विलयन | Solution

विलयन | Solution :

विलियन (Solutions) दो या दो से अधिक पदार्थ के समांग मिश्रण को विलयन कहा जाता है। विलयन में विलय कणों की त्रिज्या 10–7 सेंटीमीटर से कम होती है। विलायकन को अलग नहीं किया जा सकता यह अस्थाई और और पारदर्शक होते हैं जैसे - चीनी का जल में विलयन और नमक का जल में विलयन।

विलयन के प्रकार (Types of solution)

ठोस में ठोस का विलयन
मिश्र धातुएं जैसे - पीतल (तांबा + जस्ता)
ठोस में द्रव का विलयन
थैलियम में पारा का विलयन
ठोस में गैस का विलयन
कपूर में वायु का बिलियन
द्रव्य में ठोस का विलयन
पारा में लेड का विलयन
द्रव्य में द्रव्य का विलयन
जल में अल्कोहल का विलयन
द्रव्य में गैस का विलयन
जल में कार्बन डाई ऑक्साइड का विलयन
गैस में ठोस का विलयन
धुँआ, वायु में आयोडीन का विलयन
गैस में द्रव्य का विलयन
कुहरा, बादल, अमोनिया गैस का जल में विलयन
गैस में गैस का विलयन
वायु, गैसों का मिश्रण

विलायक (Solvent)

वह तरल पदार्थ जिनमें अन्य पदार्थों को घुलने या मिलाने की शक्ति हो विलायक कहलाता है।

विलेय (Solute)

वह पदार्थ जो विलायक में घुलकर विलयन का निर्माण करता हो उसे विलेय कहा जाता है।
जल को सर्वव्यापक विलायक माना जाता है। किसी पदार्थ में विलेता विलायक तथा विलय की प्रकृति, ताप और दाब पर निर्भर करती है।

विलेयता (Solubility)

किसी निश्चित ताप और दाब 100 ग्राम विलायक में घुलने वाली विलय की अधिकतम मात्रा को विलेय पदार्थ की उस विलायक में विलेता कहते हैं।
सामान्यत: ठोस पदार्थों में विलेयता ताप बढ़ने पर बढ़ती है पर कुछ ठोस पदार्थों की विलेयता ताप बढ़ने पर घट जाती है जैसे सोडियम सल्फेट, कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, कैल्शियम, नाइट्रेट आदि और द्रव्य में गैस की विलेयता ताप बढ़ने पर घटती है।

संतृप्त विलयन (Saturated solution)

विलियन में विलेय पदार्थ की अधिक मात्रा घुली हुई हो तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।

असंतृप्त विलयन (Unsaturated solution)

निश्चित ताप पर विलयन में विलय पदार्थ की और अधिक मात्रा घुलाई जा सके तो उसे असंतृप्त विलियन कहते हैं।

अति संतृप्त विलयन (Super saturated solution)

जिस विलयन में विलय की मात्रा उस विलियन को संतृप्त को संतृप्त करने के लिए आवश्यक विलियन की मात्रा से अधिक घुली की मात्रा से अधिक घुली हुई हो तो उसे अति संतृप्त विलयन कहा जाता है।

बफर विलयन (Buffer solution)

ऐसा विलयन जो जो अम्ल तथा क्षार को परिवर्तित किए बिना अवशोषित कर ले वह वह बफर विलियन कहलाता है, जैसे- सोडियम एसीटेट (CH3COONa) एवं एसिटिक अम्ल (CH3COOH) का मिश्रण एक बफर है, जब इसे पानी मे घोल जाता है।
किसी बिलियन की इकाई मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा को विलयन का सांद्रण कहा जाता है। विलयन की सांद्रता को मोल द्वारा व्यक्त किया जाता है।

कोलाइड विलयन (Colloid)

जब किसी घुले हुए कण का आकार 10–15  सेंटीमीटर से 10–7 सेंटीमीटर के बीच हो तो ऐसे घोल को कोलाइड विलियन कहा जाता है। दूध रक्त, धुँआ, बादल, मक्खन, सोना इत्यादि कोलाइड विलियन है। ये सभी विलयन पायस है। कोलाइडी विलयन विषमांग मिश्रण है, यह स्थाई होता है तथा यह विलयन फिल्टर तक को पार कर जाती है।
★ जब कोलाइडी विलियन से प्रकाश को गुजारा जाए तो कोलाइड कण प्रकाश के चारों ओर फैल जाता है और प्रकाश का पथ चमकने लगता है। इस घटना को टिंडल प्रभाव (tyndall effect) कहा जाता है।
★ जब कोलाइड कण तीव्र गति से चक्कर लगाने लगते है तो उन्हें तो उसे ब्राउनीयन गति (Brownian motion) कहते हैं।
★ ऐसा घोल जिनमें परिक्षेपण कण ठोस हो लेकिन परिक्षेपित कण द्रव्य हो तो उसे जेल कहा जाता है, जैसे - जिलेटिन, स्टार्ट, सिलिका आदि।
★ ऐसा कोलाइड जिनमें ठोस करना करना द्रव्य में प्रक्षेपित हो जाए सौल कहलाता है।
★ गैस में द्रव्य या ठोस कणों का परिक्षेपण एरोसोल कहलाता है।
★ जब प्रक्षेपित कण ठोस हो तो ऐसे एरोसोल को धुँआ या स्मोक करते हैं।
★ जब प्रक्षेपित कण द्रव हो तो ऐसे एरोसोल को कोहरा कहा जाता है।
★ जब प्रक्षेपित कण जल हो तो ऐसे कोलाइडर को हाइड्रोसोल कहा जाता है।



पायस या इमल्शन (Emulsions)

जब कोलाइड में एक द्रव्य के सारे कण दूसरे कणों के सारे कणों में प्रक्षेपित हो लेकिन घुले नहीं तो ऐसी कोलाइडर को पायस या इमल्शन कहा जाता है। पायस बनने की प्रक्रिया को पायसीकरण कहा जाता है। सोल की तुलना में पायस का आकार बड़ा होता है। पायस का निर्माण किसी मिश्रण को लगातार हिलाने या प्रासाव कंपन देने से होता है। पायस सामान्यत: अस्थाई होते हैं यदि उनमें पायसीकरण उपस्थित ना हो। पायसीकरण का सबसे सटीक उदाहरण साबुन तथा डिटर्जेंट है। पायसीकरण की प्रकृति कपड़ों को धोने में सहायता करता है इनके साथ ही उद्योग में अयस्कों को सांद्रण के लिए भी किया जाता है। दूध एक प्राकृतिक पायस है जबकि पेंट कृतिम पायस है।


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