26 May 2018

गहड़वाल वंश | Gahadavala Dynasty

गढ़वाल वंश के संस्थापक चंद्रदेव थे। इनकी राजधानी वाराणसी (काशी) थी। गढ़वाल वंश को राठौर वंश भी कहा जाता है। चंद्र देव ने 1080 से 1100 ईस्वी तक शासन किया। गढवाल नरेशों को काशी नरेश भी कहा जाता है।

गढ़वाल वंश के प्रमुख शासक :

  • मदन चंद्र (1104-1114 ई०)
  • गोविंद चंद्र (1114-1154 ई०)
  • विजय चंद्र (1155-1170 ई०)
  • जयचंद्र (1170-1194 ई०)

गोविंद चंद्र

इस वंश के विद्वान एवं सर्वाधिक शक्तिशाली शासक गोविंद चंद थे। इनके मंत्री लक्ष्मीधर संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। लक्ष्मीधर ने संस्कृत मैं कृत्यकलपतरू की रचना किया। गोविंद चंद्र ने पूर्वी मालवा (दर्शाण) को जीता था। इन्होंने चंदेलों और कलचुरियोंको भी परास्त किया था। गोविंद चंद्र की एक रानी कुमार देवी थी। इसने सारनाथ में धर्मचक्र जीन विहार का निर्माण करवाया था।

जयचन्द

इस वंश अंतिम शक्तिशाली शासक जयचंद हुआ। इसने 1170 से 1194 तक शासन किया। जयचंद्र के दरबार में संस्कृत का प्रसिद्ध कवि श्रीहर्ष रहता था श्रीहर्ष ने नैषध चरित की रचना की थी सम्राज्य विस्तार के क्रम में जयचंद और पृथ्वीराज (तृतीय) चौहान के बीच युद्ध हुई जिसमें जयचंद की हार हुई। युद्ध का तत्कालीन कारण परमर्दिदेव का सहयोग और पुत्री संयोगिता का अपहरण था। पृथ्वीराज चौहान ने जयचंद की पुत्री संयोगिता का स्वयंवर स्थल से अपहरण कर लिया था। इस हेतु जयचंद तराइन के तृतीय युद्ध में तटस्थ रहा। ऐसा माना जाता है कि गौरी को अप्रत्यक्ष रुप से जयचंद ने ही आमंत्रित किया था परंतु इसका कोई साक्ष्य नहीं है। गौरी पृथ्वीराज चौहान से निपटने के बाद जयचंद को भी चंद्रवार के युद्ध (1194) में परास्त कर वध कर दिया कर दिया। गौरी कन्नौज और बनारस को लूटा और भारत में गौर साम्राज्य की स्थापना किया।

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