25 May 2018

भारत पर विदेशी आक्रमण (मध्यकालीन) : भारत पर अरबों का आक्रमण

मध्यकाल में प्रथम विदेशी आक्रमण अरबों के द्वारा 636 ई० में गुजरात के भड़ौच पर किया गया। इसके बाद गुजरात के देवल पर आक्रमण किया गया। इसकी जानकारी अली अहमद की कृति चचनामा से मिलती है। चचनामा का फारसी में अनुवाद मोहम्मद-अली-बिन-कूफ़ी ने किया।
अरबी आक्रमणकारियों ने पहले सीरिया, मिस्र, उत्तरी अफ्रीका स्पेन व ईरान को जीता फिर उन्होंने सिंध की ओर रुख किया। अरब का सबसे सफल आक्रमण 712 में मोहम्मद-बिन-कासिम के नेतृत्व में सिंध पर हुआ। सिंध के शाषक दाहिर राबोर नामक स्थान पर परास्त हुआ। इसके बाद जयसिंह भी मोहम्मद बिन कासिम से परास्त हुआ।
मोहम्मद-बिन-कासिम द्वारा भारत में सर्वप्रथम जजिया कर लगाया गया। 715 ईसवी में में कासिम के देहांत के पश्चात जुनैद गवर्नर बना। जुनैद को प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम ने परास्त किया।
अरबों के द्वारा दो भारतीय ग्रंथ, चरक संहिता (चरक) और पंचतंत्र (विष्णु शर्मा) का अनुवाद अरबी भाषा में किया गया। अरब के आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन लूटना और इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करना था। हजरत मोहम्मद (632 ई०) के देहांत के पश्चात  उनके  उत्तराधिकारियों ने  इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु  विभिन्न प्रदेशों पर आक्रमण करना प्रारंभ कर दिया था। इनका मकसद पूरी दुनिया पर इस्लाम धर्म को फैलाना था। इसके लिए उन्हें अपार दौलत चाहिये थी। इसके लिए उन्होंने विजित क्षेत्रों में टूट-पाट जारी रखा।
अरब वासियों ने भारत से नक्षत्र विज्ञान, दर्शन शास्त्र, गणित (विशेषतः दशमलव प्रणाली), चिकित्सा और शासन प्रबंध की कुशलता को सीखा।

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