गैसों के नियम | Laws of gas



1738 में डैनियल बर्नोली ने हाइड्रोडायनामिका (Hydrodynamica) में गैस के अणुगति सिद्धान्त का नियम (kinetic theory of gases) दिया तथा इसकी पुष्टि James Clerk Maxwell, Rudolf Clausius एवं Kronig ने किया। बरनोली के अनुसार "सभी गैसें छोटे-छोटे कणों से बने होते हैं" इन कणों को उन्होंने अणु का नाम दिया। गैस का प्रत्येक अणु एक समान होते हैं और सभी दिशा में गतिशील होते हैं, गैसों के बीच अंतर आण्विक बल नहीं होता है, गैसों की अणु औसत गतिज ऊर्जा उनके परम ताप केे समानुपाती होता है, गैस के अणुओं को यदि बर्तन की दीवारों से टकराते हैं तो इनके कारण गैस दाब उत्पन्न होता है।
  • गैस की गति को तीन प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं-
1. औसत गति (Average speed)- गैसों की सभी अणुओं की गति के अंकगणितीय औसत को औसत गति कहते हैं।
2. मूल गति (Basic speed)- अनुओं की गति की औसत वर्गमूल को मूल-मध्यवर्ग गति कहते हैं।
3. अति संभाव्य गति (High potential speed)- किसी ताप पर सबसे अधिक अणुओं द्वारा धारित गति को अति संभाव्य गति कहते हैं।

बॉयल का नियम (Boyal's law)- 1662 में बॉयल ने बताया की "स्थिर ताप पर गैस के निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional) होता है" यानी बॉयल के अनुसार स्थित ताप पर गैस का दाब बढता है और आयतन घटता है और दाब के घटने से आयतन बढ़ता है।
चार्ल्स का नियम (Charles's law)- 1787 में चार्ल्स डार्विन ने बताया कि "स्थिर दाब पर किसी गैस किसी गैस के निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती होता है"।
आवोगर्दो का नियम (Avogadro's law)- आवोगर्दो ने बताया कि "समान ताप एवं दाब पर सभी गैसें समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है" यह परिकल्पना 1811 में इटली के रसायनशास्त्री आवोगर्दो द्वारा बर्जीलियस की परिकल्पना को संशोधन करके दिया गया।
Gay-Lussac's law- गैसीय आयतन संबंधी नियम दिया अथार्थ गैसों के आयतन के पारस्परिक अनुपात संबंधी रासायनिक संयोग का नियम Gay-Lussac ने दिया। Gay-Lussac के अनुसार "स्थिर आयतन पर किसी निश्चित मात्रा वाली गैस का दाब उनके उनके आयतन के समानुपाती होता है"।
स्थिर ताप और दाब गैसों के मिश्रण की गतियां उनके घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। गैसों का अणुभार उनके वाष्प दाब का दोगुना होता है।
डाल्टन का नियम या डाल्टन का आंशिक दाब का नियम (Dalton's law or Dalton's law of partial pressures)-  गैसों के आंशिक दाब का नियम 1801 में डाल्टन ने दिया।इस नियम के अनुसार, परस्पर क्रिया न करने वाली गैसों का कुल दाब उन गैसों के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है। यह नियम आदर्श गैसों पर लागू होता है।
गैस का अणुभार उनकी वाष्प घनत्व का दोगुना होता है।
जिस ताप पर गैसों का अणु गति करना बंद कर दें उस ताप को परम शून्य ताप (Absolute zero) कहा जाता है। परम शून्य ताप का मान –273.15 डिग्री सेल्सियस होता है।
ग्राहम बेल का गैसीय विसरण नियम (Graham's law of effusion or Graham's law of diffusion)- नियत ताप एवं दाब पर गैसों के विसरण की आपेक्षिक गतियां उसके घनत्व अथवा अणुभार के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
ग्राहम बेल ने 1833 में बताया कि सामान्य ताप और दाब पर विभिन्न गैसों के 1 ग्राम अनु का आयतन 22.4 लिटर होता है तथा इस 22.4 लीटर में 6.022×10²³ अणु होते है।
–273 डिग्री पर सभी गैस आयतन घेरती है। चार्ल्स के नियम के अनुसार –273 डिग्री परम शून्य ताप पर गैस का आयतन शून्य हो जाना चाहिए परंतु सभी वास्तविक गैसें इस ताप तक पहुंचने से पहले ही द्रवित हो जाती है।
गैसों का विसरण- घनत्व में अंतर रहते हुए पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध गैसों की आपस में मिलने जुलने की स्वभाविक प्रक्रिया विसरण (diffusion) कहलाती है।

बायो गैस - बायोगैस का मुख्य संघटक मीथेन (65%) गैस  है। घरेलू इंधन में मीथेन का उपयोग होता है इसे मार्श गैस भी कहा जाता है।
ओजोन गैस (O3)- ओजोन गैस पृथ्वी की रक्षा कवच की तरह कार्य करता है ये सूर्य से हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर इस हानिकारक किरण पृथ्वी पर जीवों की रक्षा करती है। क्लोरो फ्लोरो कार्बन के कारण ओजोन परत का क्षय हो रहा है।
लाफिंग गैस (N2O)- लाफिंग गैस नाइट्रस ऑक्साइड को सूंघने से उत्तेजना उत्पन्न होती है और हंसी आने लगती है अतः इस गैस को हास्य गैस भी कहा जाता है प्रयोगशाला में नाइट्रस ऑक्साइड गैस अमोनियम नाइट्रेट को गर्म करके अथवा सोडियम नाइट्रेट और अमोनियम सल्फेट के मिश्रण को 200 डिग्री सेंटीग्रेट पर गर्म करके बनाया जाता है।
प्राकृतिक गैस- प्राकृतिक गैस हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है इसका प्रयोग इंधन के तौर पर किया जाता है।
प्रोड्यूसर गैस (CO+N2)- प्रोड्यूसर गैस का उपयोग ईंधन की रूप में लोहे तथा काँच की भट्ठियों, भभकों और गैस इंजनों को गरम करने में किया जाता है। कोयले के उत्तापदीप्त तल पर भाप और वायु के मिश्रण के प्रवाह से प्रोड्यूसर गैस बनती है। इसमें कार्बन मोनोक्साइड, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइ-आक्साइड और मेथेन रहते हैं।
ट्यूब के अंदर अक्रिय गैस आर्गन के साथ पारे के वाष्प साथ बहुत कम दाब पर भरी होती है।
द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG)- द्रवित पेट्रोलियम गैस का प्रमुख संगठन आइसो ब्यूटेन और प्रोपेण है। इसका उपयोग घरेलू ईंधन हेतु किया जाता है । LPG के रिसाव के पहचान हेतु इस में दुर्गंध युक्त पदार्थ मिथाइल मरकैप्टन मिलाया जाता है।
वाहन प्रदूषकों में सबसे प्रदूषक कार्बन मोनो ऑक्साइड एवं लेड है।

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