BHARAT GK Whatsapp Group में जुड़े सिर्फ ₹20 प्रति माह में और पाएं GK के हर प्रश्न का उत्तर। ग्रुप में जुड़ने के लिए 9470054276 पर ₹20 का Paytm करें और इसी नंबर पर पेमेंट का स्क्रीनशॉट भेजें।

महाजनपद | Mahajanapadas in Hindi


महाजनपद | Mahajanapadas in Hindi :

प्राचीन भारत मे राज्य या प्रशासनिक इकाईयों को महाजनपद कहते थे। महाजनपद का काल 600 से 300 ई० पूर्व माना जाता है। अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र में 16 महाजनपद की जानकारी मिलती है। जनपद में दो प्रकार के राज्य होते थे, गणतंत्र और राजतंत्र। गणतंत्र में वज्जि सबसे प्रमुख था तथा राजतंत्र में मगध, वत्स, अवंति तथा कौशल प्रमुख थे।

16 महाजनपद :

1. अंग महाजनपद – अंग की राजधानी चंपा थी, प्राचीन नाम - मालिनी पहचान - भागलपुर तथा मुंगेर, निर्माणकर्ता- महागोविंद।
2. मगध महाजनपद – राजधानी राजगृह थी। यह राज्य 5 पहाड़ियों से घिरा हुआ था। शासक बिंबिसार ने अंग के शाषक ब्रह्मदत्त को परास्त कर मगध में मिला लिया।
3. वज्जि महाजनपद – राजधानी मिथिला थी। सबसे शक्तिशाली लिच्छवी था। राजधानी वैशाली पहचान - मुजफ्फरपुर के बसाढ़ जिला। यह विश्व का सबसे पुराना गणतंत्र है। जबकि विदेह की पहचान नेपाल के जनकपुर से होती है।
4. मल्ल महाजनपद – राजधानी - कुशीनगर, पहचान - देवरिया जिला के केशिया। महात्मा बुद्ध का 483 ईसा पूर्व में यहां देहांत हुआ था।
5. काशी महाजनपद – राजधानी - वाराणसी। काशी और कौशल में संबंध - कौशल नरेश कंस की सफलता अजातशत्रु के समय काशी मगध का अंग बन गया।
6. कोसल महाजनपद– राजधानी श्रावस्ती।
7. वत्स महाजनपद – राजधानी - कौशांबी, हस्तिनापुर के शाषक निचक्षु।
8. कुरु महाजनपद – राजधानी इंद्रप्रस्थ थी।
9. पांचाल महाजनपद – राजधानी - अहिच्छत्र, दक्षिण की काम्पिल्य।
10. मत्स्य महाजनपद – राजधानी विराटनगर (राजस्थान)।
11. शूरसेन महाजनपद – राजधानी - मथुरा।

12. अश्मक या अस्सक महाजनपद – राजधानी - पोतन। यह दक्षिण भारत भारत का एकमात्र राज था।
13. अवंती महाजनपद – इसकी दो राजधानी थी, उज्जैनी तथा माहिष्मती।
14. गांधार महाजनपद – राजस्थानी - तक्षशिला, वर्तमान पेशावर।
15. कंबोज महाजनपद – रायपुर का हाटक, यह क्षेत्र उच्च किस्म के घोड़े के लिए विख्यात था।
16. चेदि महाजनपद – राजस्थानी - सूक्तिमति, वर्तमान - बुंदेलखंड।वज्जि संघ सबसे बड़ा होने के साथ यहां न्यायालय की संख्या 8 थी।
महाजनपदों के विनाश का मुख्य कारण उच्च पदों का वंशानुगत होना माना जाता है।

मगध महाजनपद

मगध  प्राचीन शासक वृहदत थे, राजधानी - गृहब्रज। इसके पुत्र जरासंघ सबसे शक्तिशाली शासक हुए। इसे महाबली, महाबहु तथा देवेंद्र कहा गया है। कृष्ण ने भीम की सहायता से मल्ल युद्ध में जरासंध का वध कराया। अंतिम शासक रिपुंजय थे इनकी हत्या इनके मंत्री कुलीग ने कर दिया और पुत्र बालक को गद्दी पर बैठाया। इनके सामंत भट्टीय ने बालक की हत्या कर अपने पुत्र बिंबिसार को मगध की गद्दी पर बैठाया ये हर्यक जाति के थे इनका वंश हर्यक वंश कहलाया। 544 ईसा पूर्व बिंबिसार मगध की गद्दी पर बैठा और 492 ईसा पूर्व तक शासन किया। इन्होंने विवाह पद्धति के आधार पर मैत्री संबंध स्थापित किया। इन्होंने चार शादियां की।
  1. चेतक की पुत्री चेतना या छलना।
  2. कौशल नरेश  की बहन महाकौशला (दहेज में काशी मिला)।
  3. पंजाब के भद्र कुल की राजकुमारी क्षेमा
  4. विदेह राजकुमारी वासवी।

महावज्ञ में बिंबिसार के 500 रानियों का उल्लेख है। बिंबिसार साम्राज्य विस्तार के क्रम में अंग पर आक्रमण किया और शासक ब्रम्हदत्त को परास्त कर अंग को मगध में मिला लिया। अवंती के शक्तिशाली होने के कारण बिंबिसार अपने राज्य से जीवक को अवंती नरेश प्रद्योत के दरबार में भेजकर संबंध स्थापित किया।
बिंबिसार बुद्ध के समकालीन थे तथा बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया। बिंबिसार ने  महात्मा बुद्ध को बेलूवन नामक उद्यान दान में दिया। इनके समय कर सामान्यता कर 1/16 था। बिंबिसार धर्म राज के नाम से विख्यात थे। इनके समय प्रसिद्ध वास्तुकार महागोविंद रहते थे। 52 वर्षों तक शासन करने के पश्चात पुत्र अजातशत्रु ने इनका वध कर सत्ता ले लिया। अजातशत्रु 493 से 407 ई० पूर्व तक शासन किया। ये कुलीग के नाम से जाने जाते थे। साम्राज्य विस्तार के क्रम में सर्वप्रथम कौशल नरेश ने प्रसेनजीत को परास्त किया और उनकी पुत्री वजीरा से विवाह किया तथा काशी पुनः वापस मिला। तत्पश्चात अंग को अपने साम्राज्य में मिलाया।

अजातशत्रु

अजातशत्रु ने वज्जि संघ पर नियंत्रण हेतु दो हथियारों का उपयोग किया रथ भूषण तथा महाशिला कंटक। अवन्ति के आक्रमण से बचने के लिए राजगीर में एक किला का निर्माण करवाया। पहले यह जैन धर्म को मानते थे बाद में बौद्ध धर्म को अपना लिया।
अजातशत्रु के शाषन के 8वें वर्ष (483 ईसा पूर्व) पहली बौद्ध संगति का आयोजन राजगीर की सप्तकर्णी गुफा हुआ।
अजातशत्रु 32 वर्ष तक शासन किया।
407 ईसा पूर्व में उनके पुत्र उदयन ने उनकी हत्या कर सत्ता संभाला तथा 407 से 444 ईसा पूर्व तक शासन किया।
ये शासक बनने से पहले चंपा के गवर्नर थे। उदयन पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया और यहां चैत्यगृह का निर्माण करवाया।

उदयन की हत्या अवंती नरेश के गुप्तचर के द्वारा किया गया।
इनके 3 पुत्र थे अनिरुद्ध, मुंडक, नाग दशक। तीनों मिलकर 444 ईसा पूर्व से 412 इसापुर तक शासन किया।
इस वंश के अंतिम शासक नागदशक थे । इनके सामंत शिशुनाग ने इनका अंत करके शिशुनाग वंश की स्थापना किया(412 से 344 ईसा पूर्व)। शिशुनाग को पुराण में क्षत्रिय कहा गया है तथा महावंश में लिच्छवी राजा के वेश्या से उत्पन्न संतान बताया गया है। सम्राज्य विस्तार की क्रम में अवंती वर्धन को परास्त किया तत्पश्चात वत्स और कौशांबी को अपने अधीन किया। इन्होंने वैशाली को दूसरी राजधानी बनाया इन्ही के समय वैशाली वैभव का केंद्र था।
शिशुनाग की मृत्यु के बाद उनका पुत्र कालाशोक या ककवर्ण वैशाली से पुनः पाटलिपुत्र आया। कालाशोक को 336 ईसा पूर्व में मार दिया गया। इनके दशों पुत्र ने 22 वर्षों तक शासन किया। अंतिम शासक नंदिवर्धन था।


Post a Comment

0 Comments