परमाणु की संरचना | Atomic structure in Hindi

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Atomic structure in Hindi :

परमाणु ग्रीक भाषा का शब्द है इसका अर्थ अविभाज्य या न काटे जाने वाला पदार्थ होता है। लगभग 400 ईसा पूर्व में भारतीय ऋषि कणाद और यूनानी ऋषि ने परमाणु की अस्तित्व को स्वीकार किया। सर्वप्रथम कणाद ने बताया कि "पदार्थ छोटे-छोटे कणों से निर्मित है और पदार्थ के लगातार विभाजन से परमाणु प्राप्त होते हैं" लेकिन 18वीं शताब्दी में वैज्ञानिकों ने परमाणु पर बल दिया और 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशक 1808 में ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉन डॉल्टन ने सर्वप्रथम परमाणु को पदार्थ का मूल कण बताया और उन्होंने बताया कि "किसी भी ज्ञात विधि द्वारा परमाणु का विभाजन संभव नहीं है यानी पदार्थ अविभाज्य परमाणु से निर्मित है"।
1889 में  ब्रिटिश वैज्ञानिक Rutherford ने बताया कि "परमाणु विभाज्य है" परमाणु को तीन भाग में विभाजित किया गया – इलेक्ट्रॉन न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन।
Atom

  1. इलेक्ट्रॉन : इलेक्ट्रॉन की खोज 1897 में जे जे थॉमसन ने किया। इलेक्ट्रॉन पर ऋण आवेश होता है, इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के 1/1840 या 1/1836 वेें भाग के बराबर होता है। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.10939×10-31 Kg या 9.1×10–28 gram या 5.486×10–4 amu होता है। इलेक्ट्रॉन का नामांकरण G. Johnstone Stoney किया तथा इलेक्ट्रॉन के आवेश को 1909 में मिलीकन द्वारा 1.6022×10–90 कुलम मापा गया इनका माप तेल बूंद मॉडल पर आधारित था
  2. प्रोटॉन : प्रोटोन की खोज 1911 में गोल्डस्टीन ने किया इस पर धन आवेश रहता है। धन आवेशित कण का पृथक्करण और इसकी पुष्टि 1919 में हुई। प्रोटोन का द्रव्यमान 1.67262×10–27 kg या 1.007276 amu होता है। आवेश इलेक्ट्रॉन के बराबर होता है।
  3. न्यूट्रॉन : न्यूट्रॉन की खोज 1932 में जेम्स चैडविक ने किया इसका द्रव्यमान प्रोटोन के द्रव्यमान के बराबर 1.67262×10–27 kg होता है।
पोजेट्रोन : पोजेट्रोन की खोज 1932 में एंडरसन के द्वारा किया गया पोजेट्रोन एक धन आवेशित कण है इसका द्रव्यमान और आवेश इलेक्ट्रॉन के बराबर होता है।
न्युट्रीनो : न्युट्रीनो एक आवेश एवं द्रव्यमान रहित कण है इसका खोज 1930 में पौली ने किया।
पाइमोशन का खोज 1935 में यूकावा के के द्वारा किया गया।
परमाणु भार : किसी तत्व का परमाणु भार वह संख्या है जो प्रदर्शित करता है कि तत्व का एक परमाणु कार्बन-12 के परमाणु के 1/12 भाग द्रव्यमान अथवा हाइड्रोजन के 1.008  भाग द्रव्यमान से कितना गुना भारी है। C-12 कार्बन का एक समस्थानिक है यह परमाणु द्रव्यमान पर आधारित है। 1961 में C-12 को मान्यता मिली। अभी परमाणु का अंतरराष्ट्रीय मात्रक C-12 है।
परमाणु का व्यास 10−10 मीटर होता है तथा इनके केंद्रीय कोर का मान 10–14 या 10–15 मीटर होता है। न्यूक्लियस यानी नाभिक प्रोटोन और न्यूट्रॉन से बने होते हैं।
परमाणु संख्या (Atomic number) : किसी तत्व के परमाणु के नाभिक (nucleus) में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु संख्या या क्रमांक कहते हैं।
द्रव्यमान संख्या (Mass number ) : किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटोन और न्यूट्रॉन की संख्याओं का योग उस परमाणु की द्रव्यमान संख्या कहलाती है।
[द्रव्यमान संख्या =  प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉन की संख्या]
समस्थानिक (Isotope) : एक ही तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान हो और द्रव्यमान संख्या भिन्न हो तो उन्हें समस्थानिक कहा जाता है।
संभारीक (Isobar) : एक ही तत्व के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या और परमाणु संख्या दोनों भिन्न हो तो उसे संभारीक किया कहा जाता है।
समन्यूट्रॉनिक (Isotone) : यदि द्रव्यमान संख्या और परमाणु संख्या दोनों भिन्न हो और न्यूट्रॉन की संख्या समान हो तो उन्हें हम समन्यूट्रॉनिक करते हैं।

यूरेनियम (Uranium)

Uranium

यूरेनियम तत्व की खोज 1789 ई० में Klaproth द्वारा पिचब्लेंड नामक अयस्क से हुई। यूरेनियम तत्व के किसी परमाणु में हमेशा 92 प्रोटोन और 92 इलेक्ट्रॉन होते हैं। यूरेनियम परमाणु में सदैव 143 न्यूट्रॉन होते हैं जबकि कुछ में 146 न्यूट्रॉन होते हैं। प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त यूरेनियम में 238 समस्थानिक 99.28 %, 235 समस्थानिक 0.71% और 234 समस्थानिक 0.006 % उपस्थित हैं। यूरेनियम -235 की प्रकृति अस्थायी होती है । यूरेनियम -238 को प्रयोगशाला में परिष्कृत कर यूरेनियम -239 प्राप्त किया गया इसे प्लूटोनियम कहा जाता है। प्लूटोनियम को भय की धातु भी कहा जाता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हिरोशिमा पर जो परमाणु बम गिराया गया था उसमें 6 अगस्त को U-235 और 9 अगस्त को U-239 का प्रयोग किया गया था।
इटली मूल के वैज्ञानिक एनरिको फर्मी द्वारा 2 दिसंबर 1942 को नाभिकीय अभिक्रिया को संपन्न किया गया और 1945 में इसका उपयोग किया गया। नाभिकीय रिएक्टर में नियंत्रक के रूप में कैडमियम और बोरोन की छड़ का प्रयोग किया जाता है तथा मंदक के रुप में ग्रेफाइट का प्रयोग किया जाता है।

भारत में यूरेनियम झारखंड के जादू गोंडा तथा कर्नाटक के गुलबर्गा से प्राप्त होता है। भारत में कुल विद्युत उत्पादन में 3% यूरेनियम उपयोग किया जाता है तथा 31% तापीय विद्युत का उत्पादन किया जाता है। विश्व में विद्युत उत्पादन में सबसे अधिक यूरेनियम का उपयोग फ्रांस 75% करता है।
1913 में डेनमार्क के वैज्ञानिक Niels Bohr ने बताया कि "नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन्स चक्कर लगाते हैं"।
सबसे हल्का परमाणु हाइड्रोजन का (1 इलेक्ट्रॉन) होता है। सबसे भारी परमानु यूरेनियम का (92 इलेक्ट्रॉन) का होता है।
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता के नियम के अनुसार "किसी सूक्ष्म कण की स्थिति तथा वेग एक साथ निर्धारण करना संभव नहीं है"।

आवोगर्दो संख्या (Avogadro number) :

किसी पदार्थ का परिणाम मोल (Mole) कहलाता है। पदार्थ के एक मोल में जितने कणों की संख्या होती है उन्हें आवोगर्दो संख्या (Avogadro number) कहते हैं, आवोगर्दो संख्या का मान 6.022×10²³ होता है।

1905 में आइंस्टाइन ने बताया कि "जब  द्रव्यमान की क्षती होती होती है तो ऊर्जा मुक्त होती है"। अथार्थ,
E = mc2
E – Energy
m – Mass
c- Celeritas{latin}/Speed of light(3×108 m/s)

परमाणु बम नाभिकीय विखंडन ( nuclear fission ) अभिक्रिया पर कार्य करता है जबकि हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन ( nuclear fusion ) अभिक्रिया पर कार्य करता है।
सूर्य नाभिकीय संलयन की अभिक्रिया पर कार्य करता है। सूर्य की ऊर्जा का मुख्य स्रोत हाइड्रोजन और हीलियम है। सुर्य से ऊर्जा 4×1026 जूल प्रति सेकंड की दर से ऊर्जा निकती है। यह 5 अरब साल पूर्व से दे रही है और 5 अरब सालो आगे तक देती रहेगी।




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