तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण : आवर्त सारणी | Periodic table

आवर्त सारणी | Periodic table

आवर्त सारणी (Periodic table) तत्वों को उनकी संगत विशेषताओं के साथ एक सारणी के रूप में दर्शाने की एक व्यवस्था है।
सभी पदार्थों की मूल इकाई तत्व कहलाता है। 1800 ई० में 31 तत्व ज्ञात हुए थे। 1865 में 63 तत्व ज्ञात हुए। 1913 में 107 तत्व ज्ञात हुए। अभी 118 (98+20) तत्व है।

आवर्त सारणी का इतिहास

डोबेराइनर का त्रिक सिद्धांत (Döbereiner's triads)

जर्मन वैज्ञानिक Johann Wolfgang Döbereiner ने 1800 में बताया की तत्वों के गुणधर्म मैं निश्चित प्रवृत्ति होती है। तत्पश्चात 1829 में इन्होंने समान भौतिक और रासायनिक गुण वाले तीन तत्वों की ओर ध्यान दिया जिन्हें डोबेराइनर का त्रिक सिद्धांत या नियम (Döbereiner's triads) भी कहा जाता है।
1862 में फ्रांसीसी भूगर्भशास्त्री Alexandre-Émile Béguyer de Chancourtois ने तत्वों को सर्वप्रथम परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया। 1862 में उन्होंने आवर्त सारणी का प्रारंभिक रूप तैयार किया, जिसे उन्होंने Vis tellurique(the 'telluric helix') नाम दिया।

न्यूलैंड का अष्टक नियम (Newlands' law of octaves)

1865-66 में ब्रिटिश रसायनशास्त्री John Newlands ने बताया कि,
किसी तत्व से प्रारंभ करने पर आठवें तत्व के गुण प्रथम तत्व के गुण के समान होगा।
यही न्यूलैंड का अष्टक नियम (Law of Octaves / Newlands' law of octaves) कहलाया। न्यूलैंड का अष्टक नियम को 1857 में लंदन रॉयल सोसायटी द्वारा मानयता दी गई।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी

1869 में रूसी रसायनशास्त्री मेंडलीफ (Dmitri Ivanovich Mendeleev) ने परमाणु भार के आधार पर 63 तत्वों का आवर्त सारणी (Periodic table) बनाया। मेंडलीफ का आवर्त सारणी 1969 में प्रकाशित हुआ।
मेंडलीफ के आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु भार के आवर्त फलन होते हैं।
इन्होंने 63 में दो तत्व गैलियम और जर्मेनियम की खोज नहीं किया था। इन दोनों तत्वों को एलुमिनियम और सिलिकॉन के नीचे रखा। इनका सांकेतिक नाम namely eka-silicon (germanium) और eka-aluminium (gallium) रखा गया। मेंडलीफ द्वारा बनाए गए आवर्त सारणी में 9 वर्ग और 7 आवर्त थे।
आवर्त सारणी में क्षेतिज का तार आवर्त को सूचित करता है, जबकि उद्धव का तार वर्ग या ग्रुप को सूचित करता है। मेंडलीफ तत्वों को इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन के आधार पर 4 ब्लॉक्स में विभाजित किया है।

आधुनिक आवर्त सारणी (Modern periodic table)

अंग्रेज रसायनशास्त्री Henry Moseley ने 1913 में 107 तत्वों का परमाणु संख्या के आधार पर आवर्त सारणी का निर्माण किया। मोसले ने बताया कि "तत्व की भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु संख्या के आवर्त-फलन होते है"। आधुनिक आवर्त सारणी में भी 7 आवर्त और 9 वर्ग हैं। पहला, दूसरा और तीसरा आवर्त को लघु आवर्त कहा जाता है। चौथा, पांचवा और छठा को दीर्घ आवर्त कहा जाता है। वर्ग I से लेकर VII तक को A तथा B दो उपवर्गों में बांटा गया है। इस प्रकार उप वर्गों को मिलाकर वर्गों की कुल संख्या 18 है। 17वां आवर्त अधूरा है। आवर्त सारणी में धातु बाई ओर तथा अधातु दाई और होता है। प्रथम आवर्त में केवल दो तत्व है, हाइड्रोजन और हीलियम। द्वितीय तथा तृतीय आवर्त में आठ-आठ तत्व हैं इन्हें प्ररूपी तत्व कहा जाता है। छठा आवर्त में सीजियम और बेरियम को रखा गया है। आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या बढ़ती है लेकिन धात्विक गुण घटती है।
तत्वों के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी को चार भागों में बाटा गया है –
  1. s– ब्लॉक के तत्व : वर्ग IA से IIA वर्गों के तत्व s–ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।
  2. p–ब्लॉक के तत्व : IIIA से VIIA तक के तत्व p–ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।
  3. d– ब्लॉक के तत्व : IB से VIIB एवं VII वर्ग के तत्व d–ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।
  4. f–ब्लॉक के तत्व : आवर्त सारणी के नीचे स्थित लैंथेनाइड एवं एंटीनाइट्स f–ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।
s एवं p ब्लॉक के तत्व सामान्य तत्व कहलाते हैं।
d–ब्लॉक के तत्व संक्रमण तत्व (Transition elements) कहलाते हैं।
f–ब्लॉक के तत्व दुर्लभ तत्व (Rare elements) कहलाते हैं। 

आयनन विभव (Ionisation potential) : ऊर्जा कि वह न्यूनतम मात्रा जो उस तत्व के एक गैसीय परमाणु की प्रथम कक्षा के एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है आयनन विभव कहलाता है।

इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron affinity) : किसी उदासीन गैसीय परमाणु की प्रथम कक्षा में बाहर से एक इलेक्ट्रॉन प्रविष्ट कराने पर कितनी ऊर्जा मुक्त होती है उसे इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं।
सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन बंधुता क्लोरीन की होती है। वर्ग VII के तत्वों की इलेक्ट्रॉन बंधुता उच्च होती है।

विद्युत ऋणात्मकता (Electro-negativity) : किसी तत्व की परमाणु की वह क्षमता, जिसके सहारे वह साझे की इलेक्ट्रॉन जोड़ी को अपनी ओर खींचती है, विद्युत ऋणात्मकता कहलाती है।
फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मक का सबसे अधिक होती है।
वर्ग IX के तत्व निष्क्रिय गैस (Noble gas) कहलाते हैं। जैसे – He, Ne, Ar, Kr, Xe एवं Rn । वर्ग-IX को शून्य वर्ग भी कहते हैं। निष्क्रिय गैसों का गलनांक निम्न होता है तथा वर्ग IB के तत्वों का गलनांक उच्च होता है।

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