July 2017 - BHARAT GK - GK in Hindi

28 July 2017

वैदिक काल | Vedic period in Hindi

वैदिक काल | Vedic period in Hindi :

Girl reading a book

वेदों से जानकारी मिलने के कारण इस काल को वैदिक काल कहते हैं। इसका समय 1500 से 600 ईसा पूर्व माना जाता है। वैदिक काल के प्रवर्तक आर्य थे इसलिए इस सभ्यता को आर्य सभ्यता भी कहते हैं। संस्कृत में आर्य शब्द का अर्थ श्रेष्ठ या उत्तम होता है। पंडित गंगानाथ झा के अनुसार आर्य का निवास स्थान ब्रह्म प्रदेश या कुरुक्षेत्र था। बाल गंगाधर तिलक के अनुसार आर्य का निवास स्थान उत्तरी ध्रुव, स्वामी दयानंद के अनुसार तिब्बत, मैक्स मूलर के अनुसार मध्य ऐशिया का बैक्ट्रिया है। आर्य के भारत में आक्रमण की जानकारी वेदों से होती है। वेद संस्कृत के विद् धातु से बना है जिसका अर्थ जानना होता है जबकि वेदों का सामान अर्थ ज्ञान से है। वेद को श्रुति भी कहा गया है। लेखनी कला के विकास के पहले वेद को सुनकर ही याद किया जाता था। वेद चार हैं :
  1. ऋग्वेद (Rigveda)
  2. सामवेद (Samaveda)
  3. यजुर्वेद (Yajurveda)
  4. अथर्ववेद (Atharvaveda)

ऋग्वेद (Rigveda)


सबसे प्रचीन वेद ऋग्वेद है इसकी रचना लगभग 1500 से 1200 ईसापूर्व संभवत: गंगा एवं यमुना के तटीय मैदान में हुई। वेदों की रचना ऋषि कुल तथा उस समय के विदुषी महिलाओं के द्वारा किया गया। वेदों की रचना में योगदान विश्वामित्र, रामदेव, अगस्त ऋषि, भारद्वाज तथा उनकी वंशजों ने दिया तथा महिलाओं में लोपामुद्रा, विश्व तारा, बाला तथा भोसा प्रमुख है। ऐसा माना जाता है कि लगभग 12 ऋषि कुलों के द्वारा इसकी रचना की गई।

ऋग्वेद में 10 मंडल तथा सूक्तों की संख्या 1017+11 है। इसमें 1017 मौलिक तथा 11 बाद में जोड़ा गया है तथा 10 मंडलों में 2, 3, 4, 5, 6, 7 मौलिक तथा 1, 8, 9, 10 बाद में जोड़ा गया है। तीसरे मंडल के रचनाकार महर्षि विश्वामित्र को माना जाता है। विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र की रचना किया यह सूर्य की उपासना पर आधारित है। ऋग्वेद के तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र का उल्लेख है। सातवां मंडल की रचनाकार वशिष्ठ थे इसमें ही दसराज्ञों के युद्ध का उल्लेख है। ऋग्वेद में 10552 या 10600 मंत्रों का उल्लेख है। दसराज्ञ युद्ध परुषणी नदी के तट पर विश्वामित्र की मंत्रणा पर पर दसराज्ञ तथा भरत कुल के राजा सुदास के बीच हुआ था। ऋग्वेद के दसवें मंडल में पुरुष सूक्त का वर्णन है। इसी में चारों वर्णों का उल्लेख किया गया है। ऋग्वेद में पाठ करने वाले पुरोहित को होत्रि कहा जाता है। ऋग्वेद के दो ब्रह्मण है, तेत्रीय ब्रह्मण और कौशिकी ब्रह्मण दोनों की रचनाकार महिदास एवं उनके वंशज थे।

सामवेद (Samaveda)


ऋग्वेद के बाद सामवेद का स्थान आता है। सामवेद से ही संगीत का विकास हुआ है। साम का अर्थ लय या ताल होता है। सामवेद में वेद में 18010 ऋचाएँ है। सामवेद पद्य में लिखा गया है। सामवेद का गायन सोमयज्ञ के समय उद्गाता करते थे। इस वेद के चार ब्रह्मण है, पंचवीस, षडविष, जेमिनीय तथा क्षादोग्य। पंचवीस को तांड महाब्रह्मण कहते हैं। इस ब्रह्मण में यज्ञ अनुष्ठान का वर्णन है। जैमिनीय ब्राह्मण को तलवकार ब्राह्मण कहते हैं।

यजुर्वेद (Yajurveda)


तीसरा स्थान यजुर्वेद का आता है यह कर्मकांड का वेद  है इसे गद्य और पद्य दोनों में लिखा गया है इसके रचनाकार महर्षि पतंजलि के ऋषि कुल द्वारा किया गया। यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद। कृष्ण यजुर्वेद के चार संहिता हैै तथा शुक्ल यजुर्वेद का केवल एक संहिता है। कृष्ण यजुर्वेद में यज्ञ विधान का वर्णन है जबकि शुक्ल यजुर्वेद में प्रार्थना का वर्णन है। शुक्ल यजुर्वेद के महत्वपूर्ण शतपथ ब्रह्मण है और कृष्ण यजुर्वेद के तेत्रेय ब्रह्मण है।

अथर्ववेद (Atharvaveda)


चौथा वेद अथर्ववेद है इसके रचनाकार अथर्वा ऋषि थे। इसके 20 भाग तथा 711 सूक्त और 600 मंत्र है। अर्थवेद का महत्वपूर्ण ग्रंथ गोपथ है। अथर्व वेद में कर्मकांड, जादू टोना, रोग निवारण तथा जन्म-मरण का वर्णन है।

वेदांग (Vedangas)



चारों वेद के बाद वेदांग आते हैं इसकी संख्या छः है - शिक्षा कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष, व्याकरण।
1. व्याकरण - व्याकरण में पाणिनि का अष्टाध्याई सबसे प्रमुख है। अष्टाध्याई पर पतंजलि ने भाष्य नामक टीका लिखा।
2. निरुक्त - इसमें वैदिक शब्द की उत्पत्ति का वर्णन है।
3. छंद - इसकी रचना वेद की ठीक-ठीक उच्चारण करने के लिए किया गया है।
4. ज्योतिष - इसमें खगोल विज्ञान और शुभ घड़ी में यज्ञ संपन्न करने के लाभ का वर्णन है।
वास्तविक यजुर्वेद शुक्ल को कहा जाता है।

दर्शन



हिंदू दर्शन छः है :–

  1. 1. सांख्य दर्शन - कपिल मुनि
  2. 2. योग दर्शन - पतंजलि
  3. 3. वैशेषिक दर्शन - कणाद
  4. 4. मीमांसा दर्शन - जैमिनी
  5. 5. न्याय दर्शन - गौतम
  6. 6. वेदांत या उत्तर मीमांसा

वैदिक काल की सामाजिक व्यवस्था


ऋग्वेद में 21 नदियों का उल्लेख हुआ है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सिंधु नदी तथा सबसे पवित्र सरस्वती नदी है। ऋग्वेद में गंगा का एक बार तथा यमुना का तीन बार प्रयोग हुआ है तथा सागरों में अरब सागर का उल्लेख हुआ है।
आर्य भारत में कई जनों में महत्वपूर्ण भारत एवं कुरु था इनके बीच रावी नदी के जल को लेकर दशराज्ञ का युद्ध हुआ था। युद्ध में भरत कुल के राजा सुदास के जीत तथा कुरु कुत्स की हार हुई। कुरु का नेतृत्व विश्वामित्र ने किया तथा भरत का नेतृत्व वशिष्ठ ने किया था।
आर्य के पश्चात कुरु और भरत मिलकर एक वंश चलाया जिसका नाम  "कुरु" हुआ। कुरु ने पांचाल के साथ मिलकर गंगा के तट पर एक क्षेत्र स्थापित किया यह आर्यावर्थ कहलाया। दशराज्ञ का युद्ध आर्यों के बीच हुआ परंतु मुख्य दुश्मन द्रविड़ थे इन्हें दास बनाया गया।
आर्य मुख्यता पशुपालक थे और गायों को लेकर युद्ध होता था क्योंकि विनिमय का माध्यम गाय ही था।
प्रिय पशु घोड़ा था, जीवन ग्रामीण था। ये लोग मिट्टी के घरों में रहते थे। कृषि गौण व्यवसाय तथा गाय मुख्य व्यवसाय था। पुरोहितों को दान में गाय दिया जाता था। राजा प्रजा से सुरक्षा के बदले बली नामक कर लेते थे। यह अन्न के रूप में होता था।


ऋग्वेद की सबसे प्राचीन संस्था विदथ थी । राजा पर नियंत्रण दो सभाएं करती थी। ऋग्वेद में सभा का छः बार तथा समिति का आठ बार प्रयोग हुआ है। ऋग्वेद में पुरोहित, सेनानी तथा ग्रामिन का उल्लेख हुआ है। पुरोहित युद्ध भूमि में जाते थे, ग्रामीण प्रशासनिक कार्य देखते थे। गुप्तचर को स्पर्स कहा जाता था। समाज का स्वरुप पितृसत्तात्मक था। समाज का राजनीतिक ढांचा का आरोही क्रम इस प्रकार है :
कुल → ग्राम  विश  जन  राष्ट्र
कुल के प्रधान पुरुष होते थे इसके बाद ग्राम का स्थान आता था आता था। ग्राम का मुखिया ग्रामिणी कहलाता था। विश का प्रधान विशवपति कहलाते थे। विश मिलकर जन का निर्माण होता था। जन का प्रधान राजा या राजन होते थे। ऋग्वेद में जन शब्द का प्रयोग 275 तथा विश का 170 बार हुआ है। व्यवसाय के आधार पर जाति का विभाजन होता था।

व्यवसाय के संबंध में ऋग्वेद में कहा गया है कि "मैं कवि हूं, पिता वैद्य हैं तथा माँ अन्न पीसने वाली है"

ऋग्वेद में चारागाह के अधिकारी को बृहस्पति, परिवार के प्रधान को कुलम, लड़ाकू दल के प्रधान को ग्रामीण कहा जाता था।

वैदिक काल की विवाह पद्धति


विवाह का मुख्य उद्देश्य संतान प्राप्ति थी। सामान्यता एक पत्नी रखने की व्यवस्था थी पर कुलीन एक से अधिक पत्नी रख सकते थे। सती प्रथा का प्रचलन नहीं था लेकिन अंतरजातीय विवाह होती थी। विवाह स्वयंवर पद्धति पर आधारित थी अनार्य से विवाह वर्जित था। विवाह में मिला उपहार को "वहतू" कहा जाता था। नियोग प्रथा का प्रचलन था इस प्रथा से विधवा महिलाएं पुत्र की प्राप्ति हेतु ने देवर से विवाह कर सकती थी। विवाह पद्धति को दीर्घात्मा ऋषि ने प्रारंभ करवाया था। शतपथ ब्राह्मण में पत्नी को पति की अर्धांगिनी कहा गया है। ऋग्वेद में महिलाओं की स्थिति अच्छी थी पर राजनीतिक में उनकी भूमिका नहीं होती थी। संपत्ति पर महिलाओं का अधिकार नहीं होता था।
ऋग्वेद में नमक का उल्लेख नहीं हुआ है। गाय के लिए अधन्या (नहीं मारने योग्य) शब्द का प्रयोग हुआ है लेकिन विवाह तथा विशेष अवसर पर गाय का वध किया जाता था। उस समय का मुख्य पेय सोमरस था यह भुजवन पर्वत से किया जाता था। सोमरस का ऋग्वेद 9वें मंडल में वर्णन है। ऐसा माना जाता है कि विवस्तव के पुत्र मनु ने सोमरस तैयार किया था। खास करके सोमरस का उपयोग यज्ञ के समय किया जाता था। उस समय के आर्य सूती एवं ऊनी दोनों वस्त्र पहनते थे। आभूषण का प्रयोग स्त्री तथा पुरुष दोनों करते थे।
ऋग्वेद में नाई को वक्ता कहा गया है। गाय मुख्य व्यवसाय होने के कारण इसे अष्टकर्णी कहा गया है। ऋग्वेद में कृषि का उल्लेख 24 बार हुआ है व्यापारी के लिए "पनी" शब्द का प्रयोग हुआ है। धातु के लिए "निष्क" का प्रयोग हुआ है ताम्बा केलिए अयस का प्रयोग हुआ है।
ऋग्वेद में उस समय के पृथ्वी, अंतरिक्ष तथा आकाश के देवताओं का उल्लेख है।  इंद्र को विश्व स्वामी, युद्ध का देवता तथा पुरंदर भी कहा गया है। इंद्र का प्रमुख अस्त्र वज्र या पन्नी इंद्रानी थी। वरुण को जगत नियामक, देवताओं का पोषक और ऋतू को नियंत्रित करने वाला कहा गया है। इन्हें सूर्य का निर्माता भी कहा गया है। अग्नि का ऋग्वेद में 200 सूक्तों में वर्णन है। पृथ्वी की देवताओं में अग्नि का विशेष महत्व है। रुद्र के सिवा सभी देवताओं को मंगलकारी माना गया है। ऋग्वेद में कृषि योग्य भूमि को उर्वरा या क्षेत्र कहा जाता था। 6, 8, 12 बैलों से हल जोत जाता था। ऋग्वेद में "अर" शब्द का उल्लेख है इसका अर्थ हल था। सिंचाई नहर या कूप से होता था कृषि का प्रयोग 24 बार हुआ है।


27 July 2017

सिंधु घाटी सभ्यता | Indus Valley Civilization or Harappan Civilisation

सिंधु घाटी सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता के संबंध में सर्वप्रथम जानकारी 1826 चार्ल्स मैसेन ने दिया। विधिवत रूप से हड़प्पा की खुदाई 1921 में जॉर्ज मार्शल के नेतृत्व में दयाराम साहनी ने किया तथा मोहनजोदड़ो की खुदाई जॉन मार्शल के नेतृत्व में 1922 में रखाल दास बनर्जी ने किया। रेडियोकार्बन C14 के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता की सर्वमान्य तिथि 2350 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व मानी जाती है। सिंधु घाटी सभ्यता या सैंधव सभ्यता को प्रागैतिहासिक अथवा कांस्य युग में रखा गया है।
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हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना

हड़प्पा से मोहनजोदड़ो की दूरी 483 किलोमीटर है। हरप्पा सभ्यता पूरब से पश्चिम 600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण से 1100 किलोमीटर है। हड़प्पा सभ्यता का कुल क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किलोमीटर है। इस सभ्यता का समय ह्वीलर के अनुसार 2500 ईसा पूर्व से 1600 ईसा पूर्व माना जाता है। इसके पूर्वी भाग को नगर किला तथा पश्चिमी भाग को दुर्ग कहा जाता जाता है। हड़प्पा से 12 अन्नागार के साक्ष्य मिले हैं, 14 भट्टी के अवशेष मिले हैं। हड़प्पा से ही नृत्यांगना की मूर्ति निर्वस्त्र पुरुष का धर R73 पाया गया है। समाधि को डोलमन कहा जाता था। हड़प्पा से स्वास्तिक, कपास, तांबा का दर्पण, जौ तथा गेहूं के अवशेष तथा चना और सरसों के साक्ष्य मिले हैं। हड़प्पा से 36510 मोहरे भी प्राप्त हुए हैं। स्वस्तिक का चिन्ह हड़प्पा सभ्यता की देन है। हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को पिगट ने जुड़वा राज्य कहा राज्य कहा। इस सभ्यता का विनाश सुमेरियन सभ्यता से हुआ।

मोहनजोदड़ो (पाकिस्तान)

मोहनजोदड़ो से एक विशाल स्नानागार भी मिला है इसकी लंबाई 11.88 मीटर × 7.01 मीटर है। जल की आपूर्ति कुंआ से होती थी। अन्नागार के दक्षिण में एक सभा भवन भी मिला है जो 20 स्तंभों पर खड़ा है। मोहनजोदड़ो को मृतकों का टीला या सिंध नाग ( Mound of the Dead Men ) कहा जाता है। मोहनजोदड़ो से 6 भट्टियों के के अवशेष 56% मृदभांड सेलखड़ी से निर्मित 1398 सिक्का मिला है। मोहनजोदड़ो से ही घोड़े़े के दांत मिला है। इस सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण चीज नगर नियोजन था। इसका मुख्य सड़क 33 फीट का है। मोहनजोदड़ो से शतरंज की गोटी मिला है। माना जाता है कि मोहन जोदड़ो का 7 बार विनाश तथा 7 बार निर्माण हुआ।

चनहुदड़ो (पाकिस्तान)

चनहुदड़ो की खुदाई N. G. मजूमदार के द्वारा किया गया यह एक औद्योगिक नगर था यहां से पक्की ईंटों का मकान मिला है, यहां से मकाऊ का कारखाना, अर्धवृत्ताकार मंदिर, मिट्टी का हल, जौ के दाने तथा लघु नारी की मूर्तियां भी मिली है।चनहुदड़ो से लिपिस्टिक, दर्पण, आभूषण में कंठहार, कर्णफूल, हौसली, कड़ा, टीका तथा सोने का कंगना मिला है।

रोपड़ (पंजाब)

स्वतंत्रता के बाद सर्वप्रथम खुदाई पंजाब के रोपड़ में हुआ। रोपड़ से मनुष्य के साथ कुत्ता को दफनाने का प्रमाण मिला है। इससे पहले यह पाषाण काल के बुर्जहोम से मिला था। सिंधु सभ्यता का पतन का अवशेष हरियाणा के भगवान पूरा से मिला है।

राखीगढ़ी (हरियाणा)

मोहन जोदड़ो तथा हड़प्पा के बाद सबसे विकसित नगर हरियाणा का राखीगढ़ी था। राखीगढ़ी का उत्खनन 1997-1999 ई. के दौरान अमरेन्द्र नाथ द्वारा किया गया। राखीगढ़ी से प्राक्-हड़प्पा एवं परिपक्व हड़प्पा युग के प्रमाण मिले हैं।

कालीबंगा (राजस्थान)

कालीबंगा से जुता हुआ खेत का साक्ष्य, सात हवन कुंड, भूकंप आने का साक्ष्य तथा एक साथ दो फसल उगाने का साक्ष्य मिला है।
लोथल (गुजरात)
लोथल से सबसे प्राचीन बंदरगाह मिला है इस बंदरगाह से मिस्र एवं मोसोपोटामिया से व्यापार होता था। लोथल से ही चावल तथा रंगपुर से भूसी के अवशेष मिले हैं।

गुजरात के सूतकोटा से पत्थरों के भवन, नियमित आवास, कब्रिस्तान तथा घोड़ों की हड्डी मिला है जबकि धौलावीरा से घोड़े की कलाकृति मिला है।
सिंधु सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल कच्छ का बेसलपुर है।
गुजरात के कंताशी से लंबी सुराही, मिट्टी का खिलौना गाड़ी, दो अंगूठियां तथा तांबे की चूड़ी प्राप्त हुआ है। सौराष्ट्र से लाल तथा काला मृदभांड एवं हाथी के अवशेष मिले हैं। महाराष्ट्र के देमा बाद से युवा पुरुष का शव मिला है।

सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषताए

इस सभ्यता का सबसे महत्वपूर्ण खेल पासा था। समाज पितृसत्तात्मक था और 4 वर्गों में विभक्त था - विद्वान, योद्धा, व्यापारी, श्रमिक। समाज के विभाजन का आधार आर्थिक था। स्त्री-पुरुष धोती एवं साल का प्रयोग करते थे तथा यातायात के लिए बैलगाड़ी प्रयोग में लाया जाता था। तांबा तथा कांसा का उपकरण प्रयोग किया जाता था। लोग नाव से परिचित थे।
सिंधु सभ्यता त्रिभुजाकार था। अपवाद स्वरुप बनवारी जो चतुर्भुजाकर था। बनबारी में जल निकासी की व्यवस्था नहीं थी। सिंधु घाटी सभ्यता का प्राचीन नाम मेहूला था। सिंधु घाटी सभ्यता के निवासी ऊनी और सूती वस्त्रों का प्रयोग किया करते थे। यह लोग नाव से भी परिचित थे।
इन लोगों का प्रमुख देवी-देवता मातृ देवी तथा शिव थे। पवित्र वृक्ष पीपल तथा पक्षी में बत्तख था। कुंवर वाला सांड इन लोगों के लिए पूज्यनीय था। स्त्रियों की मिट्टी की मूर्तियां अधिक संख्या मिलने के कारण यह अनुमान लगाया जाता है कि सिंधु घाटी सभ्यता का समाज मातृसत्तात्मक था। देवी देवताओं के संबंध में सबसे अधिक जानकारी मोहनजोदड़ो से मिली है। ऋग्वेद में सिंधु सभ्यता को हरयुपिया कहा गया है। सबसे अच्छी किस्म का जौ बनवाली से मिला है। सिंधु सभ्यता के प्रवर्तक सुमेरियन थे। ह्वीलर के अनुसार इसके प्रवर्तक दास एवं दस्यु थे।

सिन्धु घाटी सभ्यता की लिपि

सिन्धु घाटी सभ्यता की लिपि की जानकारी 1856 में मिली पूरी जानकारी 1923 में मिली। सिन्धु घाटी सभ्यता की लिपि चित्रात्मक लेकिन भाव सूचक था। इस लिपि में 64 मूल चीन तथा 250 से 400 तक अक्षर था। यह लीपी आरमाइक तथा खरोष्ठी लिपि की तरह दाएं से बाएं लिखी जाती थी। इसे पढ़ने का दावा एस आर राव तथा केएन वर्मा ने किया।

सिन्धु घाटी सभ्यता का व्यपार

मोसोपोटामिया वासी कपास के लिए 'सिंधु' शब्द का प्रयोग करते थे। यूनानी कपास के लिए 'सिंजल' शब्द का प्रयोग करते थे। व्यापार वस्तु विनियम प्रणाली पर आधारित था प्रतीक के रूप में सांकेतिक मुद्रा मुहर या सेलखड़ी का प्रयोग किया जाता था। मुहरों पर पर सबसे अधिक कुंवर वाले सांड का चित्र मिला है। यह मुहर वर्गाकार तथा बेलनाकार होते थे। सबसे अधिक मुहरें मोहन जोदड़ो तथा हड़प्पा से मिला है।सबसे महत्वपूर्ण सीप उद्योग था। व्यापार का प्रधान केंद्र हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो था। व्यापार जल एवं स्थल दोनों मार्गो से होते थे। उस समय का प्रमुख बंदरगाह का प्रमुख बंदरगाह उल-बिनमूल तथा मगन था। माप के लिए बाट का प्रयोग किया जाता था। बाट दशमलव गुणज पद्धति पर आधारित था।
ये लोग निम्न वस्तुओं का आयात करतेे थे :-
  • अफगानिस्तान और ईरान से टीन तथा चांदी 
  • खेत्री से ताम्बा 
  • ईरान और भारत से सोना 
  • महाराष्ट्र से नीलमणि 
  • दक्षिण भारत से शंख 
सबसे अधिक व्यापार मध्य एशिया से करते थे।

सिंधु घाटी सभ्यता का पतन

सिंधु सभ्यता के पतन का निम्नलिखित कारण माने जाते हैं :–
  • सिंधु नदी में बाढ़ का आना।
  • बाह्य आक्रमण
  • प्लेग महामारी
  • जलवायु का परिवर्तन होना 
सबसे महत्वपूर्ण कारण बाढ़ आने है क्योंकि बाढ़ के कारण मोहनजोदड़ो का 7 बार विनाश हुआ।

26 July 2017

पाषाण युग | Stone Age history in Hindi

पाषाण युग | Stone Age History in Hindi :

Stone age
पाषाण का अर्थ पत्थर होता है। मानव का पत्थरों पर आश्रित रहने के कारण इस काल को हम पाषाण काल कहते है। पाषाण काल को हम तीन भागों में बांटकर अध्ययन करते हैं –
1. पुरा पाषाण काल
2. मध्य पाषाण काल
3. नव पाषाण काल

पुरा पाषाण काल |Old stone age in Hindi

पुरापाषाण सभ्यता का विकास अति नूतन युग (Pliocene) में हुआ। इसी युग में घोड़ा हाथी तथा गाय का अभ्युदय घोड़ा हुआ। मनुष्य के पूर्वजों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ और मानव शरीर का अवशेष भी कहीं से प्राप्त नहीं हुआ है सिर्फ छोटा नागपुर के पठार से पत्थर के उपकरण प्राप्त हुआ। लगभग 100000 ईसापूर्व जलवायु में परिवर्तन हुआ और जो उकहटिबंधीय घने जंगलों से बाहर आए वह Australopithecus कहलाए और जो जंगल में ही रह गए वह Ramapithecus कहलाये। विकसित मानव को ही Pithecanthropus या Homo erectus कहा जाता है। अति नुतन काल के अंत के मानव को Neanderthal कहा जाता है और आधुनिक मानव को Homo sapiens कहा जाता है।भारत के मूलनिवासी को Australopithecus और निगरेटो से जोड़ा जाता है। काकेसस का संबंध आर्य से जोड़ा जाता है। भारत में मानव का पहला कंगाल इलाहाबाद के निकट सराय नाहर से प्राप्त हुआ। पाषाण सभ्यता का अनुसंधान 1935 में डी केरा और पिटर्सन ने किया इनके अनुसार मानव सभ्यता का विकास अति नूतन युग में हुआ।
पाषाण के उपकरण के भिन्नता के अनुसार तीन भागों में बांटा गया है
  • निम्न पुरापाषाण काल (250000 - 100000 वर्ष पूर्व)
  • मध्य पुरापाषाण (100000- 40000 वर्ष पूर्व)
  • उत्तर पुरापाषाण (40000-10000 वर्ष पूर्व)
निम्न पुरापाषाण काल (250000-100000 वर्ष पूर्व) - निम्न पुरापाषाण का उपकरण पंजाब के सोहन घाटी से मिला है इसीलिए इसे सोहन संस्कृति भी कहा जाता है। डी केरा के अनुसार आदिमानव पंजाब में दक्षिण से आए।

मध्य पुरापाषाण (100000-40000 वर्ष पूर्व) - मध्य पूर्व पाषाण संस्कृति का विशेष उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से मिला है इस समय के उपकरण को माइक्रो लिथ कहा जाता है।

उत्तर पुरापाषाण (40000-10000 वर्ष पूर्व) - उच्च पुरापाषाण संस्कृति का उपकरण पंजाब तथा मध्य प्रदेश से प्राप्त हुआ है। इस समय के अस्थि निर्मित मातृदेवी की मूर्ति इलाहाबाद के बेलन घाटी से मिली। इस समय लोग कृषि तथा आग से अनभिज्ञ थे।

मध्य पाषाण काल (10000-7000 वर्ष पूर्व)

इस समय के मानव शिकार पर निर्भर थे। येलोग गाय, बैल, भेड़, बकरी का शिकार किया करते थे तथा कृषि की ओर अग्रसर हुए मध्य पाषाण काल के अंत में आग का आविष्कार हो गया था।

नवपाषाण काल | New stone age in Hindi (7000-5000 वर्ष पूर्व)

इस समय के लोग ने स्थाई जीवन को प्राप्त कर लिया था कृषि तथा पशुपालन आरंभ हो गया था तथा मिट्टी से पहिया तथा चाक पर सामान बनाना भी प्रारंभ हो गया था। मानव का अंतेष्टि किया जाना भी प्रारंभ हो चुका था। अंत्येष्टि का प्रमाण कश्मीर के बुर्जहोम से मिला है। यहां पर मानव के साथ कुत्ते को भी दफनाया जाता था। यहां के लोगों का मुख्य पेशा शिकार तथा मछली पकड़ना था इस समय इलाहाबाद की पूर्वी हवा में धान की खेती प्रारंभ हो चुकी थी। सिंध और बलूचिस्तान की सीमा पर स्थित मेहरगढ़ से प्रथम कृषि का साथ मिला है इस समय के मानव उपभोक्ता के साथ-साथ उत्पादक भी बन गए थे तथा चित्रकारी से भी यह लोग परिचित हो चुके थे।


ताम्र पाषाण काल | Chalcolithic (5000 - 3000 ई० पू०)

ताम्र पाषाण काल का समय 5000 से 3000 ई०पूर्व माना जाता है। इस समय के लोग ग्रामीण समुदाय के थे। इसी समय सर्वप्रथम मृदभांड का प्रयोग किया गया। यह काला और लाल रंग में मिलते हैं। इस समय के लोग कृषि कार्य तथा पशुपालन करते थे। प्रमुख फसल गेहूं तथा चावल था सबसे अधिक फसल महाराष्ट्र के नर्मदा घाटी में होता था। इस समय का सबसे बड़ा मानव बस्ती महाराष्ट्र का इमाम गांव था इसी गांव से मातृदेवी की मूर्ति मिली है। ये लोग मातृ देवी की पूजा करते थे। मालवा तथा राजस्थान से सांड की मूर्ति मिली है। इस समय का तांबा राजस्थान के खेतरी से मिला है। इस समय के बस्तियों की कई श्रृंखलाएं मिली हैं। प्राक् हड़प्पा, हड़प्पा संस्कृति तथा हड़प्पा उत्तर संस्कृति। प्राक हड़प्पा संस्कृति का अवशेष कालीबंग, बनवारी तथा कोट डीजी से मिला है। इस समुदाय के लोग सबसे पहले सिंध के मैदान में बसे और यही पर कांसा का ज्ञान प्राप्त कर नगर बसाया। ताम्रपाषाण के लोग सर्व प्रथम प्रायद्वीपीय भारत को अपना केंद्र बनाया। इस समय के लोग जब मृत्यु को प्राप्त करते थे तो उन्हें महाराष्ट्र में उत्तर-दक्षिण तथा दक्षिण भारत में पूर्व-पश्चिम रखा जाता था। इस समय के लोग हल का प्रयोग नहीं करते थे तथा झूम की खेती करते थे। ये लोग लेखनी कला से परिचित नहीं थे। सबसे अधिक औजार मध्य प्रदेश के गडरिया से प्राप्त हुआ है। हड़प्पा पूर्व ग्रामीण सभ्यता केंद्र मेहरगढ़ था।


25 July 2017

प्राचीन भारत के इतिहास के स्रोत | Source of Ancient Indian History in Hindi

प्राचीन भारत के इतिहास के स्रोत | Source of Ancient Indian History in Hindi

इतिहास को तीन भागों में बांटकर अध्ययन करते हैं–
1. प्राग ऐतिहासिक काल
2. आद्द ऐतिहासिक काल
3. ऐतिहासिक काल
प्राग ऐतिहासिक काल - प्राग ऐतिहासिक काल के मनुष्य के जीवन का कोई लिखित विवरण नहीं है। इसके अंतर्गत हम पाषाणकाल को रखतेे हैं। हड़प्पा सभ्यता से पूर्व के काल को प्राग ऐतिहासिक काल कहा जाता है। इसका समय लगभग 3000 ईसापूर्व माना जाता है।
आद्द ऐतिहासिक काल - आद्द ऐतिहासिक काल के अंतर्गत सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक काल को रखते हैं। इसका समय 3000 ईसा ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व माना जाता है। आध ऐतिहासिक काल की जानकारी पुरातात्विक और साहित्यिक दोनों स्रोतों मिलती है।
एतिहासिक काल - 600 ईसा पूर्व से वर्तमान समय के काल को एतिहासिक काल कहते हैं। इस काल से हमें पुरातात्विक, साहित्यिक एवं विदेशी स्रोतों से जानकारी मिलती है।

पुरातात्विक स्रोत

पुरातात्विक स्रोत के अंतर्गत अभिलेख, मुद्रा, स्मारक आते हैं।

अभिलेख

सबसे प्राचीन अभिलेख मध्य एशिया के तुर्की में स्थित बोघजकोई अभिलेख है। यह 1400 ईसा पूर्व का है इस अभिलेख से 4 देवताओं की जानकारी मिलती है मित्र, वरुण, इंद्र और नासत्य। इस से ऋग्वेद की तिथि निर्धारण में मदत मिलती है।
विश्व में अभिलेखों का जनक डेरियस या दारा बाहु या दारा प्रथम को माना जाता है। डेरियस के पर्सीपोलिस अभिलेख से यह जानकारी मिलती है कि सिंध पर इसका इसका अधिपत्य था।
भारत में अभिलेखों का जनक अशोक को माना जाता है। भारत में अशोक के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है जबकि अफगानिस्तान में आरमेइक लिपि तथा पाकिस्तान में खरोष्ठी लिपि में प्रचलित है तथा इरान में ग्रीक लिपि प्रचलित थी। ब्राह्मी लिपि को 1857 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा था। अशोक प्रथम शासक थे जिन्होंने जनता को अभिलेखों के माध्यम से संबोधित किया। समुद्रगुप्त का प्रयाग अभिलेख, राजाभोज का ग्वालियर अभिलेख, कलिंग नरेश का हाथीगुंफा अभिलेख, बंगाल के शासक विजय सेन का देव पारा अभिलेख तथा पुलकेशिन द्वितीय का ईलोह अभिलेख महत्वपूर्ण है। सातवाहन वंश ऐसा वंश है जिसका पूरा इतिहास अभिलेखों पर आधारित है। अभिलेख के अध्ययन को एपी ग्राफी कहा जाता है। प्राचीन तिथि के अध्ययन को पॉलीग्राफी कहते हैं।

मुद्रा

भारत का प्राचीनतम सिक्का आहत सिक्का या पंचमार्क है। साहित्य में इसे दासर्ज़न कहा गया है। यह 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व का है। इस सिक्के पर 5 चिन्ह  मिलते हैं- पेड़, अर्धचंद्र, हाथी, मछली एवं साढ़। आहत सिक्का सबसे अधिक उत्तर प्रदेश एवं मगध से मिले हैं। सिक्कों पर सर्वप्रथम लिखने का कार्य यवनों ने प्रारंभ किया। भारत में सर्वप्रथम स्वर्ण सिक्का इंडो-बैक्ट्रियन ने जारी किया।

मंदिर

भारत में मंदिर तीन शैली में मिलते हैं, नागर शैली, द्रविड़ शैली तथा बेसर शैली। उत्तर भारत में सभी मंदिर नागर शैली में है तथा दक्षिण भारत में द्रविड़ शैली में मिलते हैं। दक्षिण भारत में जिन मंदिरों में दोनों शैलियों का प्रयोग किया गया है उसे बेसर शैली करते हैं। तंजौर का राजा राजेश्वर मंदिर द्रविड़ शैली का सर्वश्रेष्ठ मंदिर है।

साहित्यिक स्रोत

साहित्यिक स्रोतों के अंतर्गत वेद सबसे प्राचीन है। वेद के संकलनकर्ता वेदव्यास है। वेदों से आर्यों की भाषा, धर्म, संस्कृति, समाज तथा इतिहास की जानकारी मिलती है। सबसे प्राचीन ग्रंथ शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ है। ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद है इसमें कुल मिलाकर 10 मंडल 1028 सूक्त है। वैदिक साहित्य के बाद शतपथ ब्राह्मण आता है इसमें कर्मकांडों की जानकारी मिलती है। उपनिषदों की संख्या 12 है वेदांग 6 है।
साहित्यिक स्रोतों में भद्रबाहु द्वारा रचित कल्पसूत्र भी एक है। इसी तरह पाणिनि की अष्टाध्याई, यशु मुनि का निरुक्त महत्वपूर्ण है। समृति में सबसे प्राचीन मनुस्मृति है। इसकी रचना शुंग काल में हुई। इसके व्याख्याकार भरुचि, मेघाकृति तथा गोविंद राज है। मनु ने ही मनु संहिता की रचना किया। यह कानून का आधार माना जाता है। मनु के द्वारा ही यज्ञ प्रारंभ किया गया था। भाग वलय स्मृति के टीकाकार विश्वरूप, विज्ञानेश्वर तथा अपरात हैं। महर्षि बाल्मीकि और वेदव्यास द्वारा दूसरी और चौथी शताब्दी में रामायण और महाभारत की रचना किया गया। सबसे प्राचीन पुराण मत्स्यपुराण है। इसके अलावा विष्णु पुराण, वायु पुराण, भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण महत्वपूर्ण है।
बौद्ध धर्म में त्रिपिटक सबसे महत्वपूर्ण है। सुत्त पिटक विनयपिटक और अभिधम्मपिटक को त्रिपिटक कहा जाता है। हेमचंद्र द्वारा रचित परिशिष्ट परबन, भद्रबाहु का कल्पसूत्र, जिनसेन का आदि पुराण, विशाखा दत्त का मुद्राराक्षस, सोमदेव का कथा सागर, क्षेमेन्द्र का बृहत कथा मंजाली, पदम गुप्त का नवसहसग चरित्र, जया दत्त का पृथ्वी राज विजय, नैऋतुनग का प्रबन चिंतामणि, राजेश्वर का प्रबंध कोश, कात्यायन का गार्गी संहिता, विल्हण का विक्रमादेव चरित्, और संध्याकर नंदी का रामचरित्र से शासकों  की जानकारी मिलती है।

विदेशी स्रोत

विदेशी स्रोतों में दो लेखकों का महत्वपूर्ण योगदान है इरान का डेरियस और यूनान का हेरोडोटस। डेरियस ईरान का राजवैद्य थे। हेरोडोटस को इतिहास का पिता कहा जाता है इन्होंने अपनी पुस्तक हिस्टोरी (The Histories) के माध्यम से ईरान और इराक के मध्य 480 ईसापूर्व के लगभग जो थर्मोपल्ली (Battle of Thermopylae) का युद्ध हुआ था उसका इन्होंने बृहत रूप से वर्णन किया है। सिकंदर के साथ आने वाले लेखकों में नियाकस, आनेसीपीट्स, अइरेस्टो बूलस ने भारत के संबंध में अपने देशवासियों को परिचित कराया। सेल्यूकस के राजदूत मेगास्थनीज द्वारा रचित इंडिका से भारत के सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक जानकारी प्राप्त होती है। यह मूल ग्रंथ के रूप में उपलब्ध नहीं है लेकिन एडीयन, स्ट्रेबो तथा जस्टिन के लेखों में उपलब्ध हैं।
सीरिया एण्टियोकस के राजदूत डायनेक्ट बिंदुसार के दरबार में आए थे। इसी तरह मिस्र नरेश किलेडेलकस के राजदूत डानेशस अशोक के दरबार में आए थे। यूनानी लेखकों द्वारा लिखा गया पिरिपल्स ऑफ द ऐरिप्रिएन्सि से भारत और यूनान के संबंध के बारे में जानकारी मिलती है। टॉलमी का भारत का भूगोल, इटली की नेचुरल हिस्ट्री से भी भारत के संबंध में जानकारी मिलती है।
चीनी स्रोतों के अनुसार  फाह्यान, हेनसांग तथा इतसिंह के लेखों से भारत के सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की जानकारी मिलती है। हेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया तथा शिक्षक के रुप में भी कार्य किया। ये हर्षवर्धन के समय लगभग 629 से 648 ईसा पूर्व भारत आए थे। फाह्यान, चंद्रगुप्त द्वितीय के समय (399 से 414 ई०पूर्व) भारत आए थे। जबकि इत्सिंग चोल के समय भारत आए थे। हेनसांग की प्रमुख कृति सी-यूकी है। इनके के मित्र हवीली ने इनकी जीवनी लिखी।
अरब देशों में अलबरुनी का महत्वपूर्ण योगदान है। ये मोहम्मद गजनबी के समय भारत आए थे। तिब्बती लेखकों में तारानाथ का महत्वपूर्ण योगदान है। इटली यात्री मार्कोपोलो के वृतांत से दक्षिण भारत की जानकारी मिलती है।


24 July 2017

पाल वंश | Pala Empire

पाल वंश | Pala Empire :

Book

पाल साम्राज्य मध्यकालीन भारत का एक महत्वपूर्ण शासन था। बंगाल के अराजकता के कारण जनता द्वारा गोपाल को सिंघासन पर बैठाया गया तथा गोंड को राजधानी बनाकर शासन करना प्रारंभ किया। 
इस वंश के वास्तविक संस्थापक धर्मपाल थे। इन्होंने 750 ई० से 810 ई० तक शासन किया। धर्म पाल प्रतिहार शासक वत्सराज और राष्ट्रकूट शासक ध्रुव से परास्त हुआ।
प्रतिहार जब राष्ट्रकूट से संघर्ष कर रहा था तब धर्मपाल ने कन्नौज पर आधिपत्य कायम कर लिया और चक्रायुद्ध कहां का गवर्नर बना दिया तथा विजय उपलक्ष में कन्नौज में एक सभा का आयोजन किया साथ ही परमेश्वर, महाराजाधिराजा, परम भटनागर, उत्तरापथ भटनागर और उत्तरापथ स्वामी की उपाधि धारण किया। बौद्ध धर्म को मानने के कारण धर्मपाल को परम सौराष्ट्र भी कहा गया है। इनके दरबार में बौद्ध विद्वान हरिभद्र रहते थे। इन्होंने भागलपुर के पत्थर घाट में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किया। उस समय के प्रचार्य दीपांकर श्रीज्ञा थे।


धर्मपाल ने भगवान मन्नारायन के मंदिर के निर्वहन हेतु 4 गाँव की आमदनी दान में दे दिया।
पाल शासक के दरबार में संध्याकर नंदी ने 'रामचरित' की रचना किया तथा चक्रा पानित ने 'चिकित्सा संग्रह' नामक ग्रंथ की रचना किया।
धर्मपाल नालंदा विश्वविद्यालय को 200 गांव की आमदनी दान में दे दिया जबकि हर्ष ने 100 गांव की आमदनी दान में दिया।
धर्मपाल के पश्चात उनके पुत्र देवपाल ने 1810 से 1850 ई० तक शासन किया। ये पाल वंश के सबसे शक्तिशाली शासक हुए। इसने मुंगेर को अपनी राजधानी बनाया। इन्होंने प्रतिहार शासक मिहिर भोज को भी परास्त किया था। बिहार के ओदंतपुरी में बौद्ध मठ का निर्माण करवाया। इन्हीं के समय जावा के शैलेंद्र वंश के बाल पुत्र देव के अनुरोध पर नालंदा में बौद्ध विहार बनाने के लिए पांच गांव की आमदनी दान में दे दिया। बौद्ध विद्वान वीर देव को नालंदा विहार का अध्यक्ष बनाया गया था।
देवपाल के समय अरब यात्री सुलेमान ने भारत की यात्रा किया। सुलेमान ने राष्ट्रकूट और प्रतिहार में देवपाल को सबसे शक्तिशाली कहा और पाल साम्राज्य को रुहमा(धर्म का रक्षक) कहा। इनके समय पाल साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर था।
महिपाल प्रथम को पाल शक्ति का पुनर्स्थापक माना जाता है।
पाल वंश के अंतिम शासक गोविंद पाल को माना जाता है। इस वंश को सेन वंश ने अपने अधीन कर लिया।

23 July 2017

Current Affairs June 2017 in Hindi


  1. जून 2017 में छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन प्रहार चलाया गया।
  2. देश का पहला पहला नेशनल स्किल स्कूल की स्थापना हरियाणा के परवल में किया गया है। 
  3. केंद्र सरकार ने दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यूपी के जेवर में स्थापित किया है। 
  4. महाराष्ट्र सरकार 22 जून 2017 को किसानों की आत्महत्या से प्रभावित होकर कर्मचारियों का एक दिन का वेतन देने की घोषणा किया है।
  5. मणिपुर सरकार जरूरतमंद महिलाओं के लिए 7×24 घंटे हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। 
  6. महाराष्ट्र सरकार 1 जुलाई 2017 से वृक्षारोपण का डाटाबेस तैयार करने के लिए माय प्लांट नामक मोबाइल ऐप लॉन्च लॉन्च किया है। 
  7. मिजोरम सरकार एचआईवी पीड़ित मरीजों के लिए टेस्ट सेवा प्रारंभ किया है। 
  8. सैंज जल विद्युत परियोजना परियोजना का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा किया गया है। 
  9. कतर एयरवेज को विश्व का सर्वश्रेष्ठ एयरलाइंस का पुरस्कार दिया गया है।
  10. ओडिशा के भुवनेश्वर शहर में स्मार्ट सिटी के लिए स्मार्ट जनपथ योजना योजना प्रारंभ किया गया है। 
  11. केरल का पूर्ण योगा ग्राम का नाम कुन्नामत है।
  12. केंद्र सरकार तपेदिक रोग के उपचार हेतु सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है।
  13. 21 जून 2017 को लंदन उच्च न्यायालय द्वारा टेनिस खिलाड़ी बोरिस बेकर को दिवालिया घोषित कर दिया गया।
  14. जून 2017 को को पुर्तगाल के वन में आग लगने से 65 लोगों की मृत्यु हो गई।
  15. CRPF द्वारा श्रीनगर में मददगार नामक हेल्पलाइन हेल्पलाइन प्रारंभ किया गया है।
  16. यूनिसेफ द्वारा सबसे कम उम्र के (19 वर्ष) मुजुल अल बेले हान को सद्भावना राजदूत बनाया गया।
  17. 18 जून 2017 को भारत का पहला शहर इंदौर का ट्रैफिक रोबोट के द्वारा संचालित किया गया।
  18. ऑस्ट्रेलिया के द्वारा भारतीयों के लिए ऑनलाइन वीजा देने की सुविधा प्रारंभ किया गया है।
  19. 16 जून 2017 से हर दिन तेल की कीमत निर्धारित की जा रही है।
  20. भारत में सबसे अधिक बाघ कार्बेट नेशनल पार्क पार्क में है जबकि घनत्व के दृष्टिकोण से सबसे अधिक ओरांग नेशनल पार्क में है।
  21. स्वीडन जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए 2045 तक नेट जीरो ग्रीन हाउस गैस उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा है।
  22. केंद्रीय सिल्क बोर्ड द्वारा यूपी के गोरखपुर में सिल्क रिसर्च एंड प्रोडक्शन केंद्र खोला गया।
  23. देश का पहला ज्वेलरी रिसर्च इंस्टिट्यूट की आधारशिला कर्नाटक के में रखा गया है।
  24. आरबीआई ने महात्मा गांधी श्रृंखला की 500 नोट जारी किया जिसमें इनसेट नंबर A रखा गया है।
  25. यूनिसेफ संघ जून 2017 को भारत के शिक्षा हेतु 80 मिलियन यूरो जारी किया गया है जिसमें से 25 मिलियन यूरो का भुगतान कर दिया गया है।
  26. पाकिस्तान, भारत के के विरोध के बावजूद पाक अधिकृत कश्मीर में सिंधु नदी पर चीन की सहायता से एक बांध बना रहा है जिसका नाम दियामरे-बाशा रखा गया है।
  27. नार्वे में स्कूल और कॉलेज  मैं बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  28. बैक टू स्कूल कार्य का प्रारंभ आंध्र प्रदेश में 12 जून को किया गया।
  29. फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार लीजन डी ऑनर 2017 सौमित्र चटर्जी को दिया गया।
  30. विश्व बैडमिंटन रैंकिंग के 15 खिलाड़ियों में पहली बार तीन भारतीय खिलाड़ी सम्मिलित हुए हैं।
  31. रविंद्र नाथ द्वारा रचित विज्ञान पर आधारित पहली पुस्तक विश्व परिचय का अंग्रेजी में अनुवाद करने का निर्णय लिया गया है।
  32. फ्रेंच ओपन महिला एकल खिताब 2017 लातविया के जेलेना ऑस्तापेंको को मिला है।
  33. 20 जून 2017 को बहु राष्ट्रीय वविमानन और रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी लॉकहेड मार्टिन ने भारत के टाटा एडवांस सिस्टम के साथ F-16 लड़ाकू विमान उत्पादन करने हेतु समझौता हस्ताक्षर किए।
  34. तेलंगाना देश का पहला राज्य बना जिसका अपना आधिकारिक ई-वॉलेट है।
  35. देश में मवेशियों के लिए ब्लड बैंक स्थापित करने वाला पहला राज्य उड़ीसा है।
  36. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 24 जून को संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  37. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व योगा दिवस 21 जून के अवसर पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया।
  38. भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण(IRDAI) ने सहारा इंडिया लाइफ इंसुरेंस का प्रबंधन संभाला है।
  39. चीन में वन डॉग पॉलिसी लागू की गई इस पॉलिसी के लागू होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति दो कुत्ते नहीं पाल सकता है।
  40. फ्रेंच ओपन 2017 का पुरूष किताब राफेल नडाल ने जीता।
  41. डेनमार्क के सांसदों ने ईशनिंदा कानून को निरस्त कर दिया है यह कानून लोगों को धार्मिक किताबों को जलाने तथा अपमान करने से रोकता था।
  42. भारतीय मूल की प्रति कारगिल इंग्लैंड में चुनाव जीतने वाली पहली सिख महिला सांसद बन गई है।
  43. मोंटेनेग्रो नाटो का 29 वां सदस्य बना।
  44. यूनेस्को की महा निदेशक इरीना बोकोवा द्वारा शारजाह (UAE) को वर्ल्ड बुक कैपिटल फॉर द ईयर 2019 रखा गया है।
  45. मिस इंडिया 2017 का खिताब मानुषी छिल्लर ने जीता।
  46. CRY के रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक बाल मजदूर है।
  47. ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2017 में भारत 60वें स्थान पर है।
  48. महाराष्ट्र सरकार ने 12 जून को 31 लाख किसानों का का कर्ज माफ कर दिया।
  49. 7 जून 2017 को नेपाल के नए प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा बने हैं।

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