सिकन्दर का भारत पर आक्रमण | Indian campaign of Alexander the Great

सिकन्दर का भारत पर आक्रमण

यूनानी आक्रमणकारी सिकंदर महान का जन्म 556 ईसापूर्व में मकदूनियाँ या मैसिडोनिया में हुआ था। पिता का नाम फिलिप द्वितीय तथा माता ऑलम्पियस और पत्नी का नाम रोक्सोना। सिकंदर को एलेक्ज़ेंडर तृतीय तथा एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन नाम से भी जाना जाता है।
फिलिप द्वितीय 359 ईसापूर्व में मैसिडोनिया के शासक बने थे। 336 ईसापूर्व में पिता की मृत्यु के बाद सिकंदर 20 वर्ष की आयु में यूनान की गद्दी पर बैठा। सिकंदर को विश्व विजेता बनने की प्रेरणा पिता से मिली। सिकंदर ने एशिया माइनर, सीरिया, मिश्र, बेबीलोन और बैक्ट्रिया को जीता। 331 ईसा पूर्व अर्बेला की युद्ध में हख़ामनी वंश या अजमीढ़ साम्राज्य (Achaemenid) सम्राट दारा तृतीय को परास्त किया। सिकन्दर ने 326 ईसापूर्व भारत पर आक्रमण किया था। 326 ईसापूर्व में बैक्टीरिया से होकर काबुल पर विजय प्राप्त किया और वहां सिकंदरिया नामक नगर बसाया। यह नगर गंधार नाम से भी जाना जाता है। काबुल से हिंदू कुश पर्वत पारकर एलेक्जेंड्रिया को जीता और वहां से निकैया (तक्षशिला) जा पहुंचा। निकैया में तक्षशिला के शाषक अम्भी ने अधीनता को स्वीकार किया और बहुमूल्य उपहार तथा हाथी दिया। अम्भी को देख कर पश्चिमोत्तर प्रदेश के अनेक राजाओं ने सिकंदर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
यहीं पर सिकंदर ने सेना को दो भागों में बांट दिया। एक भाग का नेतृत्व Hephaestion तथा Perdiccas ने किया। इन्होंने 5 महीनों में खेबर दर्रा को पार कर सिंधु नदी तक पहुंच गया जबकि सिकंदर स्थल मार्ग से स्वात घाटी होते हुए पश्चिम गंधार तक जा पहुंचा। यहां पुष्कलावती के शासक अष्टक ने इनका घोर प्रतिकार किया। इसके बाद कपिशा तथा तक्षशिला के लड़ाकू के तक्षशिला के लड़ाकू के जनजाति आस्पेसियन, बोरियन तथा अस्ताकेनोई या अस्तानेनोई ने सिकंदर का प्रतिकार किया। सिकंदर का सबसे अधिक प्रतिकार अश्वकों के राज्य में हुआ। अश्वक की राजधानी मसग थी। इसके बाद स्त्रियों ने इमके प्रतिकार किया। स्त्रियों को रास्ते से हटाने के लिए सभी का कत्लेआम कर दिया गया। इसके बाद सिंधु नदी के पश्चिमी भाग पर आधिपत्य कायम किया। फिलिप के नेतृत्व में एक सैनिक टुकड़ी रख दिया।

सिकंदर और पोरस

ओहिन्द के पास सिकंदर ने सिंधु नदी पर एक पुल बनाया। दोनों सेना ओहिन्द के पास मिल के सिंधु नदी को पर कर झेलम और चिनाव नदी के बीच का क्षेत्र जहाँ का शासक पौरव या पौरस या पुरु थे को सिकंदर ने आत्मसमर्पण करने को कहा पर पौरस ने जबाब में कहा कि "युद्ध भूमि में ही निर्णय किया जायेगा"। सिकंदर ने युद्ध के लिए अनुकूल स्तिथि का प्रतीक्षा किया और भयंकर बरसात में ही सिकंदर ने अपनी सेना को नदी पर करवा दिया। झेलम नदी के तट पर वितिस्ता या हाइडेस्पीज का युद्ध (Battle of Hydaspes) हुआ जिसमें पौरस को हर का सामना करना पड़ा। पहले पुत्र मार गया तत्पश्चात जब सेना ने साथ छोड़ दिया तो अम्भी ने आत्मसमर्पण करने को कहा पर उसपर प्रहार कर वह भाग निकला। विषम स्थिति पाकर इनके मित्र मेरुष ने पौरस को आत्मसमर्पण के लिए तैयार किया।

सिकंदर पौरस की वीरता से प्रसन्न हो कर पूछा कि तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाय? पौरस ने जबाब दिया कि एक राजा दूसरे राजा के साथ जैसा व्यवहार करता है वैसा ही व्यवहार मेरे साथ भी किया जाय। पौरस की जबाब से प्रसन्न हो कर सिकंदर ने उसका राज्य लौटा दिया साथ ही पंद्रह विजित क्षेत्रों को भी पौरस को दे दिया।

सिकंदर ने व्यास नदी के तट पर दो नागरों की स्थापना किया।

  • अलेक्सांड्रिया निकैया (Alexandria Nikaia)
  • अलेक्सांड्रिया ब्युसिफेलस (Alexandria Bucephalus)

  • ब्युसिफेलस (Bucephalus) सिकंदर का घोड़ा था जो हाइडेस्पीज के युद्ध में मारा गया।

    व्यास नदी के तट पर यूनानी देवता के स्मृति में बारह विशाल वेरियो का निर्माण करवाया और उसपर 'विजय" शब्द अंकित करवाया।
    प्रधान सेनापति सेल्यूकस निकेटस को भारतिय क्षेत्र का अधिकारी बनाया।
    व्यास नदी सिकंदर का चर्मोत्कर्ष था। व्यास नदी के आगे सिकंदर की सेना नही बढ़ क्योंकि वहां मगध का बड़ा साम्राज्य था जिनके शासक धनानंद थे। धनानंद के पास अपार सैन्य शक्ति थी। सिकंदर ने सेनाओं को बार-बार व्यास नदी पर करने को कहा पर सेना आगे नही बढ़ी। अन्ततः तीन दिन शिविर में बीताने के पश्चात सेनाओं को दो भाग में विभक्त किया और भारत से वापस चला गया। स्थल भाग का नेतृत्व सिकंदर ने खुद किया और जल भाग का नेतृत्व निआर्कस ने किया। सिकंदर ज़ेड्रोसिया के रेगिस्तान होते हुए बेबीलोन यानी फारस के सुसा नामक स्थान पर पहुँचा। लौटने के क्रम में बीमार हो गया और दो वर्षों तक बीमारी के कारण 323 इसापूर्व 33 वर्ष की अवस्था में सिकंदर की मृत्यु हो गई।
    सिकंदर भारत में 19 महीना रहा। भारतिय इन्हें अलकक्षेद्र नाम से पुकारते थे।
    सिकंदर ने भारतिय क्षेत्र को पाँच भागों में विभक्त किया जिनके सेनापति सेल्यूकस निकेटस थे।
    सिकंदर महान का धर्म Greek polytheism था। यूनानी पुरुष देवताओं के सम्मान में ओलम्पिक खेल हर साल आयोजित करते थे। वो मानते थे कि उनके देवतागण ओलम्पिक पर्वत पर रहते हैं।

    सिकंदर के आक्रमण का भारत पर प्रभाव


  • भारतियों ने यूनानियों से ज्योतिष विद्या सीखा।
  • यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस भारतिय दर्शन सीखा।
  • सिकंदर का भारत पर राजनीतिक प्रभाव ज्यादा रहा जबकि व्यपारिक कम क्योंकि उनकी आकांक्षा सिर्फ विश्व विजेता बनने की थी। सिकंदर के आक्रमण का भारत पर प्रभाव के बारे में और अधिक जानकारी के लिए भारत मे हिन्द-यवन का राज्य पढ़ें।

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