तथा परम भटनागर की उपाधि धारण किया। दंतिदुर्ग ने उज्जैनी में हिरण्यगर्भ (महादान यज्ञ) किया। दंतिदुर्ग ने 552 से 758 ईस्वी तक शासन किया।

कृष्ण प्रथम (758 - 773 ई०)

दंतिदुर्ग के पश्चात कृष्ण प्रथम शासक बने इन्होंने शुभतुंग अकालवर्ष की उपाधि धारण किया। कृष्ण प्रथम ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित एलोरा का प्रसिद्ध कैलाश मंदिर बनवाया जिसे वास्तुकला की दृष्टि से आश्चर्यजनक माना जाता है। इन्होंने  758 से  773 ईस्वी तक शासन किया।

ध्रुव (780 - 793 ई०)

कृष्ण प्रथम के पश्चात ध्रुव शासक बने । इन्होंने श्रीवल्लभ तथा धारावर्ष की उपाधि धारण किया। राष्ट्रकूट वंश का यह पहला शासक थे जिन्होंने  चालुक्य नरेश विष्णु वर्मन तथा पल्लव नरेश नंदीवर्मन  को हराया और कन्नौज पर अधिकार करने हेतु त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लिया और प्रतिहार नरेश वत्सराज और पाल नरेश धर्मपाल को पराजित किया। इन्होंने 780 से 793 ईसवी तक शासन किया।

गोविंद तृतीय (793 - 814 ई०)

ध्रुव के पश्चात् गोविंद तृतीय शासक बने ये राष्ट्रकूट वंश के सबसे शक्तिशाली शासक हुए इन्होंने भी प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय और पाल शासक धर्मपाल को प्राप्त किया। उन्होंने 793 से 814 ईसवी तक शासन किया।

अमोघवर्ष (814 - 878 ई०)

गोविंद तृतीय के पश्चात अमोघवर्ष शासक बने। ये शांतिप्रिय तथा विद्वान थे उन्होंने कविराजमार्ग नामक कन्नड़ की रचना किया अमोघवर्ष के गुरु जैन आचार्य जिनसेन थे जिन्होंने आदि पुराण की रचना किया। जिनसेन के अलावा इनके दरबार में गणितसार संग्रह के रचनाकार महावीराचार्य और अमोघवृत्ति की रचनाकार साकतायन रहते थे। अमोघवर्ष ने तुंगभद्रा नदी में जल समाधि लेकर अपनी मृत्यु को स्वेच्छा से प्राप्त किया।

कृष्ण द्वितीय (878 - 914 ई०)

इंद्र तृतीय (914 - 922 ई०) 

राष्ट्रकूट वंश के अंतिम शक्तिशाली शासक इंद्र तृतीय हुआ इन्होंने हुआ। इन्होंने मालवा के परमार शासक उपेंद्र को परास्त किया और राजधानी उज्जैनी पर अधिकार कर लिया। इन्होंने प्रतिहार शासक महिपाल को भी परास्त किया तथा कन्नौज पर अधिकार कर लिया। इन्होंने  नित्यवर्ष और रत्ताकन्दरपा की उपाधि धारण किया। कृष्ण तृतीय के दरबार में कन्नड़ भाषा का महान कवि तथा शांति पुराण के रचयिता पोन्न रहते थे। अरबी यात्री अलमसूदी इंद्र तृतीय के दरबार में आया था जिसने तत्कालीन राष्ट्रपति शासकों को भारत का सर्वश्रेष्ठ शासक कहा था।

कृष्ण तृतीय (939 - 968 ई०)

कृष्ण तृतीय राष्ट्रकूट वंश का अंतिम महान शासक था। उसके दरबार में कन्नड़ भाषा के विद्वान कवि पोन्न रहते थे। राजकवि पोन्न ने शांति पुराण की रचना किया था।

खोत्रिग (968 - 972 ई०)

कर्क द्वितीय (972 - 973 ई०)

राष्ट्रकूट वंश के अंतिम शासक कर्क द्वितीय थे। इन्होंने 972 से 973 ई० तक शासन किया। 973 ई० में इनके सामंत तैलप द्वितीय ने कर्क द्वितीय को युद्ध में पराजित कर राष्ट्रकूट वंश का अंत कर दिया और चालुक्य वंश की स्थापना किया।
एलोरा तथा एलीफेंटा महाराष्ट्र गुफा मंदिरों का निर्माण राष्ट्रकूट शासकों के काल में ही हुआ था। शैलकृत गुफाओं में से 1 से 12 तक बौद्धों, 13 से 20 तक हिंदुओं और गुफा संख्या 30 से 34 जैनों की गुफाएं हैं।
राष्ट्रकूट शासकों ने अपने शासनकाल में मुसलमान व्यापारियों को बसने वह इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करने की भी अनुमति दिया था। राष्ट्रकूट जैन धर्म के उपासक होने के साथ-साथ शैव, वैष्णव तथा शाक्त संप्रदायों के भी उपासक थे। राष्ट्रकूट वंश के शासकों ने ब्राह्मण और जैन धर्म को आश्रय दिया जिससे दक्षिणपंथ में जैन धर्म का काफी विकास हुआ।

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