मौर्य वंश | Mauryan empire in Hindi

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मौर्य वंश | Mauryan empire in Hindi :

मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य थे। इन्होंने 322 से 293 ईसापूर्व तक शासन किया। इनके माता का नाम  मूरा तथा पिता नंदराज थे। मुद्राराक्षस में चंद्रगुप्त मौर्य के लिए "विशल" शब्द का प्रयोग किया गया है। ब्रह्मण साहित्य में शूद्र कहा गया है जबकि बौद्ध साहित्य में इन्हें क्षत्रिय माना गया है। चंद्रगुप्त का बचपन अंधकारपूर्ण था चाणक्य या विष्णुगुप्त या कौटिल्य ने राज किलम खेल खेलते हुए देखा और इससे प्रभावित होकर इन्हें एक शिकारी से खरीदा। चाणक्य तक्षशिला विश्वविद्यालय में इनको शिक्षा देकर सारी विद्या में निपुण कर नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद का अंत करने के लिए इनका उपयोग किया। चंद्रगुप्त मौर्य ने पाटलीपुत्र को राजधानी बनाया तथा प्रधानमंत्री चाणक्य को बनाया।

Maurya Dynasty map in 265 BCE
चंद्रगुप्त ने धनानंद से पहले पंजाब एवं सिंध में शासन कर रहे यूनान के शाषक युगडेमस को 317 ईसा पूर्व में में परास्त किया। मगध पर आक्रमण करने के क्रम में सर्वप्रथम केंद्रीय भाग पर  किया पर सफलता नहीं मिली फिर सीमांत क्षेत्र को जीता और पुनः मगध पर आक्रमण किया। धनानंद और उनके सेनापति भट्टसार वीरता पूर्वक लड़ा लेकिन चंद्रगुप्त मौर्य की सेना के सामने टिक ना सका।
मगध के बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने यूनान की ओर ध्यान दिया क्योंकि सिकंदर (अलेक्ज़ेन्डर) के सेनापति सेल्यूकस निकेटस इरान तथा बैक्ट्रिया को जीते हुए सिंधु नदी को पार कर भारत पर आक्रमण करना चाहते थे। 305 ईसा पूर्व में सिंधु नदी के तट पर सेल्यूकस चंद्रगुप्त मौर्य के बीच युद्ध हुआ। युद्ध में चंद्रगुप्त मौर्य की जीत तथा सेल्युकस की हार हुई। संधि शर्तों के तहत सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त मौर्य को कंधार, काबुल, हेरात और ज़ेड्रोसिया (बलूचिस्तान) दीया साथ ही अपनी पुत्री हेलना से चंद्रगुप्त का वैवाहिक संबंध स्थापित करवाया तथा राजदूत मेगस्थनीज को भी चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा। मेगास्थनीज ने इंडिका की रचना किया इसके 7 भाग है। इसमें उस समय के समाज और संस्कृति की जानकारी मिलती है। मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को पालिबोथरा नाम से पुकारा। चंद्रगुप्त मौर्य सेल्यूकस को 500 हाथी दान में दिया। यूनानी चंद्रगुप्त मौर्य को सैंड्रोकोटस नाम से पुकारते थे।

चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना किया इसके 15 भाग है। इसमें प्रशासन की जानकारी मिलती है। मैक्यावली के प्रिंस की तुलना अर्थशास्त्र की जाती है। चाणक्य ने सप्तांग सिद्धांत भी दिया।

इतिहासकार जस्टिन ने चंद्रगुप्त मौर्य की सेना को डाकुओं का गिरोह कहा। प्लूटार्क के अनुसार चंद्रगुप्त के पास छः लाख सेना थी।
शक शासक रुद्रदामन के गिरनार या जूनागढ़ अभिलेख से पता चलता है कि पश्चिम में इनका आधिपत्य सौराष्ट्र तक था। सौराष्ट्र के राज्यपाल पुष्य गुप्त को बनाया था। इन्होंने ही सुदर्शन झील का निर्माण करवाया।
महाराष्ट्र के चोपड़ा से अशोक के अभिलेख प्राप्त हुए हैं इससे दक्षिण विजय की जानकारी मिलती है। कर्नाटक के अलावा अन्य प्रदेश को भी जीता, मस्की अभिलेख से इसकी जानकारी मिलती है।
चंद्रगुप्त वृद्धावस्था में जैन भिक्षु से दीक्षा लेकर श्रवणबेलगोला चले गए। इन्होंने चंद्रगिरि पहाड़ी पर जाकर उपासना विधि द्वारा 297 ईसापूर्व में शरीर का त्याग कर दिया।
इतिहासकार स्मिथ ने मौर्य की पश्चिमी वैज्ञानिक सीमा सौराष्ट्र को माना है। यूनानी इस सीमा को Prometheus या इंडियम काकेसस कहा। पुराण के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य ने 28 वर्षों तक शासन किया।

बिंदुसार | Bindusara

297 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त क मृत्युे पश्चात पुत्र बिंदुसार शासक बना और 273 ईसापूर्व तक शासन किया। यूनानी विद्वान बिंदुसार को अमित्रोकोटीज या अमित्रघात (शत्रु का नाश करने वाला) कहा जाता है। बिंदुसार के शाषक बनने के बाद कुछ समय तक चाणक्य प्रधानमंत्री रहे पुनः खल्लाटक और राधागुप्त प्रधानमंत्री बने।
बिंदुसार अपने बड़े पुत्र सुसीम को तक्षशिला का गवर्नर बनाया तथा छोटे पुत्र अशोक छोटे पुत्र अशोक को उज्जैन का गवर्नर बनाया। तक्षशिला में विद्रोह हुआ तो सुसीम नियंत्रित नहीं कर सका तब अशोक को बुलाया गया अशोक ने आसानी से विद्रोह को दबा दिया।
मेगस्थनीज़ का उत्तराधिकारी डाईमेकस सीरिया के सम्राट् का दूत बनकर बिंदुसार के दरबार में रहता था। इसी समय मिस्र के राजा टॉलेमी फ़िलाडेल्फ़स ने अपने दुत नायनेसियस को बिंदुसार के दरबार में भेजा। बिंदुसार के दरबार मैं 500 सदस्यों वाली एक मंत्रीपरिषद थी इसका प्रधान खल्लाटक था। पश्चिम एशिया के साथ इनका बेहतर संबंध था।
बिंदुसार ने 25 वर्षों तक शासन किया 272 इसा पूर्व में इनका देहांत हो गया। ये ब्राह्मण धर्म को मानते थे परंतु बाद में आजीवक संप्रदाय को अपना लिया।

अशोक | Ashoka

बिंदुसार के मृत्यु के 4 साल बाद बिन्दुसार का पुत्र अशोक 269 ईसापूर्व में मगध की गद्दी पर बैठा। अशोक ने देवनामप्रिय तथा प्रियदर्शनी जैसी उपाधि धारण किया। सम्राट अशोक की माँ का नाम शुभ्रदांगी था वह चंपारण (अंग) राजकुमारी थी। अशोक ने कश्मीर तथा खेतान पर अधिकार किया। अशोक ने श्रीनगर की को बसाया।
राज्यभिषेक के 8वें वर्ष 261 ईसा पूर्व में अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया कलिंग के हाथीगुंफा अभिलेख से ज्ञात होता है कि उस समय कलिंग पर नंदराज नामक कोई राजा उसपर राज कर रहा था।
कलिंग युद्ध में व्यापक हिंसा के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया तथा अपने पुत्र महेंद्र व पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार हेतु श्रीलंका भेजा। अशोक ने 10 वर्ष में बौद्ध गया व 20 वर्ष में लुंबिनी की यात्रा की। अशोक ने धर्म को नैतिकता से जोड़ा हुआ इसके प्रचार-प्रसार के लिए उसने शिलालेखों को उत्कीर्ण करवाया। अशोक के शिलालेख ब्राह्मी, ग्रीक और अरमाइक तथा खरोष्ठी लिपि में है तथा स्तंभलेख प्राकृत भाषा में है। सर्वप्रथम 1750 ईस्वी में टील पैंथर ने अशोक की लिपि का पता लगाया। 1837 इसवी में जेम्स प्रिंसेप में अशोक के अभिलेख लेखकों पढ़ने मेंं सफलता प्राप्त की।

मौर्य साम्राज्य का पतन

अशोक ने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया जिसके बाद लगभग 234 ईसापूर्व में उसकी मृत्यु हुई।
अशोक के बाद कुणाल गद्दी पर बैठा। बृहद्रथ अंतिम मौर्य शासक था। पुष्यमित्र शुंग ने बृहद्रथ की हत्या कर शुंग वंश की स्थापना किया।

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