October 2017 - BHARAT GK - GK in Hindi

31 October 2017

पह्लव साम्राज्य | Pahlavas

पह्लव साम्राज्य | Pahlavas :


यूनानियों के पश्चात शक और शक के पश्चात पह्लव या पार्थियन ने भारत पर आक्रमण किया। पह्लवों का मूल निवास स्थान ईरान था। पह्लवों ने सर्वप्रथम अरकोशिया और सिस्तान में अपनी सत्ता स्थापित किया। पहला पह्लव शासक मनोनिज या बनान था।
यूनानी शासक एण्टियोकस द्वितीय के विरुद्ध किये गए विद्रोह का नेतृत्व पह्लवों की ओर से आर्सेकीज ने किया।
पह्लव का अंतिम और शक्तिशाली शासक गोंडोफर्निस था। इसने 19 ईस्वी से 45 ईस्वी तक शासन किया। पल्लवों की राजधानी तक्षशिला थी। तख्त-ए-बही अभिलेख में गोंडोफर्निश का नाम दुद्दूबहर मिलता है। इसी के समय पहला इसाई धर्म प्रचारक संत टॉमस भारत आए थे।
पार्थियन साम्राज्य का संस्थापक मिथ्राडेट्स प्रथम था। पार्थियन बौद्ध धर्मावलंबी थे। गोंडोफर्निश की मृत्यु के साथी भारत में पह्लव
साम्राज्य का पतन होना शुरू हो गया कुषाणों ने पह्लव
पर लगातार आक्रमण कर इसे समाप्त कर दिया।
















30 October 2017

भारत में शकों का राज्य | Shaka kingdom in india

भारत में शकों का राज्य | Shaka kingdom in india :

भारत पर यूनानियों के आक्रमण बाद भारत पर शकों का आक्रमण हुआ। शक मद्धेशिया के घुमक्कड़ जनजाति थे। शक जाति के लोग भारत में चारागाह की खोज में आए थे। शक कन्धार एवं बलूचिस्तान का बेलन दर्रा होते हुए सिंध प्रदेश में आए इसे शक द्वीप कहा जाता है। यूनानी विद्वानों ने शक द्वीप को इंडोसाइथिया नाम दिया। भारतीय स्रोतों में शकों को सीथियन ( Indo-Scythians ) कहा जाता है। शकों की पाँच शाखायें थी :
1. अफगानिस्तान
2. पंजाब
3. मथुरा
4. पश्चिमी भारत ( महाराष्ट्र )
5. उज्जैन
पंजाब का पहला शक शासक Maues (Moga) था। भारत का पहला विजेता Maues (Moga) को माना जाता है। अफगानिस्तान में शकों की राजधानी काबुल थी। शकों ने भारत में क्षत्रप ( राजा ) एवं महाक्षत्रप की उपाधि धारण किया। कर्दम वंश शकों के प्रतिष्ठित राज्य वंश का नाम था। शकों का सबसे अधिक प्रतापी राजा रुद्रदामन प्रथम था। इनका शासन 130 से 150 ईसवी तक गुजरात के बड़े से भू-भाग पर था। रुद्रदामन ने सौराष्ट्र प्रांत में स्थित मौर्यकालीन कठियावाड़ की अर्द्धशुष्क सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार करवाया। चंद्रगुप्त मौर्य के गवर्नर कुश गुप्त ने सुदर्शन झील का निर्माण करवाया था। रुद्रदामन ने सिंध, कोंकण, कठियावाड, मालवा, गुजरात और नर्मदा घाटी के प्रदेशों पर शासन किया। रुद्रदामन का गिरनार अभिलेख विशुद्ध संस्कृत भाषा में लिखा गया है यह सबसे लंबा अभिलेख है। रुद्रदामन ने सातवाहन शासक वषष्ठी पुत्र कुलुमवी को परास्त किया था।
शकों ने भारी संख्या में चांदी के सिक्के जारी किए। उज्जैन के शासक ने 58 ईसापूर्व में शकों को हराकर खदेड़ दिया और विक्रमादित्य की उपाधि धारण किया उसी समय (57 ई० पुर्व) विक्रम संवत नामक एक नया संवत शुरू हुआ और विक्रमादित्य एक लोकप्रिय उपाधि बन गया भारतीय इतिहास में विक्रमादित्य की उपाधि धारण करने वाले राजाओं की संख्या 14 तक पहुंच गई जिन में गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय सार्वधिक विख्यात राजा था। अंतिम शक शासक रुद्र सिंह तृतीय थे जिसे गुप्त के द्वारा नष्ट कर दिया गया।

सिकन्दर का भारत पर आक्रमण | Indian campaign of Alexander the Great

सिकन्दर का भारत पर आक्रमण

यूनानी आक्रमणकारी सिकंदर महान का जन्म 556 ईसापूर्व में मकदूनियाँ या मैसिडोनिया में हुआ था। पिता का नाम फिलिप द्वितीय तथा माता ऑलम्पियस और पत्नी का नाम रोक्सोना। सिकंदर को एलेक्ज़ेंडर तृतीय तथा एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन नाम से भी जाना जाता है।
Sikandar, Alexander the great
फिलिप द्वितीय 359 ईसापूर्व में मैसिडोनिया के शासक बने थे। 336 ईसापूर्व में पिता की मृत्यु के बाद सिकंदर 20 वर्ष की आयु में यूनान की गद्दी पर बैठा। सिकंदर को विश्व विजेता बनने की प्रेरणा पिता से मिली। सिकंदर ने एशिया माइनर, सीरिया, मिश्र, बेबीलोन और बैक्ट्रिया को जीता। 331 ईसा पूर्व अर्बेला की युद्ध में हख़ामनी वंश या अजमीढ़ साम्राज्य (Achaemenid) सम्राट दारा तृतीय को परास्त किया। सिकन्दर ने 326 ईसापूर्व भारत पर आक्रमण किया था। 326 ईसापूर्व में बैक्टीरिया से होकर काबुल पर विजय प्राप्त किया और वहां सिकंदरिया नामक नगर बसाया। यह नगर गंधार नाम से भी जाना जाता है। काबुल से हिंदू कुश पर्वत पारकर एलेक्जेंड्रिया को जीता और वहां से निकैया (तक्षशिला) जा पहुंचा। निकैया में तक्षशिला के शाषक अम्भी ने अधीनता को स्वीकार किया और बहुमूल्य उपहार तथा हाथी दिया। अम्भी को देख कर पश्चिमोत्तर प्रदेश के अनेक राजाओं ने सिकंदर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
यहीं पर सिकंदर ने सेना को दो भागों में बांट दिया। एक भाग का नेतृत्व Hephaestion तथा Perdiccas ने किया। इन्होंने 5 महीनों में खेबर दर्रा को पार कर सिंधु नदी तक पहुंच गया जबकि सिकंदर स्थल मार्ग से स्वात घाटी होते हुए पश्चिम गंधार तक जा पहुंचा। यहां पुष्कलावती के शासक अष्टक ने इनका घोर प्रतिकार किया। इसके बाद कपिशा तथा तक्षशिला के लड़ाकू के तक्षशिला के लड़ाकू के जनजाति आस्पेसियन, बोरियन तथा अस्ताकेनोई या अस्तानेनोई ने सिकंदर का प्रतिकार किया। सिकंदर का सबसे अधिक प्रतिकार अश्वकों के राज्य में हुआ। अश्वक की राजधानी मसग थी। इसके बाद स्त्रियों ने इमके प्रतिकार किया। स्त्रियों को रास्ते से हटाने के लिए सभी का कत्लेआम कर दिया गया। इसके बाद सिंधु नदी के पश्चिमी भाग पर आधिपत्य कायम किया। फिलिप के नेतृत्व में एक सैनिक टुकड़ी रख दिया।

सिकंदर और पोरस

ओहिन्द के पास सिकंदर ने सिंधु नदी पर एक पुल बनाया। दोनों सेना ओहिन्द के पास मिल के सिंधु नदी को पर कर झेलम और चिनाव नदी के बीच का क्षेत्र जहाँ का शासक पौरव या पौरस या पुरु थे को सिकंदर ने आत्मसमर्पण करने को कहा पर पौरस ने जबाब में कहा कि "युद्ध भूमि में ही निर्णय किया जायेगा"। सिकंदर ने युद्ध के लिए अनुकूल स्तिथि का प्रतीक्षा किया और भयंकर बरसात में ही सिकंदर ने अपनी सेना को नदी पर करवा दिया। झेलम नदी के तट पर वितिस्ता या हाइडेस्पीज का युद्ध (Battle of Hydaspes) हुआ जिसमें पौरस को हर का सामना करना पड़ा। पहले पुत्र मार गया तत्पश्चात जब सेना ने साथ छोड़ दिया तो अम्भी ने आत्मसमर्पण करने को कहा पर उसपर प्रहार कर वह भाग निकला। विषम स्थिति पाकर इनके मित्र मेरुष ने पौरस को आत्मसमर्पण के लिए तैयार किया।

सिकंदर पौरस की वीरता से प्रसन्न हो कर पूछा कि तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाय? पौरस ने जबाब दिया कि एक राजा दूसरे राजा के साथ जैसा व्यवहार करता है वैसा ही व्यवहार मेरे साथ भी किया जाय। पौरस की जबाब से प्रसन्न हो कर सिकंदर ने उसका राज्य लौटा दिया साथ ही पंद्रह विजित क्षेत्रों को भी पौरस को दे दिया।

सिकंदर ने व्यास नदी के तट पर दो नागरों की स्थापना किया।

  • अलेक्सांड्रिया निकैया (Alexandria Nikaia)
  • अलेक्सांड्रिया ब्युसिफेलस (Alexandria Bucephalus)

  • ब्युसिफेलस (Bucephalus) सिकंदर का घोड़ा था जो हाइडेस्पीज के युद्ध में मारा गया।
    व्यास नदी के तट पर यूनानी देवता के स्मृति में बारह विशाल वेरियो का निर्माण करवाया और उसपर 'विजय" शब्द अंकित करवाया।
    प्रधान सेनापति सेल्यूकस निकेटस को भारतिय क्षेत्र का अधिकारी बनाया।
    व्यास नदी सिकंदर का चर्मोत्कर्ष था। व्यास नदी के आगे सिकंदर की सेना नही बढ़ क्योंकि वहां मगध का बड़ा साम्राज्य था जिनके शासक धनानंद थे। धनानंद के पास अपार सैन्य शक्ति थी। सिकंदर ने सेनाओं को बार-बार व्यास नदी पर करने को कहा पर सेना आगे नही बढ़ी। अन्ततः तीन दिन शिविर में बीताने के पश्चात सेनाओं को दो भाग में विभक्त किया और भारत से वापस चला गया। स्थल भाग का नेतृत्व सिकंदर ने खुद किया और जल भाग का नेतृत्व निआर्कस ने किया। सिकंदर ज़ेड्रोसिया के रेगिस्तान होते हुए बेबीलोन यानी फारस के सुसा नामक स्थान पर पहुँचा। लौटने के क्रम में बीमार हो गया और दो वर्षों तक बीमारी के कारण 323 इसापूर्व 33 वर्ष की अवस्था में सिकंदर की मृत्यु हो गई।
    सिकंदर भारत में 19 महीना रहा। भारतिय इन्हें अलकक्षेद्र नाम से पुकारते थे।
    सिकंदर ने भारतिय क्षेत्र को पाँच भागों में विभक्त किया जिनके सेनापति सेल्यूकस निकेटस थे।
    सिकंदर महान का धर्म Greek polytheism था। यूनानी पुरुष देवताओं के सम्मान में ओलम्पिक खेल हर साल आयोजित करते थे। वो मानते थे कि उनके देवतागण ओलम्पिक पर्वत पर रहते हैं।

    सिकंदर के आक्रमण का भारत पर प्रभाव


  • भारतियों ने यूनानियों से ज्योतिष विद्या सीखा।
  • यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस भारतिय दर्शन सीखा।
  • सिकंदर का भारत पर राजनीतिक प्रभाव ज्यादा रहा जबकि व्यपारिक कम क्योंकि उनकी आकांक्षा सिर्फ विश्व विजेता बनने की थी। सिकंदर के आक्रमण का भारत पर प्रभाव के बारे में और अधिक जानकारी के लिए भारत मे हिन्द-यवन का राज्य पढ़ें।

    भारत मे हिन्द-यवन का राज्य | Indo-Greek Kingdom
    भारत में शकों का राज्य | Shaka kingdom in India

    25 October 2017

    रेडियोसक्रियता | Radioactivity

    रेडियोसक्रियता | Radioactivity :

    रेडियोसक्रियता (रेडियोऐक्टिविटी / radioactivity) या रेडियोधर्मिता वह प्रकिया होती है जिसमें एक अस्थिर परमाणु अपने नाभिक से अदृश्य किरण [अल्फा (α), बीटा (β) तथा गामा (γ) किरण] के रूप में ऊर्जा का त्याग करता है।
    जिन तत्वों में ये गुण पाये जाते है (स्वयं विखंडित होकर कुछ अदृश्य किरण उत्सर्जित करता है) उन्हें रेडियोसक्रिय तत्व (Radioactive element) कहते हैं। 1896 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक हेनरी बेक्वेरल के  द्वारा सर्वप्रथम रेडियो  सक्रियता की खोज किया। प्रारंभ में अल्फा (α), बीटा (β) तथा गामा (γ) किरण को बेक्वेरल किरण कहा जाता था। सर्वाधिक रेडियोऐक्टिव तत्व रेडियम है।
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    मैडम क्यूरी और पियरे क्यूरी ने 1898 में पता लगाया कि यूरेनियम और उनके यौगिक से रेडियो सक्रिय किरणों का निकलना एक परमाणु जनित क्रिया है। क्यूरी ने ही बताया कि थोरियम धातु में रेडियो सक्रिय तत्व विद्यमान है। रेडियो सक्रियता की खोज के लिए इन तीनों वैज्ञानिकों Henri Becquerel, Marie Skłodowska-Curie और Pierre Curie को 1903 में संयुक्त रुप से नोबेल पुरस्कार दिया गया।
    रेडियो एक्टिव पदार्थ दो प्रकार के होते हैं :
    प्राकृतिक रेडियो एक्टिव पदार्थ - परमाणु का नाभिक स्वतः विखंडित होकर अन्य तत्वों के परमाणु में परिणत हो जाए उन्हें हम प्राकृतिक रेडियो एक्टिव पदार्थ कहते हैं। प्राकृतिक रेडियोऐक्टिव समस्थानिक - यूरेनियम, थोरियम, रेडियम, कार्बन त्रिशियम, रेडॉन, पोटैशियम, पोलोनियम

    कृत्रिम रेडियो एक्टिव पदार्थ - कृत्रिम रेडियोएक्टिव समस्थानिक - प्लुटोनियम, क्युरियम, अमेरिकम, सिजियम, आयोडीन, एन्टीमनी, रुथेनियम, सिजियम, कोबाल्ट
    रेडियो सक्रिय पदार्थ में सबसे अधिक अर्धआयु यूरेनियम और सबसे कम पोलोनियम का होता है। यूरेनियम पहला खोजा गया प्राकृतिक रेडियोसक्रिय तत्व है। यूरेनियम के खनिज पिंच ब्लेड में यूरेनियम की अपेक्षा चार गुना अधिक रेडियो सक्रियता पाया जाता है। यूरेनियम के खनिज पिंच ब्लेड से रेडियम प्राप्त किया जाता है।

    अल्फा बीटा गामा किरण ( α, β, γ )

    अल्फा किरण ( Alpha radiation )  एवं Beta radiation की खोज Ernest Rutherford ने किया तथा Gamma radiation की खोज 1900 में Paul Villard ने किया।

    Alpha radiation (α) :

    अल्फा किरण पर धनावेश रहता है, भार हाइड्रोजन के भार से 4 गुना अधिक होता है इसका वेग प्रकाश के वेग का 1/10 भाग होता है। द्रव्यमान अधिक होने के कारण गतिज ऊर्जा अधिक होती है लेकिन वेदन क्षमता सबसे कम होता है और ऋण ध्रूव की ओर मुड़ता है।

    Beta radiation (β) :

    बीटा किरण में ऋण आवेश रहता है और धन ध्रुव की ओर मुड़ता है, इलेक्ट्रॉन का प्रभाव होता है, इसका वेदन क्षमता अल्फा से 9 गुना अधिक होता है।

    Gamma radiation (γ) :

    गामा किरण उदासीन होता है, कम तरंग धैर्य उत्पन्न करता है, इसका वेग प्रकाश के वेग के लगभग बराबर होता है, तीनों किरणों में सबसे अधिक वेदन क्षमता गामा की होती है और गैसों को आयनिक करने की क्षमता सबसे कम होती है।

    कार्बन डेंटिंग पद्धति द्वारा जीवाश्मों का अध्ययन किया जाता है।
    रेडियो आइसोटोप डेंटिंग द्वारा कैंसर एवं अन्य एवं अन्य घातक बीमारियों का पता लगाया जाता है।
    कोबाल्ट-60 का उपयोग मुख्य रूप से कैंसर के उपचार हेतु किया जाता है।

    14 October 2017

    Current affairs in Hindi

    प्रतियोगिता परीक्षाओं में करंट अफेयर्स से भी प्रश्न पूछे जाते हैं पर हम सभी करंट अफेयर्स को याद नहीं कर सकते इसीलिए परीक्षा उपयोगी करेंट अफेयर्स दिया गया है।

    Current affairs in Hindi



    अगस्त 2017 में जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण यूपी की गोरखपुर में मेडिकल कॉलेज में 60 बच्चों की मृत्यु हो गई। जापानी इंसेफेलाइटिस एक मस्तिष्क रोग है।
    H1N1 वायरस से सबसे अधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और गुजरात है इस वायरस से महाराष्ट्र में 437 व्यक्तियों की मौत हुई जबकि गुजरात में 269 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई।
    विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क कुरनूल अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क (950 MW) है यह आंध्र प्रदेश के कुरनूल में स्थापित किया गया है। इससे पहले विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क तमिलनाडु का कामुथी (648 MW) था।
    केंद्र सरकार 2022 तक विद्युत उत्पादन का लक्ष्य 175 गीगा वाट रखा है।
    केंद्र सरकार अगस्त 2017 में 32000 मेगावाट क्षमता वाला 28 परमाणु विद्युत ऊर्जा रिएक्टर को मंजूरी दिया है।
    केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति के लिए देशभर में 1205 आश्रम स्कूल को मंजूरी दिया है।
    त्रीव मिशन इंद्रधनुष अभियान का संबंध पूर्ण टीकाकरण प्रक्रिया में तेजी लाना है। शहरी क्षेत्रों में इस योजना पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
    नीति आयोग ने स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र में छः राज्यों को सहयोग करेगी, स्वास्थ्य में यूपी, असम और कर्नाटक है तथा शिक्षा में मध्यप्रदेश, उड़ीसा और झारखंड है।
    वर्तमान समय में मेकेदातु परियोजना ( Mekedatu dam plan ) कर्नाटक एवं तमिलनाडु के बीच विवाद है। तमिलनाडु सरकार कावेरी नदी पर बांध बनाना चाहती थी जिसका कर्नाटक विरोध कर रहा है।
    कोयल परियोजना झारखंड की परियोजना है इस परियोजना को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार 3 वर्षों के लिए 1622.27 करोड़ों रुपए आवंटित किया। यह परियोजना सोन नदी की सहायक कोयल नदी पर है। कोयल जलाशय परियोजना गढ़वा जिले में पलामू में स्थित है। 1972 में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था 1993 में बिहार सरकार ने रुकवा दिया 1998 में अटल बिहारी के द्वारा पुनः प्रारंभ करवाया गया। इस परियोजना के पूरा होने पर झारखंड के पलामू व गढ़वा तथा बिहार के औरंगाबाद व गया जिलों में 111,521 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई की व्यवस्था की सकेगी।

    लॉजिस्टिक डाटा बैंक का गठन जुलाई 2016 में किया गया इसका उद्देश्य भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से और अधिक कुशल बनाना है।
    केंद्र सरकार नई तकनीक के द्वारा प्लास्टिक कचरा से पेट्रोल और डीजल का निर्माण करेगी यह तकनीक पूरे विश्व में सिर्फ 3 देशों देशों के पास है - अमेरिका, जापान और जर्मनी चौथा देश भारत होगा। ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन इस दिशा में प्रयासरत है। यह सफलता देहरादून स्थित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा हासिल किया गया। इस ग्रीन तकनीक से प्रदूषण को कम किया जाएगा और सामान्य पेट्रोलियम की कीमत से आधा होगा।
    केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा 'स्‍वस्‍थ बच्‍चे स्‍वस्‍थ भारत' स्कीम का शुरूआत किया गया इस ये स्‍कीम केंद्रीय विद्यालय स्‍कूलों के लिए होगी. इसके तहत केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 12 लाख छात्रों के स्‍वास्‍थ्‍य पर फोकस किया जाएगा।
    UNO द्वारा जारी सूची में विश्व का सबसे तेजी से पर्यटन उद्योग फिलिस्तीन (58%) और मिस्त्र (51%) का बढ़ रहा है। विश्व पर्यटन संगठन की स्थापना 1975 में स्पेन के मेड्रिड में किया गया इसकी सदस्य देशों की संख्या 156 है। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य पर्यटन द्वारा आर्थिक समृद्धि और रोजगार का सृजन करना तथा एक दूसरे देशों के बीच समन्वय स्थापित करना है।

    5 October 2017

    भारत मे हिन्द-यवन का राज्य | Indo-Greek Kingdom


    भारत मे हिन्द-यवन का राज्य | Indo-Greek Kingdom :

    सिकंदर महान का सेनापति सेल्यूकस ने सर्वप्रथम पश्चिमी तथा मध्य एशिया में अपने आक्रमणों कब द्वारा विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
    सेल्यूकस द्वितीय के उत्तराधिकारी एण्टियोकस प्रथम ने यूनानी साम्राज्य को सुदृढ़ रखा। एण्टियोकस द्वितीय के समय भारत के अनेक प्रांत स्वतंत्र हो गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख उत्तर-पश्चिम अफगानिस्तान का बल्ख या बैक्ट्रिया था।
    डिओडोटस प्रथम शक्तिशाली शासक हुआ इनका सेनापति डेमेट्रियस ने भारत पर आक्रमण किया। इनका शासनकाल 205 से 170 ईसापूर्व रहा। डेमेट्रियस का छोटा भाई अपोलोडोटस कुछ समय तक भारत पर शासन किया लेकिन यूनान का भारतीय क्षेत्र का वास्तविक संस्थापक डेमेट्रियस का दामाद या सेनापति मिनांडर हुआ। इन्होंने 170 से 150 ईसापूर्व तक शासन किया। इन्होंने सर्वप्रथम बाजोर यानी पेशावर पर आधिपत्य कायम किया और अपनी राजधानी शाकल को बनाया। शाकल का आधुनिक नाम सियालकोट है। मिनांडर शक्तिशाली शासक थे। इनका  साम्राज्य सिंधु से यमुना तक फैला था। मिनांडर के सिक्कों पर धर्म चक्र का चिन्ह मिलता हैे। मिनांडर ने शुंग शासक वसुमित्र के साथ सिंधु नदी के तट पर युद्ध किया पर हार का सामना करना पड़ा। 
    नागसेन द्वारा रचित बौद्ध ग्रंथ मिलिंदपन्हो मिनांडर द्वारा नागसेन से पूछे गए प्रश्न एवं नागसेन द्वारा मिनांडर के प्रश्नों के दिए गए उत्तर का संकलन है।
    बौद्ध भिक्षु नागसेन से प्रभावित होकर मिनांडर ने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया। मिलिंदपन्हों में मिनांडर को महान दार्शनिक बताया गया है। मिनांडर ने भारत में सोने का सिक्का चलाया।
    मिनांडर की मृत्यु के पश्चात इनका पुत्र स्ट्रेटो प्रथम (Strato I) शासक बना अल्पवयस्क होने के कारण मां Agathokleia सत्ता संभाली।
    स्ट्रेटो द्वितीय के समय शासन काफी कमजोर हो गया गया और Antialcidas ने स्ट्रेटो द्वितीय को परास्त कर सत्ता पर आधिपत्य कायम कर लिया। Antialcidas ने अपना राजदूत हेलियोडोरस को शुंग शासक भागवत या भागभद्र के दरबार में भेजा। हेलियोडोरस भागवत धर्म को स्वीकार किया और विदिशा में गरुड़ स्तंभ का निर्माण का निर्माण करवाया। भागवत धर्म को स्वीकार करने वाला पहला विदेशी शासक हेलियोडोरस था। हेलियोडोरस ने ही विदिशा में विष्णु मंदिर के सामने ध्वज स्तंभ का निर्माण करवाया। अंतिम यवन शासक हर्मियस थे। हर्मियस के पश्चात शक का आधिपत्य कायम हो गया।

    यूनानि आक्रमण का भारत पर प्रभाव :

    1. भारत में गंधार शैली का विकास हुआ।
    2. सांचा में ढाला गया मुद्रा का प्रचलन प्रारंभ हुआ।
    3. लेख युक्त मुद्रा प्रारंभ हुआ।
    4. ज्योतिष विद्या, खगोल विद्या यूनानियों की देन है।
    5. संस्कृत नाटक में यवनिका शब्द यूनानियों की देन है।
    6. स्याही और कलम भी यूनानियों की ही देन है।
    यूनान के पश्चात शकों का भारत पर आधिपत्य कायम हो गया।


    भारत में शकों का राज्य | Shaka kingdom in india

    4 October 2017

    प्राचीन भारतिय इतिहास में होने वाले विदेशी आक्रमण


    प्राचीन भारतिय इतिहास में होने वाले विदेशी आक्रमण :

    भारत के विभिन्न राज्यों की बीच राजनीतिक एकता की अभाव ने भारत में विदेशी आक्रमणकारियों को आक्रमण करने और लूट-खसोट करने के लिए प्रेरित किया भारत पर पहला आक्रमण विदेशी आक्रमण करने वाले पर्सियन या इरानी थे।

    भारत पर ईरानियों का आक्रमन

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    साइरस द्वितीय ( Cyrus II )

    साइरस द्वितीय ने हख़ामनी वंश या अजमीढ़ साम्राज्य ( Achaemenid Empire या अजमीढ़ साम्राज्य) की स्थापना किया जिसकी राजधानी पर्सी पॉलिश थी। साइरस द्वितीय 559 से 530 ईसा पूर्व तक शासन किया। उन्होंने ज़ेड्रोसिया के रेगिस्तान होते  भारत पर आक्रमण किया इसकी जानकारी टेसियस, स्ट्रैबो और एलियन के लेखों से मिलती है। रोमन लेखक प्लिनी के अनुसार साइरस कपीसा नगरी को नष्ट किया और सिंधु और काबुल के बीच बसी जनजाति अष्टक और अश्वक को परास्त किया।
    सायरस द्वितीय का प्रभाव हिन्द महासागर तक फैला था।
    साइरस द्वितीय हिंदु कुश पर्वत तथा काबुल घाटी के जनजातियों को भी परास्त किया और 530 इसापूर्व कैस्पियन क्षेत्र में डरबाइक जनजाति से लड़ते हुए मारा गया।
    सायरस द्वितीय के मृत्यु के बाद पुत्र  कैंब्रिज द्वितीय शासक बना यह 530 से 522 ईसापूर्व तक शासन किया आंतरिक कलह के कारण भारत पर ध्यान ना दे सका 522 ईसा पूर्व में मृत्यु के बाद दारा प्रथम या डेरियस प्रथम या दराय बाहु 522 से 486 ईसा पूर्व तक शासन किया।

    दारा प्रथम ( Darius I )

    दारा प्रथम को विश्व अभिलेखों का जनक माना जाता है इनके तीन अभिलेख बेहीस्तुन, पर्शि पॉलिस, नक्श-ऐ-रुस्तम अभिलेख से भारत विजन की जानकारी मिलती है। बेहिस्तुन अभिलेख से पता चलता है कि इसके साम्राज्य में 23 प्रांत थे इनमें हिंद, सतगु और सप्तसिंधु क्षेत्र दारा प्रथम का 20वां प्रांत था। दारा प्रथम के संपूर्ण राजस्व का एक तिहाई भाग 20वां प्रांत से प्राप्त होता था।
    517 इसा पूर्व में दारा प्रथम ने अपनी सेना अध्यक्ष स्काईलेक्स को समुद्री मार्ग की खोज हेतु में भेजा इसके जहाजी बेड़ा को को सिंधु क्षेत्र तक भेजा परंतु यह हिन्द महासागर तक जा पहुंचा।
    विश्व में समुद्री मार्ग का खोज सर्वप्रथम स्काईलेक्स ने किया।
    दारा प्रथम के समय पारसी संप्रदाय अपने  चरमोत्कर्ष पर था।
    486 ईसापूर्व दारा प्रथम का देहांत हो गया पुत्र जराक्सिज शासक बना।

    क्षयार्षा (ज़रक्सीज / Xerxes I )

    ज़रक्सीज 486 से 465 ईसापूर्व तक शासन किया। ज़रक्सीज के समय यूनान एवं इरान के बीच थर्मोपल्ली का युद्ध ( battle of Thermopylae ) हुआ। इस युद्ध में गांधार एवं सिंध के भारतीय सैनिकों ने ईरान (पर्सिया)का सहयोग किया पर हार से बचा नहीं पाये।यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस जिन्होंने हिस्टोरीका की रचना किया उन्होंने इस पुस्तक में थर्मोपल्ली के युद्ध का वृहद रूप से वर्णन है इसीलिए हेरोडोटस को इतिहास का पिता कहा जाता है। 465 ईसापूर्व अंगरक्षक द्वारा ज़रक्सीज की हत्या कर दिया गया। ज़रक्सीज के बाद अयोग्य शासकों का 330 ईसापूर्व तक शासन रहा। अंतिम शासक  डेरियस तृतीय थे। डेरियस तृतीय के समय 331 ईसा पूर्व में सिकंदर का इरान पर आक्रमण हुआ जिसे अर्बेला का संग्राम या गौगेमेला का युद्ध (Battle of Arbela or Gaugamela) कहा जाता है। इस युद्ध में भारतीय क्षेत्र के सैनिक सहयोग के बाद भी डेरियस तृतीय परास्त हुआ और 330 ईसापुर में ईरानी या पर्शिया साम्राज्य पर सिकंदर का आधिपत्य पर कायम हो गया।
    इरानियों के संपर्क में आने के कारण पश्चिम भारत में खरोष्ठी लिपि प्रारंभ हुई। खरोष्ठी लिपि ईरान में आरमेइक लिपि से उत्पन्न हुई है। अशोक का मानसेहरा और शाहबाजगढ़ी अभिलेख खरोष्ठी लिपि में है।
    भारत में केस प्रक्षालन की प्रथा ईरानियों की देन है। शिलालेख पर राज्यादेश खुदवाना ईरानियों की देन है।
    क्षत्रप प्रणाली ईरानियों की देन है। इस प्रणाली को भारत में कुषाणों ने अपनाया।
    मुद्राओं का प्रचलन ईरानियों की देन है।
    ईरानियों के द्वारा ही भारतीय संपदा के संबंध में जानकारी उपलब्ध करवाई गई जिसके पश्चात यूनानियों का भारत पर आक्रमण हुआ।

    3 October 2017

    निष्क्रिय गैस | Noble gas

    Insert gas in periodic table
    निष्क्रिय गैस (Noble gas / inert gas) को अक्रिय गैस भी कहा जाता है, क्योंकि यह ना तो इलेक्ट्रॉन मुक्त करता है और ना ही ग्रहण करता है। इसकी प्रकृति निष्क्रिय होती है। नोबल गैस की संख्या 6 है: हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टोन (Kr), जेनॉन (Xe) एवं रेडॉन (Rn)। यह आवर्त सारणी के शुन्य वर्ग में पाया जाता है।
    मेंडलीफ के द्वारा जो 63 तत्वों का आवर्त सारणी बनाया गया था, उनमें अक्रिय गैसों को स्थान नहीं दिया गया था क्योंकि उस समय इन गौसों की खोज नहीं हुई थी।

    आर्गन (Argon)

    सर्वप्रथम 1894 में Lord Rayleigh और William Ramsay के द्वारा आर्गन गैस का खोज किया गया तथा 1894 में आर्गन गैस की खोज की पुष्टि की गई। ग्रीक या यूनानी भाषा में आर्गन का अर्थ लेजी या निकम्मा होता है। आर्गन का उपयोग मिश्र धातुओं के अर्क वेल्डिंग में निष्क्रिय वातावरण उत्पन्न करने के लिए तथा बिजली के बल्ब में भरने के लिए किया जाता है।

    हीलियम (Helium)

    1868 ई. में सूर्य के सर्वग्रास ग्रहण के अवसर पर सूर्य के वर्णमंडल के स्पेक्ट्रम में एक पीली रेखा देखी थी। जानसेन ने इस रेखा का नाम D3 रखा और सर जे. नार्मन लॉकयर इस परिणाम पर पहुँचे कि यह रेखा किसी ऐसे तत्व की है जो पृथ्वी पर नहीं पाया जाता। उन्होंने ही हीलियम (ग्रीक शब्द, शब्दार्थ सूर्य) के नाम पर इसका नाम हीलियम रखा। 1895 में रैम्जे द्वारा यूरेनियम खनिज में हीलियम गैस की उपस्थिति को ज्ञात किया गया।
    हीलियम का उपयोग मौसम संबंधी अध्ययनों में तथा वायुयान के टायर में भरने के लिए किया जाता है। ब्रह्मांड में हाइड्रोजन (71%) के पश्चात सबसे अधिक हीलियम (26.5%) पाया जाता है। हाइड्रोजन के बाद हीलियम सबसे हल्का गैस है। गुब्बारे में हीलियम भरा जाता है।
    तत्पश्चात 1898 में रैम्जे तथा ट्रेवरस ने वायु प्रभावजन विधि से निऑन, जेनॉन और क्रिप्टन गैस को प्राप्त किया। विसर्जन लैम्पों, ट्यूबों तथा प्रदीप्त बल्बों में निऑन का प्रयोग किया जाता है।

    रेडॉन (Radon)

    इसके बाद Friedrich Ernst Dorn के द्वारा रेडॉन गैस का खोज हुआ तथा 1902 रदरफोर्ड तथा सोढ़ी ने वायुमंडल से रेडॉन को पृथक करने में सफलता पाई। भूकंप आने से पहले पृथ्वी मे रेडॉन की सक्रियता बढ़ जाती है।  रेडॉन रेडियोऐक्टिव गैस है। यह वायुमंडल में नहीं पाया जाता है।

    2 October 2017

    हैलोजन | Halogen

    हैलोजन | Halogen :

    वर्ग VIIA या आवर्त सारणी के समूह 17 के तत्व हैलोजन कहलाते है। हैलोजन शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द हैलस से हुई है जिसका अर्थ होता रंगीन होता है। रंगीन यौगिक बनाने के कारण ही इन्हें हैलोजन कहा जाता है। हैलोजन तत्व के अंतर्गत  फ्लोरिन, ब्रोमीन, क्लोरीन, आयोडीन और स्टेटिन आते है। हेलोजन का अर्थ लवन बनाने वाला होता है। हैलोजन ऋण आवेश देता है और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता करता है।
    Halogen in periodic table

    हैलोजन तत्व :

    फ्लोरिन (Fluorine - F) 

    हैलोजन में सबसे अधिक प्रबल ऑक्सीकारक और विद्युत ऋनात्मक तत्व फ्लोरीन है। फ़्लोरिन की प्रकृति विस्फोटक होती है। फ्लोरिंग सिर्फ हीलियम, ऑर्गन तथा निकेल को छोड़कर सभी धातुओं के साथ अभिक्रिया करता है। टेफ्लॉन (संश्लेषित रबर) एवं टूथपेस्ट बनाने में फ्लोरिन उपयोग होता है।

    क्लोरीन (Chlorine - Cl )

    क्लोरीन मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है। यह साधारण लवण (NaCl) सिल्वाइन (KCL), कर्नालाइट (KCl,MgCl2.6H2O ) में संयुक्त रुप से उपस्थित रहता है। समुद्री जल में भार के अनुसार क्लोराइड की मात्रा 30% होती है। क्लोरीन की खोज 1886 में मायसन के द्वारा किया गया। हैलोजन में क्लोरीन में सबसे अधिक NaCL पाया जाता है। क्लोरीन का उपयोग कीटनाशी में, औषधि बनाने में, पीने वाले जल को रोगाणु मुक्त करने में तथा कागज की लुगदी बनाने में किया जाता है। क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोहेलिक अम्ल का निर्माण करती है।

    ब्रोमीन ( Bromine - Br )

    ब्रोमिन द्रव्य के रूप में पाए जाने वाला एकमात्र अधातु है। ब्रोमीन मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है। समुद्री जल में यह सोडियम, पोटेशियम एवं मैग्नीशियम के ब्रोमाइड के रूप में 0.006% पाया जाता है। जर्मनी के स्टैसफर्ट नामक स्थान में उपलब्ध कार्नालाइट के साथ ब्रोमोकार्नालाइ (KBr.MGBr2.6H2O) पाया जाता है। ब्रोमिन का उपयोग शीशा कृत पेट्रोल पेट्रोल में, फोटोग्राफी बनाने में, एथिलीन ब्रोमाइड के संश्लेषण में किया जाता है।

    आयोडीन ( Iodine - I )

    आयोडीन भी मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है। यह चिली साल्टपीटर या कैलिश में आयोडीन सोडियम आयोडेट (NalO3) के रूप में पाया जाता है।
    आयोडीन थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन थायरोक्सिन का प्रमुख संगठक है। आयोडीन का उपयोग आइडोफार्म बनाने में, पोटेशियम आयोडाइड बनाने में और थायराइड ग्रंथि को ठीक करने में क्या जाता है। यदि NaCl में सोडियम और पोटेशियम की निश्चित मात्रा मिला देने से आयोडीनयुक्त नमक का निर्माण होता है। आयोडीन के अल्कोहलिक विलियन को टिंचर आयोडीन कहते हैं। टिंचर आयोडीन का उपयोग एंटीसेप्टिक में किया जाता है।

    स्टैटिन ( Astatine - At )

    स्टैटिन रेडियोधर्मी है।

    1 October 2017

    उत्प्रेरण | catalysis

    उत्प्रेरण | catalysis :

    filter catalyst hands technology

    जब किसी पदार्थ की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया की दर परिवर्तित हो जाए उसे उत्प्रेरण (catalysis) कहा जाता है तथा जिस पदार्थ की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया की दर परिवर्तित हो लेकिन स्वयं अपरिवर्तित रहे तो ऐसे पदार्थों को उत्प्रेरक (catalyst) कहा जाता है।
    यदि उत्प्रेरक एवं अभिकारक दोनों समान अवस्था में हो तो उन्हें समांगी उत्प्रेरण करते हैं।
    जब रसायनिक अभिक्रिया में उत्प्रेरण की अवस्था अभीकारकों से भिन्न हो विसमांगी उत्प्रेरण कहलाता है।
    जब किसी पदार्थ की उपस्थिति से रासायनिक अभिक्रिया बढ़ जाए तो उसे धनात्मक उत्प्रेरण कहते है।
    जब किसी पदार्थ की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया की दर घट जाए तो उन्हें ऋणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं।
    जब रासायनिक अभिक्रिया में बना कोई उत्पाद उस अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरण का कार्य करें तो उसे सह-उत्प्रेरण कहते हैं।
    जो पदार्थ स्वयं किसी उत्प्रेरक की उत्प्रेरण क्षमता को कम या  नष्ट कर दे या नष्ट कर दे तो उसे उत्प्रेरण विष कहते कहते है।
    वह पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक ना हो लेकिन अपनी उपस्थिति के कारण रासायनिक अभिक्रिया को बढ़ा दे उन्हें हम वर्धक (Promoter) कहते हैं।
    जिन रासायनिक अभिक्रिया में उष्मा उत्सर्जित हो उसे ऊष्माक्षेपी कहते हैं। चारकोल का दहन ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। इनके दहन से 395 kg जूल प्रति मोल उष्मा निकलती है।
    रसायनिक अभिक्रिया में उष्मा का अवशोषण उस्मा रोधी अभिक्रिया कहलाता है। नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन के संयोग से नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण ऊष्मा रोधी अभिक्रिया है।

    विलयन | Solution

    विलयन | Solution :

    विलियन (Solutions) दो या दो से अधिक पदार्थ के समांग मिश्रण को विलयन कहा जाता है। विलयन में विलय कणों की त्रिज्या 10–7 सेंटीमीटर से कम होती है। विलायकन को अलग नहीं किया जा सकता यह अस्थाई और और पारदर्शक होते हैं जैसे - चीनी का जल में विलयन और नमक का जल में विलयन।

    विलयन के प्रकार (Types of solution)

    ठोस में ठोस का विलयन
    मिश्र धातुएं जैसे - पीतल (तांबा + जस्ता)
    ठोस में द्रव का विलयन
    थैलियम में पारा का विलयन
    ठोस में गैस का विलयन
    कपूर में वायु का बिलियन
    द्रव्य में ठोस का विलयन
    पारा में लेड का विलयन
    द्रव्य में द्रव्य का विलयन
    जल में अल्कोहल का विलयन
    द्रव्य में गैस का विलयन
    जल में कार्बन डाई ऑक्साइड का विलयन
    गैस में ठोस का विलयन
    धुँआ, वायु में आयोडीन का विलयन
    गैस में द्रव्य का विलयन
    कुहरा, बादल, अमोनिया गैस का जल में विलयन
    गैस में गैस का विलयन
    वायु, गैसों का मिश्रण

    विलायक (Solvent)

    वह तरल पदार्थ जिनमें अन्य पदार्थों को घुलने या मिलाने की शक्ति हो विलायक कहलाता है।

    विलेय (Solute)

    वह पदार्थ जो विलायक में घुलकर विलयन का निर्माण करता हो उसे विलेय कहा जाता है।
    जल को सर्वव्यापक विलायक माना जाता है। किसी पदार्थ में विलेता विलायक तथा विलय की प्रकृति, ताप और दाब पर निर्भर करती है।

    विलेयता (Solubility)

    किसी निश्चित ताप और दाब 100 ग्राम विलायक में घुलने वाली विलय की अधिकतम मात्रा को विलेय पदार्थ की उस विलायक में विलेता कहते हैं।
    सामान्यत: ठोस पदार्थों में विलेयता ताप बढ़ने पर बढ़ती है पर कुछ ठोस पदार्थों की विलेयता ताप बढ़ने पर घट जाती है जैसे सोडियम सल्फेट, कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, कैल्शियम, नाइट्रेट आदि और द्रव्य में गैस की विलेयता ताप बढ़ने पर घटती है।

    संतृप्त विलयन (Saturated solution)

    विलियन में विलेय पदार्थ की अधिक मात्रा घुली हुई हो तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।

    असंतृप्त विलयन (Unsaturated solution)

    निश्चित ताप पर विलयन में विलय पदार्थ की और अधिक मात्रा घुलाई जा सके तो उसे असंतृप्त विलियन कहते हैं।

    अति संतृप्त विलयन (Super saturated solution)

    जिस विलयन में विलय की मात्रा उस विलियन को संतृप्त को संतृप्त करने के लिए आवश्यक विलियन की मात्रा से अधिक घुली की मात्रा से अधिक घुली हुई हो तो उसे अति संतृप्त विलयन कहा जाता है।

    बफर विलयन (Buffer solution)

    ऐसा विलयन जो जो अम्ल तथा क्षार को परिवर्तित किए बिना अवशोषित कर ले वह वह बफर विलियन कहलाता है, जैसे- सोडियम एसीटेट (CH3COONa) एवं एसिटिक अम्ल (CH3COOH) का मिश्रण एक बफर है, जब इसे पानी मे घोल जाता है।
    किसी बिलियन की इकाई मात्रा में उपस्थित विलेय की मात्रा को विलयन का सांद्रण कहा जाता है। विलयन की सांद्रता को मोल द्वारा व्यक्त किया जाता है।

    कोलाइड विलयन (Colloid)

    जब किसी घुले हुए कण का आकार 10–15  सेंटीमीटर से 10–7 सेंटीमीटर के बीच हो तो ऐसे घोल को कोलाइड विलियन कहा जाता है। दूध रक्त, धुँआ, बादल, मक्खन, सोना इत्यादि कोलाइड विलियन है। ये सभी विलयन पायस है। कोलाइडी विलयन विषमांग मिश्रण है, यह स्थाई होता है तथा यह विलयन फिल्टर तक को पार कर जाती है।
    ★ जब कोलाइडी विलियन से प्रकाश को गुजारा जाए तो कोलाइड कण प्रकाश के चारों ओर फैल जाता है और प्रकाश का पथ चमकने लगता है। इस घटना को टिंडल प्रभाव (tyndall effect) कहा जाता है।
    ★ जब कोलाइड कण तीव्र गति से चक्कर लगाने लगते है तो उन्हें तो उसे ब्राउनीयन गति (Brownian motion) कहते हैं।
    ★ ऐसा घोल जिनमें परिक्षेपण कण ठोस हो लेकिन परिक्षेपित कण द्रव्य हो तो उसे जेल कहा जाता है, जैसे - जिलेटिन, स्टार्ट, सिलिका आदि।
    ★ ऐसा कोलाइड जिनमें ठोस करना करना द्रव्य में प्रक्षेपित हो जाए सौल कहलाता है।
    ★ गैस में द्रव्य या ठोस कणों का परिक्षेपण एरोसोल कहलाता है।
    ★ जब प्रक्षेपित कण ठोस हो तो ऐसे एरोसोल को धुँआ या स्मोक करते हैं।
    ★ जब प्रक्षेपित कण द्रव हो तो ऐसे एरोसोल को कोहरा कहा जाता है।
    ★ जब प्रक्षेपित कण जल हो तो ऐसे कोलाइडर को हाइड्रोसोल कहा जाता है।



    पायस या इमल्शन (Emulsions)

    जब कोलाइड में एक द्रव्य के सारे कण दूसरे कणों के सारे कणों में प्रक्षेपित हो लेकिन घुले नहीं तो ऐसी कोलाइडर को पायस या इमल्शन कहा जाता है। पायस बनने की प्रक्रिया को पायसीकरण कहा जाता है। सोल की तुलना में पायस का आकार बड़ा होता है। पायस का निर्माण किसी मिश्रण को लगातार हिलाने या प्रासाव कंपन देने से होता है। पायस सामान्यत: अस्थाई होते हैं यदि उनमें पायसीकरण उपस्थित ना हो। पायसीकरण का सबसे सटीक उदाहरण साबुन तथा डिटर्जेंट है। पायसीकरण की प्रकृति कपड़ों को धोने में सहायता करता है इनके साथ ही उद्योग में अयस्कों को सांद्रण के लिए भी किया जाता है। दूध एक प्राकृतिक पायस है जबकि पेंट कृतिम पायस है।